रिसर्च के साथ कंसलटेंसी भी देगा सीवीआरयू

lab1बिलासपुर। डाॅ.सी.वी.रामन् विश्वविद्यालय के सेंटर आॅफ एक्सीलेंस में अब कंसलटेंसी सुविधा शुरू की गई है। इसके माध्यम विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के अलावा प्रदेश और देश के शोधार्थियों को उच्च स्तर के रिसर्च की सुविधाएं दी जा रही है। एडवांस उपरकणों का यह संेटर आॅफ एक्सीलेंस प्रदेश का एक मात्र रिसर्च सेंटर है, जहां एटामिक एब्जावेशन स्पेक्ट्रोफोटोमीटर विथ कम्यूटर इंरटफेस, हाई परफाॅरमेंस लिक्वीड क्रोमेटोग्राॅफी, डबल ंिबम स्प्रेक्ट्रोफोटोमीटर डिजीटल, जेल डाक्यूूमेंटेशन सिस्टम, पीसीआर थर्मल साइक्लर,फ्लमे फोटोमीटर डिजीटल, लेमिनार एयरफ्लो, साॅक्सलेट आपरेटस, बाम्ब कैलोरीमीटर डिजीटल, बीओडी इनक्यूबेटर सहित अन्य एडवांस उपकरण उपलब्ध है। वर्तमान में यहां पेय जल में प्रदूषित करने वाले जहरीले धातु, उद्योगों का प्रदूषण, डीएनए की पहचान एवं उसके रूप, मेडिशनल प्लांट का आईसोलेशन एवं स्टरलाईजेशन से संबंधित शोध किए जा रहे हैं।
lab2डाॅ. सी.वी.रामन् विश्वविद्यालय में रिसर्च के लिए सेंटर आॅफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई थी, इसका उद्देश्य न केवल विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, बल्कि प्रदेश और देश के शोधार्थियों के लिए उच्च स्तरीय शोध का माहौल तैयार करना है। जिससे विद्यार्थी देश-विदेश में छत्तीसगढ़ का नाम रौशन करें साथ सामाजिक सरोकार के शोध हों। ऐसे अत्याधुनिक उपकरणों की सुविधा प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में नहीं थी, डाॅ.सी.वी.रामन् विश्वविद्यालय ने सेंटर आॅफ एक्सीलेंस के माध्यम से एक उन्नत लैब बनाने का बीड़ा उठाया। इसमें करोड़ों की लागत से अधोसरंचना एवं विश्व स्तरीय उपकरण स्थापित किया गया है। इससे विद्यार्थियों में शोध के प्रति लगन देखी जा रही है। इसका प्रमाण यह है कि विद्यार्थियों के द्वारा दुर्लभ मेडिशलन प्लांट का संग्रह, बायो डायर्वसिटी का अध्ययन, इन सेक्टीसाइट्स, हर्बी साइड्स का प्रभाव, इनआर्गीनिग फर्टिलाइजर का दूषित प्रभाव, पानी एवं वायु में टाक्सीक मेटल की उपस्थिति सहित अनेक विषयों पर शोध किया जा रहा है। यहां के विद्यार्थियों द्वारा विदेशों के साईटिफिक जर्नलस में शोध लेख का प्रकाशन किया जा रहा है।

किस उपकरण की क्या है उपयोगिता
एचपीएलसी-यह उपकरण पदार्थों को अलग करने का कार्य करता है। इससे हमें जरूरत के पदार्थ तरल माध्यम से अलग करके प्राप्त हो जाता है। इसके उस पदार्थ के औषधीय गुण व प्रभाव को जाना जा सकता है।
जेल डाक्यूमेंटेशन सिस्टम-इस उपकरण से डीएनए और प्रोटिन के आणुविक भार ज्ञान किया जाता है। अलग-अलग बैड के माध्यम से डीएनए और प्रोटिन का फोटोग्राफ लिया जा सकता है।पीसीआर थर्मल साइकलर- इस उपकरण से एक डीएनए के टुकड़े की बहुत सी कापी की जा सकती है। यह डीएनए विभिन्न प्रकार के प्रोटिन, इनजांइम, अमिनो एसिड का निर्माण करते हैं। इससे बीमारी की दवाईयंा बनाए जाने में उपयोग होता है। साथ ही खाद्य पदार्थों के उत्पादन में भी इसका उपयोग किया जाता है।

                                                        लेमिनार एयरफ्लो- इस उपकरण के माध्यम से कार्य करने के लिए स्टेराइल इनवारोमेंट प्रदान किया जाता है। जिससे अवांछित सुक्ष्म जीव दूसरे सुक्ष्म जीवों के ग्रोथ को खराब नहीं करते हैं।एटामिक एब्जार्बसन स्पेक्ट्रोफोटोमीटर-इस उपकरण से प्रदूषित जल में उपस्थित हानिकारक पदार्थ जैसे कि मरक्यूरी,आरसेनिक, लेड का पता लगाया जाता है।बाम्ब कलरीमीटर-इस उपकरण से किसी भी पदार्थ की कैलोरिफीक वैल्यू और किसी भी द्रव्य में उपस्थित आक्सीजन की मात्रा पता लगाई जाती हैफ्लेमफोटोमीटर-मिट्टी में पाए जाने वाले विभिन्न पदार्थ जैसे की केल्सियम,पोटेशियम, सोडियम आदि की मात्रा जानी जाती है। डबल बीम स्पेक्ट्रोफोटोमीटर-इस उपकरण से पानी में उपस्थित सभी प्रकार के धातुयिक और आधातुयिक तत्वों की उपस्थिति पता लगाई जाती है।साॅक्सलेट आपरेटस- इस उपकरण से विभिन्न औषधीय पौधों में उपस्थित उपयोगी पदार्थों को अलग किया जाता है। इसके बाद इस पदार्थ से बीमारी पैदा करने वाले जीवाणुओं पर प्रभाव की जानकारी ली जाती है।
धरोहर हैं दुर्लभ मेडिशनल प्लांट
अमरकंटक एवं अचानकमार रिजर्व फारेस्ट के घने जंगलों में पाए जाने वाले दुर्लभ प्रजाति ने मेडिशनल प्लांट का संरक्षण मेडिशलन गार्डन में किया जा रहा है। जो प्लांट दुर्लभ हैं, उनको पहचान कर संरक्षित किया जा रहा है, ताकि छत्तीसगढ़ प्रचीन मेडिशन धरोहर को शोध के लिए रखा गया है, ताकि भावी पीढ़ी प्राचीन मेडिशलन प्लांट और उपयोगिता को पहचान सके।

dubey_cvruपर्यावरण संरक्षण संबंधित शोध को बढ़ावा-कुलपति
विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ.आर.पी.दुबे ने बताया कि आज सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण प्रदूषण की है। इसे संरक्षित किए बिना हम मानव के उच्च स्तरीय जीवन की कल्पना करना बईमानी है। इसलिए शोध को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना जरूरी है। इसलिए विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए शोधार्थियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पर्यावरण शोध के लिए विशेष उपकरण उपलब्ध कराया गया है।

समय की जरूरत है कंसलटेंसी -कुलसचिव
cvru pandeyइस संबध में जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव शैलेष पाण्डेय ने बताया कि कंसलटेंसी आज के समय की जरूरत है। नेक और यूजीसी के मापदंडों के अनुरूप विश्वविद्यालयों को कंसलटेंसी सुविधा देना जरूरी है। श्री पाण्डेय का कहना है कि यह राष्ट्रीय और सामाजिक दायित्व है जिससे सीवीआरयू ने पूरा किया है। सीवीआरयू प्रदेश का एक मात्र विश्वविद्यालय है, जहां सेंटर आॅफ एक्सीलेंस के माध्यम से कंसलटेंसी सुविधा प्रारंभ की गई है। यह तभी संभव है जब उच्च स्तरीय और उन्नत उपकरण लैब में उपलब्ध हों। इससे विश्वविद्यालय के विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देश के शोधार्थियों को शोध में मदद मिल रही है। जल्द ही सेंटर आॅफ एक्सीलेंस को देश और विदेश संस्थानों के एडवांस लैब से अनुबंध किया जा जाएगा। जिससे कि शोधार्थियों के शोध का दायरा विश्व स्तर तक पहुंचा जा सकेगा।

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