शिवराज के शिक्षकों ने आधे मन से लिया संविलियन का तोहफा..शिक्षकों ने कहा अभी बहुत संघर्ष..अब छत्तीसगढ़ की बारी

बिलासपुर—(मनीष जायसवाल)अध्यापक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश के नेता नेता एचएन नरवरिया ने बताया कि 22 साल की कठिन तपस्या के बाद सरकार ने संविलियन का तोहफा दिया है। कमोबेश छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मी भी संविलियन के मुहाने तक पहुंच गए हैं। जिस दिन सरकार संविलियन की घोषणा करेगी शिक्षाकर्मियों से बेगारी के साथ लानत-मलानत का तमगा उतर जाएगा। दरअसल शिक्षाकर्मियों को सरकार ने बेगार बना दिया है। जबकि शिक्षाकर्मियों में पढ़े लिखे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है। आखिर शिक्षाकर्मियों को संविलियन क्यों चाहिए के सवाल पर नरवरिया ने संविलियन के एक नहीं कई फायदे गिनाए। और होने वाले नुकसान को भी पेश किया।

                          अध्यापक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश के नेता एचएए नरवरिया ने बताया कि दुआ करता हूं कि मध्यप्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मी साथियों को भी संविलियन का तोहफा मिल जाए। यद्यपि छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मी संविलियन के मुहाने तक पहुंच गए। उम्मीद है कि जल्द ही मध्यप्रदेश की तरह छ्त्तीसगढ़ के सभी शिक्षाकर्मी साथियों की मांग पूरी हो जाएगी।

शिवराज का तोहफा

                   सीजी वाल को एचएन नरवरिया ने बताया कि संवियलन होने से सबसे बड़ा और पहला लाभ सभी शिक्षाकर्मी सरकारी कर्मचारी बन गए हैं । संविलियन के बाद शासन की तरफ से वह सभी सुविधाएं मिलेंगी जो अन्य शिक्षकों को मिलती है। शिक्षाकर्मी अब सरकारी कर्मचारी बन गए हैं। यात्रा भत्ता, मकान किराया भत्ता, चिकित्सा प्रतिपूर्ति भत्ता, जुलाई 2018 से 7 वां वेतनमान मिलेगा। संविलियन मिलने के बाद बीमा का भी लाभ मिलेगा।

                      नरवरिया ने बताया संविलयन से ग्रेजुएटी का फायदा होगा। रिटायर्ड होने के बाद 16 माह का वेतन मिलेगा। चूकि अभी सरकार पर वित्तीय वर्ष में कोई भार नहीं आयेगा। इसलिए इसका विवरण अलग से नहीं किया गया है।

          मध्यप्रदेश शिक्षक नेता नरवरिया ने संविलियन का फायदा गिनाते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति में लाभ होगा। नरवरिया ने कहा कि चूंकि यह समस्या आरटीई नियम 2009 से जुड़ी हुई है। इसलिए मध्यप्रदेश सरकार को केंद्र सरकार से अनुमति लेकर केबिनेट मे पेश कर नियमों में शिथलीकरण किया जायेगा। संविलियन का एक बड़ा फायदा यह भी है कि रिटायरमेंट पर अवकाश नगदीकरण 240 से बढकर 300 दिन हो जाएगा।

संविलियन के बाद नुकसान

                          नरवरिया ने सीजी वाल से संविलियन के बाद होने वाले नुकासन को गिनाया। उन्होने बताया कि पेंशन एक ऐसा मुद्दा है जो केंद्र और राज्य सरकार का विषय है।  मतलब पेंशन मुद्दा दोनों सरकार के अधीन है। इसलिए पेंशन को राज्य सरकार पर दबाव बनाकर हासिल करना पड़ेगा। वैसे केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार ने इसमें संशोधन किया है। संशोधन में कहा गया है कि यदि कोई शासकीय सेवक की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तो संबंधित कर्मचारी परिवार को पूरे पेंशन का लाभ मिलेगा।

                                    नरवरिया के अनुसार शिक्षाकर्मियों को मध्यप्रदेश सरकार ने संविलियन के बाद जीपीएफ कटौती अन्य शिक्षकों की तरह नहीं करेगा। निश्चित ऱूप से यह बहुत बड़ा नकुसान है। वरिष्ठ अधयापकों को राजपत्रित अधिकारी का भी दर्जा नहीं दिया गया है। प्रमोशन से पहले शिक्षकों को सीमित विभागीय परीक्षा से गुजरना होगा। पदनाम सहायक शिक्षक, शिक्षक और वयाखयाता भी नहीं रहेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि जुलाई 2018 के पहले के वेतन. भत्तों और सुविधाओं के पात्र नहीं संविलियन किए गए शिक्षक नहीं होगें। सीधा मतलब है कि आपकी नौकरी नए सिरे से प्रांरभ होगी।

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