कांग्रेसियों ने किया साहू से किनारा…बताया.आरोप में विश्वास कम उत्साह ज्यादा..दबी जुबान में कहा सब टिकट का खेल

बिलासपुर–चुनाव नजदीक आते ही हमेशा की तरह विवादों के साथ नए नए मामले सामने आने लगे हैं। ताजा मामला तात्कालीन कलेक्टर कवर्धा पी.दयानन्द को लेकर है। कवर्धा कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्म साहू ने आरोप लगाया है कि जिला पंचायत चुनाव 2014 में तात्कालीन कवर्धा कलेक्टर के इशारे पर वार्ड क्रमांक 13 में उसे हराया गया। चूंकि मामला काफी पुराना है। और समय चुनावी मौसम का है। प्रशासनिक हलके में रामकृष्ण साहू के आरोपों को बहुत अधिक गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। खुद कांग्रेस नेता भी दबी जुबान में कह रहे हैं कि आरोप में दम नहीं है। जब आरोप लगाने वाला खुद कह रहा है कि मामला हाईकोर्ट में है तो उसे मीडिया में आने से पहले कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए था।

                      कवर्धा जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रामकृष्ण साहू ने बिलासपुर कलेक्टर पर सनसनीखेज आरोप लगाया है। साहू का आरोप है कि उले पंचायत चुनाव में वोटो के टेबुलेशन में गड़बड़ी कर हराया गया। ऐसा तात्कालीन कलेक्टर  दयानन्द के इशारे पर किया गया। आरोप लगाने वाले के अनुसार मामले को लेकर कोर्ट में परिवाद लगाया। कोर्ट ने माना कि टेबुलेशन में ओव्हर राइटिंग हुई है। बावजूद इसके थाने में मामला दर्ज नहीं किया गया।

                                              रामकृष्ण की तरफ से कलेक्टर पी.दयानन्द पर लगाए गए आरोप को लेकर प्रशानिक और राजनैतिक हल्के में जमकर चर्चा है। कई कांग्रेसी नेताओं और अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि आरोप निराधार है। जब परिवाद के बाद मामला दर्ज नहीं किया गया तो रामकृष्ण को ऊपरी कोर्ट में जाना चाहिए था। ठीक चुनाव के पहले हाईकोर्ट में मुद्दे को लेकर जाना और मीडिया के सामने आना। यह जाहिर करता है कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति की नीयत मेंं खोट है। परिणाम आने के बाद प्रार्थी को तात्कालीन समय मीडिया में जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। दरअसल मामले को अब सामने लाकर रामकृष्ण ने विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी को पुख्ता बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसा कर वह पार्टी को नुकसान भी पहुंचा रहा है।

                      एक अधिकारी और बड़े राजनैतिक संगठन के दो एक पदाधिकारियों ने बताया कि टेबुलेशन का काम ड्यूटी पर तैनात अधिकारी करता है। कलेक्टर की इसमें किसी प्रकार की भूमिका नहीं होती है। अधिकारी के सामने ही वोटों की गिनती होती है। गिनती के समय राजनैतिक पार्टियों के एजेंट तैनात रहे हैं। अधिकारी एजेन्टों के सामने ही टेबुलेशन फार्म भरता है।  प्रक्रिया कई बार होती है। मौके पर मौजूद एक-एक एजेन्टों से टेबुलेशन अधिकारी दर्ज संख्या का तसदीक कराता है। एजेंटों के संतुष्ट होने के बाद ही वोटों की गिनती होती है। कभी कभी सावधानी के बाद भी जोड़ में गलती आ ही  होती है। लेकिन एजेन्टों के सलाह और परामर्श के बाद अंक को सुधार भी लिया जाता है। बाद में यही सुधार हारे हुए प्रत्याशी का हथियार बन जाता है। हथियार की जद में जिम्मेदार अधिकारी सबसे पहला आता है। कवर्धा पंचायत चुनाव के दौरान भी ऐसा ही हुआ। पहले एजेन्टों के सामने सब कुछ ठीक रहा। अब चुनाव नजदीक आते ही ओव्हरराइटिंग को मुद्दा बना दिया गया।

                   सूत्र ने बताया कि आरोप लगाने वाले रामकृष्ण और तात्कालीन कलेक्टर के बीच चुनाव के बाद कुछ अनबन भी हुई थी। जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है। प्रार्थी का मानना है कि कलेक्टर के इशारे पर टेबलेशन के दौरान ओव्हरराइटिंग हुई। जिसके कारण वह हार गया। जबकि सच्चाई कुछ अलग ही है।

                        नाम नहीं छापने पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि रामकृष्ण साहू विधानसभा टिकट का दावेदार है। रामकृष्ण का मानना है कि टिकट मिलने में सबसे बड़ी बाधा पंचायत चुनाव में मिली है। हार के लिए दूसरा कोई नहीं बल्कि तात्कालीन कलेक्टर जिम्मेदार है। यही कारण है रामकृष्ण कलेक्टर को निशाना बनाकर अपनी टिकट की दावेदारी को पक्का करना चाहता है। देखने वाली बात होगी कि आरोपों में कितना दम है। क्या इन आरोपों के बाद  रामकृष्ण की टिकट पक्की है। फिलहाल कहना कुछ मुश्किल है। फिर भी देर सबेर पता चल ही जाएगा। फिलहाल पार्टी में रामकृष्ण का दावा उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। कोई भी कांग्रेसी नेता रामकृष्ण के समर्थन मे सामने नहीं आना चाहता है। क्योंकि उन्हें खुद लगता है कि मामले में उत्साह ज्यादा विश्वास कम है। ।

             बावजूद इसके कबीरधाम कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर कलेक्टर को चुनाव से हटाए जाने की मांग की है। फिलहाल ऐसा होता नहीं दिखाई दे रहा है। क्योंकि कोर्ट में मामला होने के बाद भी मीडिया में बयानबाजी किसी सस्ती लोकप्रियता की तरफ इशारा करता है।

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