ईनामी भगोड़ा हरदीप की बढ़ गयी मुसीबत…हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इंकार…वान्टेड को तलाश रही पुलिस

बिलासपुर–फर्जी दस्तावेज के सहारे पार्टनर की करोड़ों की जमीन बेचने वाला भगोडा बिल्डर को हाईकोर्ट से झटका लगा है। जस्टिस सावंत के कोर्ट ने हरदीप खनूजो की जमानत याचिका खारिज कर दिया है। यानि जमानत देने से इंकार कर दिया है। हाईकोर्ट से जालसाज हरदीप खनूजा को करारा झटका लगा है। फिलहाल पुलिस गिरफ्तारी से बचने तथाकथित बिल्डर हरदीप खनूजा फरार है। पुलिस कप्तान ने आरिफ शेख ने हरदीप खनूजा को पकड़ने या पता ठिकाना बताने वाले को ईनाम दस हजार रूपए देने का एलान किया है।

  क्या है मामला
               मालूम हो कि आटो चालक से बिल्डर बना हरदीप खनूजा ऊर्फ राजू के खिलाफ तखतपुर थाना में फर्जी तरीके से पार्टनर की जमीन बेचने और धोखाधड़ी के आरोप में विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज है। हरदीप पर आरोप है कि उसने तीन अन्य पार्टनर को अंधेरे में रखकर तखतपुर ब्लाक स्थित अरई बंध की 35 एकड़ जमीन को पांच करोड़ 16 लाख में फर्जी दस्तावेजों के सहारे अधिराज बिल्डर से सौदा कर लिया। हरदीप ने सौदा के बाद बतौर बयाना अधिराज बिल्डर से 1 करोड़ 6 लाख रूपए लिया।
कैसे हुआ खुलासा
                 मामला उस समय सामने आया जब अधिराज बिल्डर ने सुनील छावड़ा को रजिस्ट्री के लिए दबाव बनाया। सुनील छावाड़ा ने स्पष्ट किया कि जमीन में हरदीप खनूजा की किसी प्रकार की आर्थिक हिस्सेदारी नहीं है। वह जमीन डेवलपमेन्ट को लेकर मात्र 10 प्रतिशत का हिस्सेदार है। अधिराज बिल्डर को सुनील ने बताया कि तीन अन्य संचालकों में से केवल दो लोगों को ही यानि उन्हें और रवि मोटवानी को ही जमीन खरीदने बेचने का अधिकार है। जानकारी मिलने के बाद सुनील छावड़ा और अन्य दो पार्टनरों ने हरदीप खनूजा के खिलाफ तखतपुर थाने में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराया। इसके बाद समय समय पर पुलिस प्रशासन के आलाधिकारियों से संपर्क कर हरदीप के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
बनाया फर्जी दस्तावेज
                                             इस बीच अधिराज बिल्डर ने जब हरदीप खनूजा पर दबाव बनाया तो हरदीप ने सुनील छावड़ा और अन्य पार्टनरों के फर्जी हस्ताक्षर से बिक्रीनामा तैयार किया। मामले में सुनील छावड़ा की शिकायत पर पुलिस प्रशासन सभी दस्तावेजों की सत्यता जांच करने पीएचक्यू को भेजा। पीएचक्यू ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बिक्रीनामा के सभी दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किये गये हैं।
जमानत याचिका खारिज
                    सच्चाई सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस कप्तान आरिफ शेख ने हरदीप खनूजा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करवाया। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पिछले एक महीने से अधिक समय से हरदीप खनूजा फरार है। जिला सत्रन्यायालय ने भी खनूजा को जमानत देने से इंकार कर दिया। खनूजा के वकील मनोज परांजपे ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। आज सुनवाई के बाद जस्टिस सावंत के कोर्ट ने सुनील छावड़ा की तरफ से आपराधिक मामलों के प्रसिद्ध वकील रणवीर सिंह, पूर्व जिला न्यायधीश और रजिस्ट्रार जनरल वरिष्ठ अधिवक्ता अरविन्द श्रीवास्तव ने कागजात के साथ जस्टिस सांवंत के सामने अपना तर्क रखा। सुनील छावड़ा के वकीलों ने बताया कि हरदीप खनूजा को जमानत मिलने से मामले में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। चूंकि फर्जी दस्तावेज बनाकर उसने करोड़ों की सम्पत्ति को कौड़ियों के दाम बेच दिया है। जाहिर सी बात है कि जमानत मिलने के बाद वह फर्जीवाड़ा कर केस पर प्रभाव डाल सकता है। इसलिए जब तक हरदीप को पुलिस हिरासत में नहीं लिया जाता है। तब तक जमानत देना उचित नहीं होगा।
                      मामले की गंभीरता और तर्कों को ध्यान में रखते हुए जस्टिस सावंत के कोर्ट ने भगोड़ा बिल्डर हरदीप खनूजा की जमानत याचिका को स्वीकार नहीं करते हुए गिरफ्तार होने तक निरस्त कर दिया है।
ईनाम दस हजार
 जानकारी हो कि पुलिस पिछले एक महीने से तथाकथित बिल्डर हरदीप खनुजा को तलाश रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख ने ठग बिल्डर हरदीप खनूजा उर्फ राजू को भगोड़ा  घोषित कर दिया है। पुलिस कप्तान ने एलान किया है कि हरदीप खनूजा का पता ठिकाने बताने वाले या पकड़वाने वाले को पुलिस प्रशासन की तरफ से 10 हजार रूपए बतौर ईनाम दिया जाएगा।

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