अंतरिक्ष से होगी खदानों की सीधी निगरानी

miningरायपुर ।    देश की बहुमूल्य खनिज सम्पदा का अवैध उत्खनन करके राष्ट्रीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की अब खैर नहीं। केन्द्रीय खान मंत्रालय ने ऐसे लोगों पर अंकुश लगाने के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान के तहत माईनिंग सर्वेलेंस सिस्टम तैयार कर लिया है। इस प्रणाली का परिचालन दूर संवेदी भू-उपग्रह और अत्याधुनिक सूचना और संचार तकनीक के जरिए किया जाएगा। देश की धरती पर होने वाली खनन गतिविधियों की अंतरिक्ष से सीधी निगरानी की जाएगी। केन्द्रीय खान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  पीयूष गोयल ने शनिवार को नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस नवीन प्रणाली का राष्ट्र व्यापी शुभारंभ किया। उन्होंने इसमें आम जनता की भागीदारी के लिए एक विशेष मोबाइल एप्प का भी लोकार्पण किया। आम नागरिक भी इसका उपयोग कर सकेंगे।
पीयूष गोयल ने इसका शुभारंभ करते हुए देश के विभिन्न राज्यों की राजधानियों में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में मौजूद खनिज अधिकारियों और मीडिया प्रतिनिधियों को माईनिंग सर्वेलेंस सिस्टम की विशेषताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली खनन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और खदानों की निगरानी में जनसहभागिता की दृष्टि से काफी उपयोगी साबित होगी।
उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के तहत देश का कोई भी नागरिक किसी भी इलाके में होने वाली अवैध खनन गतिविधियों के बारे में अपने मोबाइल फोन के जरिए सरकार तक फोटो और सूचनाएं आसानी से पहुंचा सकेगा, जिसका त्वरित संज्ञान लिया जाएगा। इसके लिए एक मोबाइल एप्प बनाया गया है। यह दुनिया में इस प्रकार का पहला मोबाइल एप्प है। भारतीय खनन ब्यूरो (आईबीएम) और भास्कराचार्य इंस्टीट्यूट फार स्पेस एप्लीकेशंस एण्ड जियो-इन्फार्मेटिक्स, गांधी नगर के सहयोग से यह माईनिंग सर्वेलेंस सिस्टम तैयार किया गया है। इसे नेशनल सेंटर ऑफ जिओ-इंफरमेटिक्स पोर्टल डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूडॉटएनसीओजीडॉटजीओव्हीडॉटइन/माईनिंग/लॉगइन (www.ncog.gov.in/mining/login) पर होस्ट किया गया है। श्री गोयल ने बताया कि इस प्रणाली के जरिए खसरा-नक्शों पर स्वीकृत खनन क्षेत्रों को जियो-रेफरेंसड कर सेटेलाईट पर सुपर इम्पोज किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि स्वीकृत खदान क्षेत्र के 500 मीटर के घेरे में किसी भी प्रकार के अवैध उत्खनन की जांच इसके जरिए की जा सकेगी। कोई विसंगति मिलने पर तत्काल ट्रिगर जारी होगा, जिसे भारतीय खनन ब्यूरो (आईबीएम) द्वारा तत्काल संबंधित जिलों के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए ऑनलाईन भेज दिया जाएगा। इसका नियंत्रण कक्ष आईबीएम के मुख्यालय में बनाया गया। अवैध उत्खनन के मामलों में कार्रवाई के बाद मोबाइल एप्प पर उसकी रिपोर्ट भी दी जाएगी। देश भर में मुख्य खनिजों की 1710 खदानें संचालित हो रही हैं। माईनिंग सर्वेलेंस सिस्टम में देश के सभी राज्यों के मुख्य खनिजों की उत्खनन प्रक्रिया की निगरानी के लिए इनमें से अधिकांश खदानों का डिजिटाईजेशन किया जा चुका है।

 

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