मेरा बिलासपुर

अन्याय के खिलाफ छेड़ेंगे जंग…कांग्रेस

IMG_20150530_132000बिलासपुर—- जब तक प्रदेश में भाजपा सरकार रहेगी। बिलासपुर का भविष्य नहीं बदलेगा। जब तक बिलासपुर की जनता नहीं जागेगी। तब तक भाजपा सरकार अपनी मनमाननी करती रहेगी। इतिहास गवाह है कि बिलासपुर की जनता ने जो कुछ पाया है अपने दम पर…रेलवे जोन हो या फिर सिम्स..। यदि जनता नहीं जागेगी तो एक दिन बिलासपुर का सत्यानाश हो जाएगा। धीरे-धीरे सब कुछ विखर जाएगा। कांग्रेस के संभागीय प्रवक्ता अभय नारायण राय ने सीजी वाल से ये बातें कही।

                      बिलासपुर के साथ हमेशा से अन्याय हुआ है। यहां की जनता जब जागती है तो उसे घुनघुना देकर बहला फुसला दिया जाता है। आज रायपुर स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में है। बिलासपुर के लिए कोई आवाज उठाने वाला वाले नहीं है। अभय नारायण राय ने बताया कि हमारी इसी उदासीनता का फायदा उठाते हुए सरकार ने एक नया फरमान जारी किया है कि कमिश्नर कार्यालय को कोनी स्थित बिलासा ताल के सामने स्थानान्तरित किया जाएगा। जमीन देख ली गयी है। जल्द ही बिल्डिंग निर्माण की अनुमति भी मिल जाएगी। यह निर्णय पूंजीपतियों को खुश करने और गरीबों का तिल तिल कर मारने के लिए सोची झमझी रणनीति के तहत लिया गया है।

               अभय नारायण राय कहते हैं यदि कमिश्नर कार्यालय को बिलासा ताल के सामने ले जाना ही था तो लाखों रूपए खर्च कर नया कमिश्नर कार्यालय क्यों बनाया गया। उन्होंने  बताया कि अच्छा होता बिलासा ताल के सामने बच्चों के लिए बाल भवन बना दिया जाता। अभय नारायण के अनुसार कम्पोजिट बिल्डिंग के आसपास जिले के लगभग सभी कार्यालय हैं। कोर्ट है, तहसील कार्यालय है, लगभग सभी विभाग हैं। बाहर से आने वालों का सारा काम एक ही जगह पूरा हो जाता है। अब यदि दूर गांव से कोई व्यक्ति किसी मामले को लेकर बिलासपुर आएगा और वह आधा काम कलेक्टर या आस पास के कार्यालय से करवाएगा। लेकिन जैसे ही उसे कलेक्टर कार्यालय से आदेश मिलता है कि यह काम कमिश्नर कार्यालय में होगा तो वह दो सौ रुपए खर्च कर दौड़े दौड़ कोनी जाएगा। जाहिर सी बात है यहां भूमाफियों और ट्रांसपोर्टरों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार कमिश्नर कार्यालय को बिलासाताल के पास ले जा रही है। यदि सरकार के पास पैसा करने का ही शौक है तो पहले 66 वार्डों की नाली,सड़क को दुरूस्त करे।

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                  अभय नारायण राय ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ऐसे तुगलकी फरमान का विरोध करेगी। आरटीओ कार्यालय को इसी तरह साजिश के तहत लगरा भेज दिया गया। बेरोजगारों को परेशान करने के लिए रोजगार कार्यालय को कोनी भेज दिया गया। वह दिन दूर नहीं जब  बिलासपुर विश्वविद्यालय को भी एक दिन शहर से बाहर कर दिया जाएगा। यह शासन की तुगलकी सोच नहीं तो और क्या है। कांग्रेस नेता अभय कहते हैं कि सरकार के पास न कोई सोच है और ना ही रणनीति। यदि नया बिलासपुर स्थापित करने का प्रयास किया जाए तो हम इसका स्वागत करेंगे। लेकिन सरकार तो रायपुर को ही पूरा प्रदेश मानती है जो दिवालियापन को जाहिर करता है। उन्होंने बताया अच्छा होता यदि नया बिलासपुर बसाने की कवायद होती तो हम इसका स्वागत करते। एक ही स्थान पर सभी कार्यालय होते,अधिकारी होते जाहिर सी बात है सारे काम एक ही स्थान पर होता।

              सोचने वाली बात है कि सात किलोमिटर दूर एक दस्तखत लेने के लिए लोगों को आरटीओ कार्यालय का दस बार चक्कर लगाना पड़ता है। जिन लोगों के पास साधन नहीं है उनके लिए तो लगरा गांव का आरटीओ कार्यालय किसी कालापानी से कम नहीं है। कार्यालय जब शहर में था तब तो अधिकारी मिलते नहीं थे। बाहर होने के बाद आरटीओ कर्माचारियों का रामराज हो गया है। अभय ने कहा कि समझ में नहीं आता बस स्टैण्ड शहर से 7 किलोमीटर दूर क्यों बनाया गया। बस स्टैण्ड से शहर और कलेक्टर कार्यालय पहुंचने के लिए क्या सुविधाएं दी गयी। गरीबों का हाल बुरा है। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों से लोग सुविधानुसर बस से स्टैण्ड तो पहुंच जाते हैं इसके बाद उतना ही किराया उन्हें कचहरी तक पहुंचने के लिए चुकाना पड़ता है। आखिर यह सब हो क्या रहा है।

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                 अभय नारायण ने बताया कि यदि भाजपा सरकार के पास नया बिलासपुर स्थापित करने का कोई मास्टर प्लानिंग है तो कांग्रेस पार्टी समर्थन करती है। लेकिन कमिश्नर कार्यालय को बिलासा ताल के पास ले जाने की साजिश का विरोध करती है। सरकार के ऐसे निर्णय से जाहिर होता है कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए ही कार्यालयों को दूर दूर ले जाने का निर्णय लिया है। क्योंकि कम्पोजिट कार्यालय में कम ही सही लेकिन भ्रष्टाचार पर लगाम तो था।

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