मेरा बिलासपुर

अल्टीमेटम…रेल रोको और आमरण अनशन का एलान

amit_jogi360x270बिलासपुर—बहुचर्चित राजेन्द्र तिवारी आत्मदाह के मामले में एक सप्ताह से अधिक बीत जाने के बाद भी पुलिस जांच शुरू नहीं हुई है। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में आमरण अनशन, रेल रोको आंदोलन और प्रदेश बंद की चेतावनी दी है। बयान लेने वाले तहसीलदार छुट्टी पर चले गए हैं।  जांच अधिकारी का कहना है कि उन्हें थानेदार की ओर से लिए गए बयान की जरूरत नहीं है।

                            बिल्हा के थानेदार दिलीप चंद्राकर को राजेन्द्र तिवारी आत्मदाह मामले से अलग रखा गया है। मामले की जिम्मेदारी एसडीओपी नवीनशंकर चौबे को जिम्मेदारी दी गई है। चौबे का कहना है कि तिवारी का मृत्यु पूर्व बयान नहीं मिलने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पाई है। राजेन्द्र तिवारी ने किन परिस्थितियो में खुद को आग के हवाले किया, पुलिस के लिए यक्ष प्रश्न बना हुआ है। जांच में देरी पर पुलिस का कहना है कि राजेन्द्र तिवारी का मृत्यु पूर्व बयान अभी तक उन्हें नही मिला है। जिसके चलते जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।

                                बिलासपुर के बिल्हा नगर पंचायत में 26 अक्टूबर को युवक कांग्रेस नेता राजेन्द्र तिवारी ने एसडीएम कार्यालय के सामने खुद पर पेट्रोल  डाल कर आत्मदाह किया था । मामले में कांग्रेस पार्टी ने दूसरे दिन उग्र आन्दोलन करते हुए बिलासपुर रायपुर हाइवे को सात घंटे तक बंद रखा। कांग्रेस ने राजेन्द्र को आत्मदाह करने के लिए मजबूर करने का आरोप तत्कालीन एसडीएम अर्जुन सिंह सिसोदिया पर लगाया है। कांग्रेसियों ने तत्कालीन एसडीएम को  गिरफ्तार करने की मांग की है। लेकिन सिसोदिया के निलंबन की मांग भी पूरी नहीं हुई और अब वे सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।

जय जय परशुराम का गूंजा जयकारा

IMG-20151102-WA0005                                 आम आदमी पार्टी और ब्राह्मण समाज ने भी राजेन्द्र को इंसाफ दिलाने के लिए सड़क की लड़ाई लड़ रहे है । कल बिल्हा में इन्होंने दिनभर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर अर्जुन सिसोदिया को गिरफ्तार करने दबाव बनाया। लेकिन बिलासपुर पुलिस और जिला प्रशासन इस मामले को लेकर बहुत जल्दबाजी में दिखाई नहीं दे रहे हैं। जांच टीम ने अभी तक कार्रवाई करना तो दूर जांच की दिशा भी नहीं की है । मौत के पहले राजेन्द्र तिवारी का बयान अब तक पुलिस को न मिलना है।

                      जांच अधिकारी नवीन शंकर चौवे ने बताया कि राजेन्द्र तिवारी का बयान तारबाहर थाना प्रभारी एसएन शुक्ला और तहसीलदार पीसी कोरी ने लिया था। थाना प्रभारी का बयान हमारे पास है लेकिन कोर्ट में उसे प्रमाणिक नहीं माना जाता। तहसीलदार पीसी कोरी एक सप्ताह की छुट्टी पर चले गए है, जिसके चलते राजेन्द्र का अंतिम बयान हमें नहीं मिल पाया है। तहसीलदार के सामने दर्ज बयान मिलने के बाद पुलिस की जांच शुरु हो पाएगी ।

                          बहरहाल मामले में हो रही देरी को लेकर एक बार फिर मरवाही विधायक अमित जोगी ने रेल रोको आन्दोलन और बिल्हा विधायक सियाराम कौशिक ने साथी समीर अहमद खान के साथ कलेक्टर कार्यालय के सामने आमरण अनशन का एलान किया है। कांग्रेस नेताओं ने सात नवंबर को प्रदेश बंद  की चेतावनी भी है।

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