आंदोलन की चेतावनी…पेन्ड्रावासियों ने मांगा जिला

12/6/2001 9:46 PMबिलासपुर—पेंड्रा को जिला बनाने की तकरीबन 25 साल पुरानी मांग एक बार फिर से सिलग चुकी है। स्थानीय स्तर पर कई राजनीतिक दल पेंड्रा को जिला बनाने की मांग को लेकर पहले भी आंदोलन कर चुके हैं लेकिन दूर-दूर तक उन्हें इस मिशन में कामयाबी नहीं मिली है। लिहाजा इस बार एक गैर-राजनीतिक मंच पेंड्रा जिला बनाओ अभियान ने आंदोलन को कामयाब बनाने का बीड़ा उठाया है। इसी कड़ी में आज बिलासपुर कलेक्टर से लिखित मांग लेकर सैकड़ों की तादात में लोग बिलासपुर जिला मुख्यालय पहुंचे।

                                           ग्रामीणों ने पहले शहर के मुख्य मार्गों में रैली निकाली और फिर कलेक्टर को अपना लिखित मांग को सौंपा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका यह आंदोलन फिलहाल सांकेतिक तौर पर है। यदि आनेवाले दिनों में इस पर विचार नहीं किया गया तो यह आंदोलन विशाल स्वरूप लेगा। प्रदर्शन कारियों ने बताया कि ठोस निर्णय नहीं आने पर ना केवल जनआंदोलन किया जाएगा बल्कि रेल जोन आंदोलन से भी बड़ा स्वरूप दिया जाएगा।

                             मालूम हो कि बिलासपुर जिला मुख्यालय से तकरीबन सवा सौ किमी की दूरी पर है। जानकार बताते हैं कि पेंड्रा को अविभाजित मध्यप्रदेश के समय ही पेन्ड्रा को जिला बनाने का सबसे उपयुक्त माना था। इस तात्कालीन सरकार ने राजपत्र में भी प्रकाशित किया था। लेकिन राजनीतिक दांव-पेंच और वयक्तिगत टकराव का पेंड्रा शिकार हो गया। जिसका नतीजा है कि आज पेन्ड्रा को जिला का दर्जा हासिल नहीं हुआ।  बिलासपुर से काफी दूरी और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यहां कि  स्वास्थ्य,शिक्षा जैसे मूलभूत व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। आए दिन पेन्ड्रा की लापरवाही और व्यवस्था अखबारों की सुर्खियां बनती है। लोगों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।

चूंकि पेन्ड्रा आदिवासी बहुल क्षेत्र है ज्यादातर गरीब लोग निवास करते हैं। उनके पास इतना भी साधन नहीं हैं कि महंगा न्याय पाने के लिए बिलासपुर पहुंच सकें। कलेक्टर घेराव करने पहुंचे आंदोलनकारियों ने बताया कि इस बार हम सरकार से न्याय लेकर ही रहेंगे। इसके लिए उन्हें चाहे कितनी भी लड़ाई ना लड़ना पड़े।

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