आईएएस है तो , सिखाने की जरूरत क्यों……?

shivnathरामानुजगंज  (शिवनाथ केशरवानी) । पिछले दिनों प्रदेश के वनांचल जिला बलरामपुर-रामानुजगँज में पदस्थ प्रशिक्षु आईएएस , जो डाक्टर भी हैं, उनकी ऐसी शर्मनाक हरकत वायरल हुई , जो पूरे आईएएस के साथ ही वर्तमान भारतूीय शिक्षा प्रणआली पर भी सवाल खड़ा कर रही है। ऐसे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से समाज क्या अपेक्षा कर पाएगा। पढ़े-लिखे   और उच्च ओहदे पर पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी ही जब ऐसा अमर्यादित आचरण करेंगे, तो इनसे हमारी नई पीढ़ी क्या शिक्षा ले पाएगी।. सभ्य समाज में इस ओछे आचरण का कोई स्थान नहीं हो सकता। और यह आचरण करने वाला आईएएस हो तो यह अक्षम्य ही माना जा सकता है। इतनी सी मर्यादा तो प्रायमरी स्कूल का बच्चा भी या यू कहें कि सुदूर गाँव का एक अनपढ़ व्यक्ति भी जानता ही है। फिर तो यह शर्मशार करने वाली घटना एक आईएएस का दम्भ मात्र ही है।

यह वाक्या रामानुजगँज स्वास्थ केन्द्र का है, जहाँ एसडीएम डा. जगदीश सोमकर कुपोषित बच्चों के वार्ड का निरीक्षण करने गए थे । एक माँ से उसके कुपोषित बच्चे का हाल-चाल जानने का इनका तरीका ही शर्मशार करने वाला है। जिस अँदाज में जूता पहने हुए वे महिला और कुपोषित बच्चे के बेड पर पैर रखकर बातें कर रहहे हैंष उनकी यह अमर्यादित हरकत , अशिष्ट व्यवहार ढेर सारे प्रश्नों को जन्म दो रहा है। हॉस्पिटल में मरीज से मिलने की मर्यादा तो निपट ्अपढ़ -असाक्षर व्यक्ति भी जानता ही है। फिर एसडीएम के साथ-साथ डॉक्टरी की भी पढाई उन्होने कर रखी है। फिर उन्हे इतनी सी मर्यादा का ध्यान कैसे नहीं रहा। क्या इतनी उच्च सिक्षा के पश्चात भी बुनियादी शिष्टाचार और नैतिक शिक्षा का अभाव होना चिंता का विषय नहीं है।

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अफसर के इस आचरण से निश्चित तौर पर लगभग पूरे आईएएस अफसरों की लॉबी भी खिन्न हुई है और ऐसा होना भी चाहिए । क्योंकि उच्च शिक्षित , उच्च प्रशासनिक अधिकारियों पर समाज और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे अमर्यादित अधिकारियों से समाज क्या अपेक्षा कर पाएगा। ऐसी हरकत एक निरक्षर कर भी देता तो क्षम्य था किन्तु एक डॉक्टर-आईएएस के लिए यह हरकत अक्षम्य है। श्री सोनकर की हरकत से यह उक्ति याद आती है कि-पोथी पढ़-पढ़ झग मुआ , पण्डित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का ( संस्कार का, नैतिकता का) पढ़े सो पण्डित होय।।

श्री सोनकर की उक्त हरकत पर हमारे प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह पत्रकारों के सवाल पर बोले कि नए आईएएस हैं , इन्हे सिखाने की जरूरत है……। तो यहाँ यक्ष प्रश्न यह उठता है कि क्या डॉक्टर-आईएएस हो जाने तथा मसूरी अकादमी से ट्रेनिंग लेने के बाद भी इतनी बुनियादी नैतिकता और शिष्टाचार की शिक्षा देनी होगी। तब तो यह देश और प्रदेश के लिए घोर चिंता का विषय है। मुख्यमंत्री महोदय को ऐसा लगता है कि ऐसे ओहदेदारों को भी इतनी छोटी सी शिक्षा देना बाकी रह गया है। तो यह बात वर्तमान शिक्षा प्रणाली के साथ ही आईएएस जैसे प्रशासनिक पद पर चयनित कैंडिडेट के प्रशिक्षण पर भी सवालिया निशान लगाता है। आईएएस अकादमी में प्रशिक्षण लेने के बाद भी इन्हे इतनी सी नैतिकता और मर्यादा के प्रशिक्षण के लिए मुख्यमंत्री महोदय को अवश्य सोचना चाहिए । डॉ. जगदीश सोनकर जैसे अधिकारियों को तो निश्चिचत ही नैतिकता और मर्यादा का ककहरा सिखाने की आवस्यकता है।

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