आटो चालकों ने कानून व्यवस्था को किया तार तार..डीएसपी को अधमरा होने तक पीटा…1 दिन बाद पकड़ाए पांचों गुंडे

बिलासपुर—- एक दिन पहले डीएसपी से मारपीट करने के आरोप मे सोमार को बिलासपुर पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है। सभी आरोपी आटो चलाने का काम करते हैं।
                        बताते चलें कि एक दिन पहले ऑटो चालकों ने हथियार से लैस होकर प्रशिक्षु डीएसपी को गांंधी चौक में अधमरा होते तक पीटा। इसके बाद आटो चालक आरोपी प्रशिक्षु डीएसपी को अधमरा स्थित में छोड़कर मौके से फरार हो गए। बेहोश डीेएसपी को डायल 112 पुलिस रक्षा टीम के सहयोग से सिम्स में भर्ती कराया गया। आटोचालकों की गुंडागर्दी और घटना की जानकारी मिलने के बाद बिलासपुर पुलिस प्रशासन हतप्रभ हो गया। घटना से शहर भी आश्चर्य में डूब गया।
                जानकारी हो कि कोरबा जिले के उरगा थाने में पदस्थ 2017 बैच के प्रशिक्षु डीएसपी भूपत धनेश्री रविवार रात अमरकंटक एक्सप्रेस में दुर्ग से बिलासपुर अपने दोस्त और बहन लता धनश्री को लेकर बिलासपुर आए। रात 9:30 बजे स्टेशन से गांधी चौक तक ऑटो में जाने को लेकर ऑटो चालक ने बदसलूकी की। ऑटो में क्षमता से अधिक सवारी बैठाने को लेकर ऑटो चालक ने डीएसपी के साथ दुर्व्यवहार किया।
अधमरा होने तक पीटा
               आटो में सवार डीएसपी भूपत धनेश्री ने जब विरोध किया तो ऑटो चालक ने कालर पकड कर गाली-गलौच करना शुरू कर दिया। गांधी चौक में अपने अन्य साथियों को हथियार के साथ बुला लिया। गांधी चौक में जैसे ही डीएसपी ऑटो से उतरे…4-5 आटो चालक गुंडों ने डीएसपी को घेरकर पीटना शुरू कर दिया। देखते ही देखते सभी ने मिलकर हिटिंग पंच से जमकर फाइटिंग की।
                   मारपीट के दौरान डीएसपी के सिर में गंभीर चोंटे पहुंची। शरीर से खून का फ़ौव्वारा निकलने लगा। डीएसपी के दोस्त और बहन ने बीच बचाव किया। बावजूद इसके ऑटो चालक डीएसपी को पीटते रहे।
                 दूसरे दिन घटना की जानकारी के बाद मामला दर्ज कर आटो चालक गुंडों की तलाशी शुरू हुई। पुलिस ने अपनी गिरती साख को बचाने जमीन आसमान एक कर दिया। सोमवार को दोपहर तक एक नाबालिग समेत मारपीट करने वाले पांच आरोपियों को धर दबोचा।
गुंडों की सूची में एक नाबालिग भी
                 एडिश्नल एसपी ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि पकड़े गए पांचो आरोपी आटो चलाने का काम करते हैं। आरोपियों के नाम अल्ताफ खान पिता नजरी खान उम्र 19 साल निवासी जूना बिलासपुर, राजू खाना पिता इस्लाम खान उम्र 31 साल चुचुहिया पारा का रहने वाला है। इसके अलावा पकड़े गए तीनों आरोपियो का नाम मोहम्मद शमीम पिता मोहम्मद ईरू उम्र 20 साल निवासी तारबाहर, आकाश श्रीवास पिता दुखी राम श्रीवास उम्र 19 साल कतिया का रहने वाला है। इसके अलावा एक नाबालिग को भी पकड़ा गया है। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 294,506,323,307 और 34 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
आटो चालकों के हौसले बुलंद
                      बताते चलें कि बिलासपुर में आटो चालकों की दबंगई की यह पहला मामला नहीं है। करीब साल भर पहले रायगढ़ जिले के एसडीएम को रेलवे स्टेशन में आटो चालकों ने दौड़ाकर पीटा था। इस घटना के बहुत पहले भारतीय सैनिक को आटो चालकों ने पीट पीटकर लहुलुहान कर दिया था। समझने वाली बात है कि आखिर बिलासपुर के आटो चालकों के हौसले इतना बुलंद कैसे हैं। किसी को भी सरेआम पीट दे…और पुलिस ताकती रह जाए।
               दरअसल आटो चालकों की दबंगई और पैदा होते अपराध के लिए केवल और केवल पुलिस ही जिम्मेदार है। इसमें आरपीएफ और तोरवा समेत तारबाहर पुलिस की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। सबको मालूम है कि आरपीएफ, तोरवा और तारंबाहर पुलिस के संबध आटो चालकों से बहुत मधुर हैं। संबध इतना मधुर है कि चोरी मारपीट जैसे अपराध के लिए उनकी धरपकड़ तो दूर…संगठन में पुलिस को हाथ डालने में भी सौ बार सोचना पड़ता है। कई पुलिस वालों के तो आटोचालकों से लेन देन का रिश्ता भी चलता है। इस बात का खुलासा कई बार हो चुका है। यही कारण है कि आटो चालक अपराध करने से बाज नहीं आते हैं। अपराध के बाद पुलिस से साठगांठ कर मामले को रफा दफा कर लेते हैं। यदि डीएसपी मामले में ऐसा कुछ हो तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

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