आवेदन लेने से कलेक्टर का इंकार…टूटकर बोली..ठुकरा दूंगी दुनिया…

IMG20170220163054बिलासपुर—चार साल से न्याय के लिए कलेक्टर कार्यालय का चक्कर काट रही वेबा महिला के आवेदन को कलेक्टर ने लेने से इंकार कर दिया। महिला को समझ में नहीं आ रहा है कि अब  मासूम चार साल की बच्ची को लेकर कहां जाए। घर में सास श्वसुर और देवर ननद ने जीना हराम कर दिया है। ससुराल वालों ने उसके माथे पर शिक्षक पति के मौत का टीका भी लगा दिया है। मास्टर पति की जगह नौकरी के लिए अधिकारियों के दरवाजे पर नाक रगड़कर हार चुकी है। लेकिन उसकी फरियाद को कोई नहीं सुन रहा है। कलेक्टर के जनदर्शन कार्यक्रम से निकलने के बाद मासूम बच्ची को गोद में भरकर एक पीड़ित महिला कभी शून्य में तो कभी बच्ची का मुंह देखकर कुछ यही बड़बड़ा रही थी।

                          कलेक्टर दर्शन के बाद आंख मेंं आसू लेकर मंथन से बाहर निकली महिला का धैर्य टूट गया। परिसर के एक कोने में कभी वह खुद से बात करती तो कभी बच्ची का मुंह को देखकर रोने लगती। आसूं को छिपाने आसमान को ताकने लगती। बहुत कुरेदने पर विमला माथुर ने बताया कि आज मैं दोनो जहान से चली गयी। पहले पति और परिवार को खोया…अब नौकरी भी नहीं मिलेगी।

                   विमला माथुर ने बताया कि जांजगीर जिले के बलौदा की रहने वाली है। पति का नाम जयकुमार माथुर है। साल 2013 में उनकी मौत हो गयी। पति जब तक जिंदा थे..किसी चीज की कमी महसूस नहीं हुई। उन्होंने मुझे बहुत नाज से रखा। एक दिन दोनों की बीच प्यारी गुड़िया भी आ गयी। सास श्वसुर का भी इस दौरान भरपूर प्यार मिला। लेकिन एक दिन भगवान ने मेरी झोली से खुशियों को छीन लिया। जय कुमार की अचानक मौत हो गयी। जय कुमार शासकीय प्राथमिक पाठशाला कठमुण्डामाल तखतपुर ब्लाक मे पंचायत शिक्षक थे।IMG20170220163620

                        पति के खत्म होते ही सास श्वसुर देवर और ननद ने परेशान करना शुरू कर दिया। मुझ पर अत्याचार शुरू कर दिया। घर से निकाल दिया। अब कहते हैं कि उसने पति को मारा दिया है। किसी तरह बच्ची को चार साल तक पाला। लेकिन अब घर चलाना मुश्किल हो गया है। विमला ने बताया कि पति के मरने के बाद 2016 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दी थी। टोकन भी मिला। लेकिन आवेदन का निराकरण आज तक नहीं हुआ। एक बार फिर कलेक्टर के जनदर्शन में गुहार लगाई लेकिन  साहब ने आवेदन लेने से इंकार कर दिया।

                                  विमला ने जिला पंचायत का एक पत्र दिखाया। विमला ने बताया कि पत्र और अनुकम्पा नियुक्त आवेदन लेकर कलेक्टर साहब से मिली तो उन्होने आवेदन लेने से ना केवल इंकार कर दिया बल्कि नौकरी नहीं मिलने का फरमान भी दे दिया। समझ में नहीं आ रहा है कि अब मैं कहां जांऊ। बेटी के भरण पोषण का सहारा नहीं मिला तो वह बच्ची के साथ कहीं डूब मरेगी।

हायर सेकेन्डरी के साथ डीएड जरूरी

विमला ने जिला पंचायत का पत्र दिखाया।पत्र में 24 अप्रैल 2016 के अनुसार पंचायत वर्ग शिक्षक के सेवा के दौरान मौत होने पर परिजन की अनुकम्पा नियुक्ति पंचायत सचिव पद पर होगी।अनुकम्पा के दावेदार को हायर सेकन्डरी पास के साथ डीएड और टेट परीक्षा सर्टिफिकेट का होना जरूरी है। चूंकि विमला के पास केवल हायर सेकेन्डरी का प्रमाण पत्र है। इसलिए शासन के नियमानुसार वह अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पात्रता नहीं रखती ।

अब मंत्री जी का सहारा…दुनिया ठुकरा देगी

                              विमला ने बताया कि अनुकम्पा नियुक्ति के इंतजार में चार साल तक इंतजार किया। बच्ची चार साल की हो गयी है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से बच्ची को अभी तक स्कूल भी नहीं भेजा। सोची थी कि यदि नौकरी मिल जाती है तो बच्ची को स्कूल में एडमिशन कराएगी। पढ़ा लिखाकर अच्छा इंसान बनाउंगी। पति का भी यही सपना था।

           विमला ने कहा कि अब कलेक्टर और जिला पंचायत से तो उम्मीद टूट चुकी है। मेरे पास केवल एक ही उम्मीद है…मंत्री अमर अग्रवाल । कहते हैं उनके दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। बच्ची के सिर पर हाथ फेरते हुए लम्बी सांस लेकर विमला ने कहा यदि मंत्री जी ने  ठुकराया तो मैं दुनिया को ठुकरा दूंगी।

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