इंजीनियरिंग की तुलना में एग्रीकल्चर पर रुझान बढ़ा-सीएम

2935-2ccरायपुर।राज्यपाल बलरामजी दास टंडन ने सोमवार को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आठवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। समारोह में मुख्य अतिथि केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने दीक्षांत भाषण दिया। अति विशिष्ट अतिथि की आसंदी से मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने और विशेष अतिथि की आसंदी से प्रदेश के कृषि और जैव प्रौद्योगिकी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने भी समारोह को सम्बोधित किया।राज्यपाल बलरामजी दास टंडन ने खेती-किसानी की शिक्षा के लिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पाठयक्रम तैयार करने और सभी कृषि महाविद्यालयों में इसे आवश्यक रूप से लागू करने का सुझाव दिया है।

                                   राज्यपाल टंडन ने जैविक खेती की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि हमें कृषि विकास का एक ऐसा रोड मेप तैयार करना चाहिए, जिसमें बायोफर्मिंग (जैविक कृषि) का उपयोग हो और प्रति इकाई लागत में ज्यादा से ज्यादा से मुनाफा प्राप्त हो सके। इसमें रसायनों का कम से कम उपयोग हो और उसके स्थान पर बायोपेस्टिसाईड तथा जैविक खादों का उपयोग किया जाए।

                                  राज्यपाल ने कहा कि खेती के विश्व व्यापी बाजार के कारण कृषि और किसानों को एक नयी तरह की प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके परिणाम स्वरूप हमारे किसानों के लिए बाजार को समझना बहुत जरूरी हो गया है। बाजार की मांग की अनुसार उत्पाद तैयार करना पड़ेगा और नये अवसरों और संभावनाओं को टटोलना होगा।राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में सूचना टेक्नालॉजी के इस्तेमाल की जरूरत पर भी बल दिया।

                                      मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने दीक्षांत समारोह को सम्बोेधित करते हुए कहा कियहां से डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी आज एक नये जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने खेती-किसानी की शिक्षा के प्रति छत्तीसगढ़ के युवाओं में बढ़ रहे रूझान का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह एक सुखद संकेत है।

                                        आज जबकि पूरी दुनिया व्हाईट कॉलर जॉब (सफेदपोश नौकरियों) की तरफ दौड़ रही है, तब हमारे युवाओं ने कृषि शिक्षा और खेत-खलिहानों की राह पकड़ी। आपने खेती को चुना।  उन्होंने इसके लिए विद्यार्थियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने इन छात्र-छात्राओं से कहा कि देश के कृषि उत्पादन को बढ़ाने का आपने संकल्प लिया है। इसके लिए मैं आपको बधाई देना चाहता हूं। उन्होंने कहा – आज इंजीनियरिंग की सीटें खाली रह जा रही है, जबकि कृषि महाविद्यालयों में न सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ी है, बल्कि प्रत्येक दस में से एक छात्र कृषि शिक्षा के लिए आगे आ रहा है। 

                                 डॉ. सिंह ने कहा कि एक समय ऐसा भी आया जब देश में कृषि के क्षेत्र में ठहराओ आ गया था, लेकिन नये अनुसंधानों से कृषि उत्पादन में वृद्धि होने लगी है, जिसे कायम रखना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.एच.रिछारिया को याद करते हुए कहा कि उन्होंने धान के 23 हजार से ज्यादा जर्मप्लाज्म को संजोने का अनोखा कार्य किया था।

                                मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में बीजापुर से दंतेवाड़ा और बलरामपुर तक पूरे राज्य में खेती की तस्वीर बदल रही है। जैविक खेती के लिए दंतेवाड़ा जिले में ‘मोचोबाड़ी’ का एक अनोखा प्रयोग हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा छत्तीसगढ़ में कृषि शिक्षा के विकास के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

                             राज्य गठन के समय वर्ष 2000 में जहां कृषि, पशुपालन और डेयरी टेक्नॉलाजी के लिए सिर्फ एक-एक कॉलेज थे, वहीं वर्तमान में बारह सरकारी कृषि महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं, साथ ही दो-दो कृषि अभियांत्रिकी और उद्यानिकी कॉलेज भी खुल चुके हैं। इसके अलावा निजी संस्थाओं द्वारा 15 कृषि महाविद्यालयों का भी संचालन किया जा रहा है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता सिर्फ 10 वर्ष के भीतर 23 प्रतिशत से बढ़कर 34 प्रतिशत हो गई है। 

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