इंतज़ार.. तब तक सिर्फ मलाल !

new_gb_spp(सत्यप्रकाश पाण्डेय)“उसे मालूम है कि शब्दों के पीछे,कितने चेहरे नंगे हो चुके हैं,और हत्या अब लोगों की रुचि नहीं –आदत बन चुकी है, वह किसी गँवार आदमी की ऊब से—पैदा हुई थी और एक पढ़े-लिखे आदमी के साथ—शहर में चली गयी”—-गौरांग मर्डर मिस्ट्री पुलिस ने सुलझा ली है।पुलिस की कहानी पर गौरांग के परिजन और शहर के कुछ जागते लोगों को यक़ीन नहीं है।गौरांग के परिजन और शहर के जिन जागरूक लोगों का जिक्र कर रहा हूँ वो इस मामले में न्याय चाहते हैं हालांकि पुलिस की कहानी के मुताबिक़ गौरांग की मौत गैर इरादतन ह्त्या  है।पुलिस ने गैर इरादतन के कारणों का खुलासा नहीं किया है।चार रईसजादे मामले में आरोपी बनाकर ख़ास इंतज़ामात के बीच कल जेल भेज दिए गए।इस सनसनीखेज मामले का पटाक्षेप करते वक्त जिले के पुलिस कप्तान ने बिलासगुड़ी में प्रेस कांफ्रेंस बुलाई जहां पत्रकारों के अलावा सैकड़ों की संख्या में जिज्ञासु तमाशबीन मौजूद रहे । पुलिस की कहानी ज़िंदा होने का सबूत दे रहे लोगों के गले नहीं उतर रही और मैं पुलिस की लीपापोती को सालों से देखता चला आ रहा हूँ । सच अब भी गौरांग की मौत के साथ दफ़न है । कोशिश करना है इस मौत का सच और वजह दोनों सामने आये साथ ही क़ानून के कुछ पैरोकारों की घिनौनी सूरत । ताकि लोग भी देखें रसूखीयत की चौखट पर कानून के विवेचक कितने बौने और बेईमान हैं ।

                                  मैं इस बात से खुश हूँ कि जिस शहर का वाशिंदा हूँ वहां अब भी कुछ लोग ज़िंदा हैं । कभी-कभी भ्रम होता था मुर्दों के शहर में मैं रोज सुबह घर से निकलकर कमाने-खाने बाहर शहर को चला जाता हूँ, रात होते ही फिर अपने घरौंदें में । क्या हूँ, किसके साथ हूँ और किस काम को करता हूँ ? इससे ज्यादा की ख़बर नहीं थी मुझे । स्मार्ट होते शहर बिलासपुर में पिछले गुरूवार (20/21 जुलाई की दरम्यानी रात) को अय्याशी के एक अड्डे (रामा मेग्नैटो मॉल के टीडीएस बार) में गौरांग बोबड़े नाम के एक युवक की खून से सनी लाश संदिग्ध परिस्थितियों में पाई गई । मामला मॉल की दहलीज से निकलकर पुलिस की चौखट पर पहुँचा । मौक़ा मुआयना और मरने वाले की ख़बर घर तक पहुंचाकर पुलिस ने विवेचना की शुरुआत की । इस बीच ख़बर संस्कारधानी से निकलकर राजधानी रायपुर होते हुए देश की राजधानी दिल्ली तक पहुँच गई । मीडिया के शोर शराबे और पीड़ित परिवार के रुदन पर कुछ लोग सामने आये । चूँकि मामला बड़े घर के बिगड़े नवाबों से जुड़ा था लिहाजा हल्ला मचना स्वाभाविक हो गया । दरअसल मृतक गौरांग बोबड़े का एक मित्र केलिफोर्निया में रहता है जो पिछले दिनों बिलासपुर आया था । मित्र के विदेश से आने की ख़ुशी में कुछ देशी मित्रों ने पार्टी का इंतज़ाम किया। पार्टी शहर के मशहूर टीडीएस बार में रखी गई जहां शराब,शबाब और कबाब का भरपूर इंतज़ाम था । थिरकती बार बालाओं की अदाओं के बीच जाम पे जाम छलकते गए । नशे की खुमारी सर चढ़ती गई और वक्त पहर पे पहर बदलता गया ।

                                    रात को शुरू हुई महफ़िल का दौर तड़के ढाई बजे तक चलता रहा, इस बीच आखिर क्या हुआ ? क्यों हुआ ? किसने किया ? कई सवाल…सुबह सिर्फ ख़बर मातम की बाहर आई । विदेशी मेहमान और गौरांग के दोस्त की खातिरदारी में टीडीएस बार सुबह ढाई बजे तक खुला रहा, बाउंसर और सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर मौजूद रहे । हालांकि ये पहला मौक़ा नहीं था जब भोर तलक टीडीएस बार की रौशनाई में जामें दौर छलकता रहा । ये वो अड्डा है जहां रात के अँधेरे में शहर के कुछ सफेदपोश और उनकी संताने पैसों की गर्मी में तपते तपते इस कदर नंगी होती हैं कि देखने वाले को यक़ीन भी नहीं होता ये ज़नाब कौन है ? शायद उस रात भी कुछ ऐसा ही हुआ । लेकिन ऐसा क्या हुआ की विदेश से आये दोस्त के साथ पहुंचे देशी दोस्त आज गैर इरादतन ह्त्या के आरोपी बना दिए गए ? क्यूँ गौरांग ही मारा गया ? क्या दोस्तों के बीच किसी तरह का विवाद हुआ, कोई पुरानी रंजिश थी ? आख़िर क्यों मारा गया या हादसे में मर गया गौरांग ? कई सुलगते सवाल है जो पहले भी उठाये जा चुके हैं । मौकाए-वारदात का मुआयना करने के बाद पुलिस ने भी माना था मामला हत्या का हो सकता है फिर विवेचना में गैर इरादतन हत्या का खुलासा क्यों ? आम चर्चा में इस मौत को हत्या ही माना गया, जनशोर की माने तो हत्या बार के बाउंसरों ने की जिसमें कुछ दोस्तों का हाथ है । मगर पुलिस कप्तान के खुलासे ने सारी संभावनाओं और आशंकाओं को ही ख़त्म कर दिया । पुलिस की लंबी विवेचना और संदेहियों से पूछताछ के बीच उन कयासों पर भी निराशा ही हाथ लगी जिसमें डाक्टरों ने जिक्र किया था लाश पर चोट के निशान और फटा हुआ लिवर सामान्य रूप से सीढ़ी से गिराने-गिरने से संभव नहीं।

                                  अब गौरांग के परिवार को न्याय चाहिए । गौरांग की बहन ने पुलिस की विवेचना और उसके तरीके पर पहले ही शक जाहिर कर दिया था वो अपने भाई को न्याय दिलाने के लिए आखरी सांस तक लड़ने का ऐलान कर चुकी है । न्याय के मंदिर पर पूरा भरोसा है, अब उसे साथ के लिए सिर्फ उन लोगों की जरूरत है जो ज़िंदा होने की बात कहते हैं । ये लड़ाई एक बेटे,भाई को न्याय दिलाने के लिए शुरू की गई है जिसमें काफी लोग एकजुट हैं । इधर इस मामले में पुलिस की कार्रवाही पर हर जुबां पर सैकड़ों सवाल हैं मगर जवाब देने कोई तैयार नहीं । गौरांग की मौत और उससे जुड़े सभी सवालों को लेकर काफी दबाव पुलिस पर भी रहा । हत्या या हादसा ? पुलिस किसे पकड़ती, किसे छोड़ती। सारे नवाब रुपयों की गर्मी के बीच पलकर बड़े हुए । मालूम था करतूत के अंजाम का खर्च । उन्हें शायद पता थी सबकी कीमत तभी तो पुलिस की एफआईआर के मुताबिक़ गैर इरादतन हत्या के आरोपी जेल भेजे जाने तक पुलिस की ख़ास व्यवस्था के बीच रहे । घर का लज़ीज़ खाना, नाश्ता-चाय सब कुछ स्वादानुसार दिया जाता रहा । अब आरोपियों के परिजन जेल की चाहर दिवारी के इर्द-गिर्द मज़मा लगाये खड़े हैं । दरअसल रसूखदारों को इस सिस्टम की सभी खामियों और कमियों की ख़बर होती है।

                                हर दरवाजे के पीछे बैठे सरकारी साहब की कीमत देने वाले जानते हैं मुसीबत की फांस कहाँ से निकालनी हैं। यक़ीनन इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ, बाज़ार में हल्ला है गौरांग की मौत से कई लोगों के दिन बहुर गए । करोड़ों का वारा-न्यारा हुआ । मरने वाला घर का इकलौता चिराग था, जो भीतर गए उनमें से भी कुछ घर की इकलौती शान हैं । व्यापारियों की जिन संतानों को पुलिस ने गैर इरादतन ह्त्या के मामले में जेल भेजा है उनके भविष्य की डायरी भी पुलिस को ही कोर्ट में पेश करनी है । मौत के इस मामले में जांच शुरुआत से ही कमजोर दिखाई पड़ती हैं । कड़ी दर कड़ी देखें तो पुलिस ने आरोपियों को बचने, साक्ष्य मिटाने का पूरा मौक़ा दिया । मामले की नज़ाकत को भाँपने के बाद सक्रिय हुई पुलिस…। इस बात को दूसरे नजरिये से देखें तो ये भी कहा जा सकता है पुलिस अधिकांशतः मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाकर मामले का निपटारा कर देती है । यही वजह होती है 80 फीसदी से अधिक मामलों में आरोपी बाईज्जत छूट जाते हैं ।  गौरांग की मौत कई रहस्यों को साथ लेकर चली गई । मौत के मामले में पुलिस कप्तान का पिछले दिनों खुलासा भी किसी ड्रामें से कम नहीं था । सनसनीखेज मामलें में पुलिस ने करीब 40 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया कि गौरांग की मौत गैर इरादतन हत्या है जिसमें उसके 4 दोस्त शामिल हैं । इस खुलासे में पत्रकारों से ज्यादा आमजनमानस और तमाशाई नज़र आये । कई सवाल पूछे जाने थे लेकिन प्रेस कांफ्रेंस की आड़ में किया गया ड्रामा सिर्फ पुलिस कप्तान को बोलने का मौक़ा देता रहा । कुछ ने मुँह खोलकर जिज्ञासा मिटानी चाही लेकिन साहब के तेवर देख सवाल गले से बाहर नहीं आये।

                              एक गौरांग चला गया, कई गौरांग अब भी बाकी हैं जिन्हें समय रहते घर से सही नसीहत नहीं मिली तो घर का चिराग़ हमेशा के लिए अनंत आकाश में कहीं विलुप्त हो जायेगा।समय रहते कोशिश करनी होगी अब किसी के घर का गौरांग ना तो ऐसे दोस्त बनाये ना ही ऐसे अड्डों पर वक्त जाया करे जहां से घर लौटना संभव ना हो।वैसे ये नसीहत रसूखदारों के लिए नहीं है।अब इंतज़ार रहेगा सिर्फ न्याय मिलने की तारीख का….तब तक, शोर-शराबा और मलाल।

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  1. By प्राण चड्ढ़ा

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