ईंट का अवैध कारोबार,,,विभाग मौन..छुटभैये मालमाल

IMG_20160207_121649IMG_20160207_121304   बिलासपुर— सिर्फ अरपा नदी को ही बांझ नहीं किया जा रहा है। शिवनाथ नदी को भी एक दिन रेत चोर बांझ बना देंगे। बिलासपुर खनिज विभाग भी शायद ऐसा ही चाहता है। खांडेकर जैसे खनिज निरीक्षक मिट्टी चोर और ईट भठ्ठा माफियों से चंदा लेकर लौट आते हैं। इसके बाद बेखौफ ईट भठ्ठा व्यवसायी और रेत माफिया प्रशासन के नाक के नीचे अपने कर्मों को बेधड़क अंजाम देते हैं। शासन को करोड़ों का चूना लगाते हैं।

                                शिवनाथ नदी के तटवर्तीय इलाका पिछले कुछ सालोंं से ईट व्यवसायियों का स्वर्ग बन गया है। जोंधरा और उसके आसपास पिछले कई गांव अवैध ईट व्यवसाय का केन्द्र बन गया है। यहां एक खास मौसम में वर्षों से ईंट भट्ठा का अवैध कारोबार चल रहा है। कुछ लोग तो बाहर से आकर इस इलाके में बेखौफ होकर अपने मंसूबों को कामयाब कर रहे हैं। अवैध ईट भट्ठों का का्रोबार यहां जमकर फल फूल रहा है। मजेदार बात है कि इस बात की जानकारी कमोबेश खनिज विभाग के सभी अधिकारियों को है। जो कहते हैं कि उन्हें नहीं मालूम वह सरासर झूठ बोलते हैं।

                 कुछ शिकायत कर्ताओं ने सीजी वाल को बताया कि वे लोग हर साल खनिज विभाग से न केवल अवैध ईंट भठ्ठा व्यवसाय बल्कि रेत चोरों की कुण्डली भी देते हैं। लेकिन होता जाता कुछ नहीं है। दो एक खनिज अधिकारी निरीक्षण करने पहुचते हैं। लेकिन लिफापा लेकर लौट जाते हैं। कमजोर और छोटे एक दो ईट भट्ठा व्यवसासियों पर चालानी कार्रवाई कर अपना कर्तव्य पूरा कर लेते हैं। इसके बाद सभी लोग बेखौफ होकर अवैध कारोबार को सींंचते और पोषते हैं। ऐसा करने में खनिज विभाग के आलाधिकारियों का भी सहयोग रहता है।

                               IMG_20160207_115100     स्थानीय एक शिकायत कर्ता ने बताया कि समझ में नहीं आता है कि राजस्व और खनिज विभाग की कैसी कार्रवाई होती है कि व्यवसायी जब्त ईंट भट्ठों की खरीदी बिक्री भी कर लेता है। अवैध ईटों का लाट और पंजा भट्ठों पर चूना लगा का लगा रह जाता है। इससे जाहिर होता है कि खनिज और राजस्व विभाग के साथ ईंट व्यवसायियों के बीच चोली दामन का रिश्ता है।

               शिकायत कर्ता ने बताया कि बरसात के पहले जब्त ईंटों की उसके निर्माता बिक्री भी कर लेते हैं। इसके बाद दुबारा ईट निर्माण का मौसम आते ही सेटिंग और अवैध निर्माण का दौर शुरू हो जाता है। शिकायत कर्ता ने यह भी बताया कि खनिज अधिकारी भी क्या करें.। मौके पर जाने के वजाय एक जगह गाड़ी खडा़ कर व्यवसायियों को बुला लेते हैं। फर्जीवाड़े का हिसाब किताब कर लौट जाते हैं।

                      जोंधरा के एक किसान ने बताया कि बस्ती के बाहर लवन मार्ग पर नदी के किनारे ईंट भट्ठों की लम्बी श्रृंखला है। खनिज अधिकारी और राजस्व अधिकारियों को इतनी फुरसत नहीं है कि वे इसका निरीक्षण करें। यद्यपि यह सबकों दिखाई देता है..लेकिन अधिकारियों को दिखकर भी नहीं दिखता है। यदि वे देखना चाहें तो सब सच्चाई सामने आ जाएगी।

            मालूम हो कि पिछले साल खनिज और राजस्व विभाग की कार्रवाई में क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य सपड़ा गए थे। बाद में रसूख और रूपए के दम पर मामले को रफा दफा कर लिया गया था।

               सीजी वाल संवाददाता ने बताया कि मस्तूरी क्षेत्र में ईटवा पाली से अरपा के किनारे चल कर शिवनाथ नदी का संगम तक ईंटभट्ठों का जाल बिछा हुआ है। इसकी जानकारी सबको हैं। यहां तक कि बिलासपुर में बैठे खनिज विभाग को भी। IMG_20160207_121616

 संवददाता ने बताया कि नदी के किनारे किनारे आमगांव, हरदी, मनवा, कुकुर्दी, भिलौनी, जोंधरा, परसोड़ी, उदईबन समेत समेत कई गांवों में सैकड़ों ईटभट्ठा डंके की चोट पर चल रहे हैं। अवैध भट्ठों से निकलते काला और सफेद धुआं जनजीवन को बरबाद कर रहे हैं। जमीन बांझ हो रही है। शिवनाथ का पानी जहर हो रहा है। प्रदूषण की मार जनमानस के साथ ही जानवारों को भी आगोश में ले रहा है।

                सीजी वाल की टीम को जानकारी मिली है कि ईट भट्ठा व्यवसायियों और निर्माताओं से  कड़ी पूछताछ की जाए तो मालूम हो जाएगा कि  ईंट निर्माण में क्षेत्र के गैर लायसेंसी साहूकार 10 प्रतिशत रकम उधार लेकर ईटभट्ठा का कारोबार कर रहे हैं। मजेदार बात है कि अवैध कारोबार के इस खेल में स्थानीय जनप्रतिनीधियों का भी हाथ रंगा हुआ है।

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