मेरा बिलासपुर

उद्योगों के अनुरूप तैयार हों छात्र

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बिलासपुर । वर्तमान समय में कौशल आधारित शिक्षा का महत्व बढ़ता जा रहा है। बिना सूचना प्रौद्योगिकी के आगे नहीं बढ़ सकते। उसी के अनुरूप महाविद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। विद्यार्थियों को कौशल उन्नयन के साथ-साथ उन्हें संस्कारवान बनाएं। ये बातें सोमवार को  संभागीय कमिश्नर सोनमणि बोरा ने इंजीनियरिंग महाविद्यालय में 13 से 17 जुलाई तक आयोजित ’’एडवान्स पेडागोजिकल (शैक्षणिक) एवं कम्प्यूटर स्कील डेवलपमेन्ट एण्ड आफिस मैनेजमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम में कहीं।
संभागायुक्त ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को समय के साथ अपडेट होना आवश्यक है। जिससे कि छात्र-छात्राओं को समय के अनुकूल शिक्षा प्रदान कर सकें। आज सूचना प्रोद्योगिकी (ई-गर्वनेस) युग है। युवा पीढ़ी को अधिक रोजगार परक, औद्योगिक संरचना के अनुकूल शिक्षा दें। ऐसे प्रशिक्षण हमेशा होते रहना चाहिए। इससे इंजीनियरिंग महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं आफिस मैनेजमेन्ट की उपयोगिता बढ़ेगी। उन्होने प्रशिक्षाणार्थियों से कहा कि संकल्प लेकर प्रशिक्षण प्राप्त करें। इससे सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा। श्री बोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में तेजी से औद्योगिकीकरण हो रहा है। इसी के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करें। ताकि उन्हें रोजगार सुलभ हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि यहां रेशम उद्योग की भी अपार संभावनाएं हैं। इसे भी रोजगार एवं पर्यटन की दृष्टि से जोड़ सकते हैं। श्री बोरा ने कहा कि इसके लिए शिक्षक एवं उनके स्टाफ आवश्यक संसाधन के साथ तैयार रहें।
कार्यक्रम में इंजीनियरिंग महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. बी.एस.चावला ने स्वागत भाषण दिया। नोडल अधिकारी डाॅ. ए.के.गर्ग ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डाॅ. बशीर उल्ला शाईक, डाॅ. अतुल मिश्रा, डाॅ. परिवेश कस्तुरिया, डाॅ. एम.ए. रिजवी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर मारतन्डे प्रसाद तथा अभार प्रदर्शन प्रोफेसर एन.पी. सिंह ने किया।
टीईक्यूआईपी की  समीक्षा
शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय  में टेक्निकल एज्यूकेशन क्वालिटी इम्प्रूव्हमेंट प्रोग्राम (टीईक्यूआईपी) के संबंध में संभागायुक्त  सोनमणि बोरा ने प्राचार्य से विस्तृत चर्चाकर समीक्षा की। उक्त कार्यक्रम के तहत् शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय  को प्रथम किस्त के रूप में 2 करोड़ की राशि मिली है। संभागायुक्त को प्राचार्य ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत् नेशनल बोर्ड आॅफ एक्रीडेशन से महाविद्यालय का शीघ्र मूल्यांकन कराना है। ताकि आगे की कार्यवाही की जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में 7 पाठ्यक्रम महाविद्यालय में संचालित है। इनमें से 4 पाठ्यक्रमों की तैयारी जारी है। जिसे आगामी 6 माह के अंदर पूर्ण कर ली जायेगी। वल्र्ड बैंक से प्राप्त प्रथम किस्त की उक्त 2 करोड़ की राशि को आगामी 15 अगस्त तक व्यय करना है। वल्र्ड बैंक से कुल 10 करोड़ की राशि शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय को मिलेगी। संभागायुक्त ने इंजीनियरिंग महाविद्यालय परिसर को वाई-फाई के साथ ही आवश्यक संसाधन के साथ विकसित करने के लिए कहा है। इसके साथ ही महाविद्यालय परिसर को व्यवस्थित करने के भी सुझाव दिए।

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