एयरपोर्टः नाराज कोर्ट ने कहा..बार बार नहीं चलेगा कोरोना का बहाना..2 सप्ताह के भीतर पेश करें प्रोग्रेस रिपोर्ट

बिलासपुर— चकरभाठा एयरपोर्ट को लेकर दायर जनहित याचिका की पिछली सुनवाई के बाद दिए गए आदेश का पालन नहीं होने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर किया है। मामले में आज हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कोरोना का बहाना बार बार नहीं चलेगा। दो सप्ताह के अन्दर प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करें। बताते चलें कि पिछली सुनवाई में आदेश के बाद भी एअरपोर्ट को लेकर अब तकर जानकारी पेश नहीं होने पर हाईकोर्ट ने जानकारी की है।

         चकरभाठा एअरपोर्ट मामले को लेकर आज हाईकोर्ट प्रैक्टिसिंग बार की सुनवाई हुई। बार प्रैक्टिसिंग की तरफ से हाईकोर्ट को बताया गया कि 18 मार्च 2020 को हुई सुनवाई के बाद आज तक आदेश का पालन नहीं किया गया है। कोर्ट को मामले की जानकारी सुदीप श्रीवास्तव, संदीप दुबे और कमल दुबे की तरफ से आशीष श्रीवास्तव ने दी। आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि सिविल एविएशन और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से उच्च न्यायालय के आदेश का पालन अब तक नही किया गया है।

           मामले में न्यायालय ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि 6 महीने से कोविद 19 का बहाना नही चलेगा। 2 सप्ताह के भीतर  पिछले आर्डर के अनुसार केंद्र और डीजीसीए ,एयरपोर्ट अथॉरिटी. तकनीकी पहलुओं की जानकारी पेश करे। निर्माणाधीन चकरभाठा एअरपोर्ट का प्रोग्रेस रिपोर्ट भी रखे। 

            सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि एयरपोर्ट का निर्माण जिला प्रसाशन कर रहा है। निर्माण कार्य की गति बहुत धीमी है। पिछले आदेश में केंद्र के वकील गोपा कुमार ने कहा था कि जुलाई 2019 को सेंट्रल जोन की बैठक हुई थी। बैठक में प्रदेश के मुख्यसचिव ने डीजीसीए की बात को मानते हुए एयपोर्ट निर्माण कार्य एयरपोर्ट अथॉरिटी को देने को कहा था। इसके बाद राज्य सरकार ने कुछ भी नही किया। यदि एयरपोर्ट अथॉरिटी एयरपोर्ट का निर्माण करता है तो काम अच्छा होगा । ,क्योकि एअरपोर्ट निर्माण को लेकर राज्य एक्सपर्ट नही है।  स्पेशल डॉप्लर लाइट,  नाईट लैंडिंग के बाद एअरपोर्ट को 4 सी लाइसेंस मिल जाएगी।  

                  पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता की ने कहा कि 15 दिन में कार्य पूरा कर 3 सी  लाइसेंस के लिए आवेदन देंगे। तब केंद्र के वकील ने कहा कि 20 दिन में हम लाइसेंस दे देंगे। सुदीप श्रीवास्तव और संदीप दुबे अधिवक्ता ने बताया कि केंद्र जिस एयरस्ट्रिप पर टेकऑफ लैंडिंग की बात कर रही है ,उसे 1998 में अयोग्य घोषित कर दिया गया है। क्योंकि सीपत में एनटीपीसी प्लांट बनने और चिमनी की ऊँचाई 267 मीटर होने के कारण पुराने एयरस्ट्रिप पर फ्लाइट नही उतरना मुश्किल है। इस पर केंद्र के वकील ने कहा था कि इस बात की जानकारी मुझे नही है। न्यायालय ने आदेश दिया कि अगली बार सभी बातों को शपथ के साथ कोर्ट को बताए।  इस दौरान एयरपोर्ट और सिविल एविएशन के अधिकारी कोर्ट में उपस्थित रहेंगे।

      कोर्ट ने 18 अप्रैल को सुनवाई के लिए केस को रखा था। लेकिन कोरोना के कारण केस नही लग पाया।  आज सुनवाई के बाद डिवीज़न बेंच ने 2 सप्ताह में केस सुनवाई के लिए रखा है। सही जवाब नही आने पर न्यायालय मामले मे कड़ी कार्यवाही कर सकती है

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