कम हो गयी उम्र…बढ़ गयी हार्ट रोगियों की संख्या…डॉक्टरों ने कहा…दिल की सुनों…लेकिन समय से पहले पहुंचो

 बिलासपुर—दिल की सुनो दुनिया वालों……………….;सात दिवसीय मेगा जागरूकता अभियान का शुभारंभ अपोलो मं किया गया। आज कार्यक्रम को लेकर अपोलो अस्पताल में दिल के डॉक्टरों ने दिल से दिल की बात कही। साथ ही लोगों की चिंता दिल से की है। डॉक्टरों ने बताया कि अटैक की समस्या अब उम्र की मोहताज नहीं रही। अब तीस की उम्र में भी  हार्ट अटैक का आना सामान्य से बात हो गयी है। इसकी मुख्य वजह हमारी आदतें और असामान्य दिनचर्चा है।

                    दिल की सुनों दुनिया वालों..सात दिवसीय मेगा जागरूकता अभियान का आगाज किया गया। इसके पहले अपोलो की हार्ट विशेषज्ञों की टीम ने पत्रकारों से चर्चा की। डॉक्टरों ने बताया कि मौजूदा वक्त भारी तनाव का है। व्यक्ति आगे निकलने की होड़ में खुद को भूल गया है। व्यस्त जीवन शैली और खान-पान की खराब आदतों ने शरीर को रोगी बना दिया है। लोगों को कई बिमारियों ने जकड़ लिया है। इसमें एक बीमारी दिल की भी है। हार्ट अटैक अब उम्र की मोहताज नहीं रह गया है।

                             डॉक्टरों की टीम ने प्रेसवार्ता में बताया कि हार्ट अटैक की समस्या बहुत तेजी से बढ़ी है। मौजूदा दौर में 30 की उम्र के लोग भी हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं। हार्ट अटैक आने के कई कारण हैं। जाहिर सी बात है कि लोगों क अटैक की गंभीरता को समझते तो हैं..लेकिन निदान को लेकर बहुत देर से गंभीर होते हैं। यदि समय पर अटैक की स्थिति से बचने के लिए ठोस कदम उठाया जाए तो शायद व्यक्ति को अटैक से समय से पहले ही राहत मिल जाए।

           डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट अटैक ऐसी स्थिति है, जिसमें अधिकतर लोग लक्षणों को पहचाने में अक्षम होते हैं। लक्षणों की पहचान नहीं होेने बीमारी का शिकार हो जाते है। महज छोटी-छोटी आदतें अटैक जैसीगंभीर बीमारी को पैदा करता है। लेकिन ऐतिहात रखने पर इससे छुटकारा भी मिल सकता है।

               डॉक्टरों ने जानकारी दी कि 29 सितम्बर को वर्ल्ड हार्ट डे के रूप में मनाया जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हु अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर ने मेगा जागरूकता अभियान मनाने का फैसला किया है। दिल की सुनो दुनिया वालों कार्यक्रम का आज शुभारंभ किया गया है। पत्रवार्ता के पहले डॉक्टरों की टीम और अपोलो स्टाफ ने दिल के आकार के गुब्बारों को हवा में छोड़ कर जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

                           मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. सजल सेन ने बताया की पिछले कुछ सालों से अन्य रोगों की तुलना में हृदय रोगियों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। चिंता का विषय है कि देश में हृदय रोगियों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टरों ने दिल की रोगियों की संख्या में बृद्धि को सुनामी की तरह बताया । इससे निजात पाने में सामाजिक जागरूकता को  हथियार बनाना होगा।

           डॉ.सजल ने पत्रकारों को बताया कि अभियान 7 दिनो तक चलेगा। सात दिवसीय आयोजित कार्यक्रम के दौरान कैम्प में हार्ट चैकअप में विशेष छूट दी जाएगी। हेल्दी हार्ट एडवांस पैकेज,  एंजियोग्राफी और निःशुल्क डाईट काउन्सिलिंग की व्यवस्था होगी। कार्डियोंलॉजी से परामर्श, इसीजी, ब्लडशुगर, बीपी और  बीएमआई की जॉच लागत से भी कम कीमत पर होगी।

                               इस अवसर पर वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ आर एल भांजा ने धूम्रपान को हार्ट रोग को अत्यधिक घातक बताया। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और नियमित दिनचर्या को अपनाने पर जोर दिया। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ एम.पी. सामल ने छाती में बार-बार दर्द उठने वाले दर्द,  सांस लेने में परेशानी,जी मचलाना, अनियमित दिल की धडकन और सिर का चकराना, चक्कर आना को हार्ट रोग का लक्षण बताया। उन्होने कहा कि इन पांच लक्षणों का होने का मतलब  धमनियों में रूकावट होने का संकेत। डाईट पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हुए भांजा ने कहा… प्रीवेंशन बेटर दैन क्योर।

             वरिष्ठ हृदय रोग शल्य चिकित्सक डॉ. सजय जैन ने कहा कि भारी संख्या में लोग के दिल की बिमारियों से मर रहे हैं। इसकी दो मुख्य वजह है। पहला लोगों का खान-पान खराब हो गया है ज्यादातर लोग 20 से 30 साल के भीतर हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्राल बढ़ने और मोटापे जैसे रोगों के शिकार हो जाते हैं। सभी रोग हार्ट अटैक के खतरे को काफी बढा देते है। दूसरा कारण  लोगो को हार्ट अटैक के पूर्व संकेतो के बारे में पता नहीं होता है। इसलिए ऐसे लोग समय पर सावधानी नहीं बरततें।

                          हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ मोहंता,  डॉ सतपती ने बेड कोलेस्ट्रल और गुड कोलेस्ट्रॉल की जानकारी दी। बताया कि बेड कोलेस्ट्राट स्वास्थ्य के लिये खासकर दिल के लिए बहुत हानिकारक होता है। हृदय की धमनियों को ब्लॉक कर देता है। हार्ट अटैक की सम्भावनाओं का बढा देता है। हृदय रोग शल्य चिकित्सक डॉ अनुज कुमार ने तनाव से मुक्त होकर ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण रखने को कहा। नियमित रूप से वॉकिंग पर जोर दिया।नियमित दिनचर्या और डिप्रेशन से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सावधानियों को अपनाकर  हार्ट सर्जरी की स्थिति से बचा सकता है। यदि हार्ट की शल्य चिकित्सा किसी परिस्थिति में अनिवार्य हो तो अत्याधुनिक की होल पद्धति को अपनाया जा सकता है। इसकी सुविधा अपोलो हॉस्पिटल्स बिलासपुर में भी है। लेन्सेट से किए गये अध्ययन में पाया गया ह कि कि 90 के बाद पैदा हुये लोगों में हृदय रोग का खतरा ज्यादा है। आवश्यक है कि समय-समय पर अपनी जॉच करायें। अध्ययन में यह भी पाया गया है कि देश में लगभग 7 करोड़ हृदय रोंगी है। सभी रोगी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से फैले हुए  है।

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