कर्मचारी नहीं सेवक बनकर करें काम…

sambhagayukat shri bora dwara sambhag striya smikcha baithak avm karyashala (3)बिलासपुर—-राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत् आयुष चिकित्सा अधिकारियों की संभाग स्तरीय कार्यशाला और समीक्षा बैठक संभागायुक्त सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बोरा ने संभाग में चिरायु कार्यक्रम की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि कोई बच्चा स्वास्थ्य परीक्षण से न छूटे। संभाग के 47 हजार चिन्हांकित बच्चों को उच्च चिकित्सा मुहैय्या कराने के निर्देश भी दिये।

मंथन सभाकक्ष में आयोजित बैठक सह कार्यशाला में बोरा ने कहा कि शत प्रतिशत स्कूली छात्र-छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मेहनत और ईमानदारी से कार्य करना होगा। जिन स्कूलों में बच्चे छूट गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य परीक्षण में लेना होगा। मुंगेली, जांजगीर और बिलासपुर में स्कूली बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण की प्रगति संतोषजनक नहीं है। चिरायु की टीमों को कार्य में सुधार लाते हुए नवंबर तक शत प्रतिशत उपलब्धि हासिल करने कहा।

चिरायु टीमों को निर्देश देते हुए वोरा ने कहा कि समय पर स्कूलों और आंगनबाड़ी केन्द्रों के निरीक्षण के लिए पहुंचे। इसके पूर्व योजना का प्रचार-प्रसार भी करें। ताकि अधिक से अधिक बच्चों स्वास्थ्य परीक्षण का लाभ मिले। संयुक्त संचालक स्वास्थ्य ने बताया कि संभाग में 25 लाख विद्यार्थी हैं, जिनमें से 17 लाख 98 हजार बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण अब तक किया गया है। इन बच्चों में से 47 हजार 608 बच्चे विभिन्न बीमारियों से पीडि़त है। उन्हें उच्च स्तरीय चिकित्सा के लिए रिफर किया गया है। संभागायुक्त ने इन बच्चों के इलाज पर विशेष फोकस करने का निर्देश दिया।

स्वास्थ्य परीक्षण संवेदनशीलता से करें-कलेक्टर

बच्चे हमारे भविष्य हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में पूरे देश में स्कूल के हर बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। कोई बच्चा स्वास्थ्य परीक्षण से ना छूटे। कलेक्टर श्री अन्बलगन पी. ने संभागीय समीक्षा बैठक और कार्यशाला में उपस्थित लोगों से कही।

कलेक्टर ने कहा कि संभाग में जांजगीर-चांपा, रायगढ़ जैसे जिले कुष्ठ रोग के लिए देश स्तर पर चिन्हांकित है। ऐसे स्थिति में वहां के चिकित्सा अधिकारी कुष्ठ नियंत्रण के लिए आधुनिक जांच पद्धति से स्वास्थ्य परीक्षण करें। हमारा मकसद एक अच्छे भारत देश का निर्माण करना है। जहां हर बच्चा स्वस्थ्य हो। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य परीक्षण के साथ जागरूकता लाने की जरूरत है। हमारे स्वास्थ्य शिक्षा का उद्देश्य समाज में परिलक्षित होना चाहिए। चिकित्सा का क्षेत्र सेवा का क्षेत्र है यह हर किसी को उपलब्ध नहीं होता । इसे सिर्फ शासकीय सेवा की तरह ना लें।

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