कलेक्टर अलंग ने कहा…एनजीओ की तरह करें काम…योजना को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना अधिकारियों का काम

बिलासपुर—-नरवा, गरूवा, घुरूवा अौर बाड़ी विकास के लिये सभी अधिकारियों को एनजीओ की तरह काम करना होगा।  गांव वासियों से सम्पर्क करना होगा। उन्हें विश्वास में लेकर निचले स्तर तक योजना का प्रचार प्रसार करना होगा। यह बातें कलेक्टर डॉ.संजय अलंग ने मंथन सभागार में बैठक के दौरान अधिकारियों से कही। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को जिले में नरवा, गरूवा, घुरूवा अउ बाड़ी योजना को सफलतापूर्वक क्रियान्वयन  का सख्त निर्देश भी दिया।
                      मंथन सभागार में आयोजित बैठक के दौरान कलेक्टर ने कहा कि जिले के प्रत्येक विकासखण्ड में 15 प्रतिशत गांवों में गौठान बनाने का काम पहले चरण में किया जाएगा। जिले के 7 जनपद पंचायतों के 97 ग्राम पंचायतों में गोठान बनाये जाएंगे। जिन गांवों में काम कार्य शुरू नहीं हुआ है वहां तत्काल प्रारंभ किया जाय। मस्तूरी विकासखण्ड के लोहर्सी में आदर्श गौठान निर्माण करने और सभी ग्राम पंचायतों में बेहतर संरचना के साथ गोठान निर्माण किया जाए। गांव में गोठान प्रभारी बनाया जाया। जो गौठान के कार्यों का देखरेख करेगा। चारागाह विकास के लिये भी बजट बनाया जाए।
           बाड़ी विकास के लिए गांव में स्थानों का चयन किया जाए। जिले में 435 अक्षयबाड़ी बनाए जाएंगे। 85.26 लाख रूपये उद्यान विभाग और मनरेगा के तहत स्वीकृत किये गये हैं। बाड़ी निर्माण के काम में देरी होने पर कलेक्टर ने उद्यानिकी विभाग के अधिकारी पर नाराजगी जाहिर की। निर्देश दिया कि गांव वालों के साथ मिलकर चर्चा करें और सहयोग से बाड़ी के लिये जगह का चयन करें।
                                 कलेक्टर ने बताया कि  नरवा विकास के लिए जिले में 34 कार्यों को में 419.97 लाख रूपये की स्वीकृति हो चुकी है। योजना के तहत स्टाॅप डेम के ऊपर नाला सफाई, नाले के गाद निकालने का कार्य और मिट्टी का बैक निर्माण कार्य किया जाएगा। , जलाशय का गहरीकरण एवं सफाई, नहर मरम्मत एवं सफाई, नाले के तटबंधों का सुदृढ़ीकरण, व्यपवर्तन योजनाओं के नहर मरम्मत आदि कार्य किये जायेंगे। कलेक्टर ने कहा कार्यों में तेजी लायी जाए। संचालित कार्यों की विडियोग्राफी भी कराई जाये।
             कलेक्टर ने निर्देश दिया योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये सब डिवीजन स्तर पर अनुभागीय अधिकारी राजस्व की अध्यक्षता में समिति का गठन हो। दो दिन के भीतर समिति की बैठक करें। जिला स्तर पर भी कोर कमेटी का गठन हो। वन, कृषि, उद्यानिकी, सिचांई और ग्रामीण, आरईएस विभाग के अधिकारियों को  शामिल किया जाए।

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