मेरा बिलासपुर

कलेक्टर डॉ. मित्तर ने कहा..मालिकों को देंगे मुआवजा..पता करेंगे..किसके कहने पर गायों को जर्जर कमरे में लाया गया..मौके पर टीम…नहीं बचेंगे दोषी

बिलासपुर— (टेकचन्द कारड़ा)–कलेक्टर डॉ.सारांश मित्तर ने कहा कि मेड़पार में गायों की मौत के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा। य़ह जानते हुए भी कि गायों को छेककर घरों में रखा जाना है। बावजूद इसके बिना किसी सूचना और सरपंच ने मनमानी करते हुए गायों को जबरदस्ती घर से लाकर जर्जर भवन में रखा। यह अक्षम्य अपराध है। पता लगाया जा रहा है कि इस घटना के पीछे सरपंच के साथ सचिव की क्या भूमिका है। यदि दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई होगी। जबकि सचिव और सरपंच समेत सभी को मालूम है कि मे़ड़पार स्थित जर्जर भवन को गौठान बनाया ही नहीं जा सकता है। और ना ही बनाने का आदेश ही दिया गया है।  बावजूद इसके घरों से जबरदस्ती गायों को एक दिन पहले लाकर जर्जर भवन में रखा गया। हम पता लगा लेंगे कि इसके लिए जमीनी स्तर पर जिम्मेदार कौन है।

                    कलेक्टर सारांश मित्तर ने बताया कि मामले में रोका छेका का कोई सवाल ही नहीं है। क्योंकि जर्जर भवन में रखी गयी सभी गायों को एक दिन पहले ही एकत्रित कर लाया गया है। जबकि कल से पहले तक जर्जर भवन का उपयोग भी नहीं था। जाहिर सी बात है कि सरपंच ने मनमानी करते हुए गायों को जर्जर भवन में रखा। इसके पीछे उसके मंसूबों को पता लगाएंगे। जबकि गांव में गौठान जैसी कोई निर्माण भी नहीं है। मतलब यहां लोगों को अपने मवेशियों को घर पर ही रोककर रखा जाना है। बावजूद इसके सरपंच ने लोगों के घरों से मवेशियों को एकत्रित कर जर्जर भवन में रखा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस बात की जानकारी गांव पंचायत सचिव को भी नहीं है। बावजूद इसके बिना किसी को जानकारी दिए शुक्रवार की शाम सरपंच ने सभी के घरों से मवेशियों को एकत्रित कर जर्जर भवन में रखा। जानते हुए भी कि यहां गाय सुरक्षित नहीं है। श शासन का भी आदेश नहीं है। बावजूद इसके गायों को खतरे में रखा गया। इस बात का पता लगाया जाएगा।  दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी होगी।

                        कलेक्टर ने जानकारी दी कि सबको मालूम है कि जहां गौठान नहीं है..वहां रोका छेका का मतलब लोग अपनी गायों को छेककर घर में ही रखें। गोबर को निर्धारित स्थान में जाकर विक्रय करें। मतलब गायों को लावारिस छोड़ने की वजाय घर पर ही रखना है। साथ ही गोबर के माध्यम से कमाई भी करना है।

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               उन्होने यह भी बताया कि शासन के निर्देशानुसार लावारिश मवेशियों को ही गौठान में सरपंच और सचिव समेत अन्य लोगों के सहयोग रोका छेका करना है। निजी मवेशियों को नहीं। फिर मेड़पार में जर्जर भवन में गौठान का सवाल ही नहीं है। जानकारी मिल रही है कि सरपंच ने गांव के सभी घरों से गायों को इकठ्ठा कर जर्जर भवन में रखा। निश्चित रूप से अपराध है। लेकिन उसने ऐसा किया यह जांच का विषय है। 

      कलेक्टर मित्तर ने कहा कि अधिकारी मौके पर हैं…एक एक गतिविधियों पर नजर है। किसी को नही बख्शा जाएगा। जर्जर भवन में गौठान का होने का सवाल ही नहीं उठता है। यहां सरपंच और सचिव की लापरवाही सामने आ रही है। ग्रामीणों को भी पता है कि जर्जर भवन में शासन ने गौठान का आदेश दिय़ा ही नहीं है। यदि आदेश होता तो इस बात की जानकारी सबको होती। एक दिन पहले बिना सोचे समझे गायों को रखने का सवाल ही नहीं उठता है।  बावजूद इसके बिना किसी सूचना के एक दिन पहले जर्जर भवन को सरपंच ने अस्थायी गौठान बना दिया। निश्चित रूप से स्थानीय  स्तर पर बड़ी लापरवाही है।

           कलेक्टर ने जानकारी दी कि गंभीर गायों का इलाज किया जा रहा है। मृत गायों के मालिकों को मुआवजा तत्काल दिया जाएगा। गाय मालिकों से घटनाक्रम में पूछताछ शुरू हो चुकी है। उन्होने अपने घर से गायों को किसके कहने पर जर्जर भवन में रखने के लिए छोड़ा। सारी बात स्पष्ट होने पर कठोर कार्रवाई से दोषी बच नहीं सकता है।

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             कलेक्टर ने कहा कि अपने स्वार्थ के लिए रोका छेका योजना से खिलवाड़ करने वालों को भी नहीं छोड़ा जाएगा।  दुख जाहिर करते हुए कहा कि गाय की मौत तकलीफदेह ।

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