हमार छ्त्तीसगढ़

कांग्रेस ने कहा-भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ से भूमि पूजन में किसी साधु संत को नहीं बुलाया, जवाब में BJP ने कही यह बात

रायपुर-राम भक्तों के लंबे इंतेजार के बाद आखिरकार अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन और शिलान्यास होने जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को रा जन्मभूमि में मंदिर का भूमिपूजन करेंगे। इस शुभ कार्य के लिए अयोध्या में जोर शोर से तैयारी शुरू हो चुकी है। इस समारोह में शामिल होने के लिए देशभर की कई बड़ी हस्तियों को न्योता दिया गया है। लेकिन अब भूमि पूजन को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत शुरू हो गई है। एक ओर जहां कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने भूमि पूजन में प्रदेश में किसी को न्योता नहीं देने पर कहा है कि भगवान राम के ननिहाल वालों के लोगों को नजर अंदाज किया जा रहा है। तो वहीं दूसरी ओर भाजपा प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने उनके आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि राममंदिर प्रतिस्पर्धा की चीज नहीं है। CGWALL NEWS के व्हाट्सएप ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश राज्य की पावन नगरी अयोध्या में 5 अगस्त को होने वाले बहुप्रतीक्षित मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान राम के मंदिर के भूमि पूजन आयोजन का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम राजा रामचंद्र का भव्य मंदिर और रामराज्य की कल्पना जो भारतवर्ष के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने देखा था। उन्होंने रामलला के पूजन हेतु सालों साल बंद पड़े मंदिर का ताला खुलवाया था, जिसके बाद कि पूरे देश और विदेश के राम भक्त राम लला के दर्शन कर सके। 5 दिसंबर को होने वाले अयोध्या के भूमि पूजन कार्यक्रम में मंदिर निर्माण समिति द्वारा पूरे देश से 600 से अधिक लोगों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें कि अधिकतर आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बड़े औद्योगिक घराने से तालुकात रखते हैं।

उन्होंने आगे ने कहा है कि उत्तर प्रदेश राज्य में भारतीय जनता पार्टी का शासन है, जिसके की कारण राजनीतिक वैमनस्यता के कारण मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के ननिहाल कौशल प्रदेश के किसी भी धर्मगुरु साधु संत,धर्माचार्य और प्रदेश प्रमुख को आमंत्रण नहीं दिया गया। जबकि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका है। यहां भगवान राम ने अपने वनवास के अधिकतम समय व्यतीत भी किए हैं। यहां पूरे विश्व का एकमात्र माता कौशल्या का मंदिर भी है। यहां के आदिवासी समाज भी प्रभु श्रीराम के पर गहरी आस्था रखते हैं और उन्हें अपना आराध्य भी मानते हैं। उसके बावजूद भी ना तो सतनामी समाज के धर्मगुरु ना कबीर पंथ के कबीर साहब के वंशज और ना ही आदिवासी समाज के धर्मगुरु को अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया। इससे कि पौने तीन करोड़ की आबादी वाले भगवान राम के ननिहाल और कौशल्या माता के मायके में निराशा व्याप्त हो गई है।

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कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कहा है कि कांग्रेस ने हमेशा से राम मंदिर और भगवान राम को लेकर सवाल खड़े किया है। उन्होंने एफिडेविट देकर राम को काल्पनिक बताया था। इस दौरान संजय श्रीवास्तव ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि अब जब मंदिर निर्माण शुरू होने जा रहा तो सवाल खड़ा करके कांग्रेस अपनी स्थिति खराब न करें। साठ-सत्तर सालों तक कांग्रेस ने राम मंदिर मुद्दे पर सुध नहीं ली और अब प्रतिस्पर्धा में राममंदिर के समानांतर छत्तीसगढ़ में कौशल्या मंदिर बनाने जा रहे हैं। कांग्रेसी समझ लें राम मंदिर प्रतिस्पर्धा की चीज़ नहीं है।

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