कानन में पहाड़ी बकरा का जन्म..खुश हुआ वन अमला

IMG-20150904-WA0007बिलासपुर—–कानन में गोराल ने एक मादा बच्चे को दिया जन्म दिया है । कानन पेण्डारी जूलाजिकल गार्डन बिलासपुर का वातावरण पहाड़ी बकरा यानि गोराल के लिए अनुकूल है। मालूम हो कि अप्रैल 2015 में राष्ट्रीय प्राणी उद्यान नई दिल्ली से दो मादा चौसिंघा के बदले में एक जोड़ी पहाड़ी बकरा यानि हिमालयन गोराल को पेण्डारी लाया गया था। गोराल को प्रजनन के बाद से उनके सेहत के हिसाब से खानपान पर विशेष ध्यान दिया गया। आज एक स्वस्थ मादा गोराल बच्चे का जन्म हुआ। कानन के लिए यह प्रजाति नया है। यह मुख्य रूप से हिमालय क्षेत्र में समुद्रतल से लगभग 2950 से 9020 फीट की ऊंचाई पर पाया जाता है। कानन में प्रजनन के बाद नए गोराल का जन्म होना अपने आप में सुखद अनूभूति है। पहले माना जाता था कि हिमालयन बकरा का जन्म यहां संभव नहीं है।

                   हिमालयन गोराल का बैज्ञानिक नाम निमोरिडस गोराल है। यह भैंस परिवार का सदस्य है। इसके परिवार में बायसन, जंगली भैंस, एन्टीलोप, गजेल, शीप, गोट आदि के साथ पालतु पशु भी आते हैं।
गोराल को भारत में अत्यधिक संकटग्रस्त प्रजातियों में गिना जाता है। हिमालय क्षेत्र में इनकी अत्यधिक शिकार होने और इनके रहवास पर अतिक्रमण के कारण इनकी संख्या दिनों दिन घटती जा रही है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कानन प्रशासन ने गोराल जोड़े को जू में रखकर ब्रिडिंग कराया गया।

         गोराल का क्षेत्र हिमालय से लेकर भूटान, उत्तरी भारत, सिक्किम अरूणाचल प्रदेश, नेपाल और दक्षिणी तिब्बत में है। नर और मादा दोनों में सिंग होते हैं। ये स्वभाव से जो सूर्योदय के पहले एवं सूर्यास्त के ठीक बाद (रात्रि होने के पहले) सक्रिय रहते हैं। प्रकृति में ये सुबह जल्दी घास पत्ती खाकर पानी पीकर पहाड़ की चोटी पर दिनभर आराम करते हैं। इनकी उम्र 15 वर्ष होती है। एक बार एक ही बच्चा देते हैं।

           घरेलू बकरी और पहाड़ी बकरा में पहचान इनके रंग से होता है । पहाड़ी बकरा धूसर मटमैला रंग का होता है और थन में चार फली होती हैं। जबकि घरेलू बकरी के थन में दो फळी होती है। घरेलू बकरी एक बार में एक से अधिक बच्चे देती है जबकि पहाड़ी बकरा एक बार में एक ही बच्चा देती है।

कानन ने तोड़ा मिथक..सफलता की ओर हमने बढ़ाया कदम 

          पहा़ड़ी बकरा संकटापन्न जाति का जीव है। यह ज्यादातर ठण्डे क्षेत्रों में पाया जाता है। शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि हिमालयन  बकरा का जन्म ऐसे वातावरण में हुआ। जाहिर सी बात है कि कानन में हिमालयन बकरा लायक जलवायु है। हमें खुशी है कि हमारे अभियान एक उपलब्धि और जुड़ गयी है। लार्ज जू का हमे जल्द ही तोहफा मिल सकता है। फिलहाल गोराल मां और बेटा स्वस्थ्य हैं।

                                                                       टी.आर.साहू…रेंजर..कानन जुलाजिकल पार्क बिलासपुर

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