मेरा बिलासपुर

काली पट्टी बांधकर किया काम.. हड़तालियों ने कहा..आदेश वापस लें.. वादा निभाए..या करें आंदोलन का सामना

बिलासपुर—वेतन बृद्धि कटौती,बीमा, डीए समेत अन्य मांगों को लेकर आज कर्मचारियों और अधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर काम काज करने के साथ शासन की नीतियों का विरोध किया। 
 
            छत्तीसग़ढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के जिला संयोजक  रविन्द्र तिवारी ने बताया कि तीन सूत्रीय मांगों को लेकर शासन के खिलाफ सांकेतिक विरोध किया गया है। इस दौरान सभी कर्मचारी और अधिकारियों ने शासकीय काम काज भी किया। पहले दिन आंदोलन को भरपूर समर्थन मिला। 
 
             सिम्स, जिला चिकित्सालय,मानसिक चिकित्सालय, मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सामने कर्मचारी और अधिकारियों ने अपनी मांगो को पुरजोर तरीके से रखा। साथ ही  काम काज को पूरा किया।
 
               जिला संयोजक ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन,तखतपुर,कोटा,मस्तूरी,बिल्हा ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों , आयुर्वेदिक चिकित्सालय, कोविड19के में बहतराई स्टेडियम ,रेलवे स्टेशन और कोरेण्टाईन सेंटरों, संभागीय कोविड हॉस्पिटल में कार्यरत सभी अधिकारी कर्मचारियों ने काली पट्टी लगाकर शासन का ध्यान आकर्षित किया।  साथ ही कर्मचारी विरोधी लिए गए फैसले को वापस लेने की मांग की।
 
जोखिम में कर रहे काम
 
        तिवारी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक गण, नर्सेस,मेडिकल लेब टेक्नोलॉजिस्ट, एएनएम, नेत्र सहायक अधिकारी, रेडयोग्राफर,चतुर्थ श्रेणी , एनएचएम के  सभी संवर्ग के कर्मचारी ,आयुर्वेद कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डाल कर काम कर रहे हैं। अवकाश के दिन में 15 से 18 घण्टे अपनी सेवाएं दे रहे हैं । कई चिकित्सक कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित भी हो चुके है। इस दौरान ,कुछ कर्मचारी की मौत भी हो चुकी है। बावजूद इसके  शासन को तरस नही है। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है।
 
सरकार ने छीना निवाला
 
            कर्मचारी नेता ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी  सेवाएं देने वाले कर्मवीरों को पारितोषिक देने के बजाय शासन निवाला छीन रहा है। आज स्वास्थ्य विभाग में कार्य कर रहे कर्मचारियों को सोंचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है कि हम घातक कोरोना वायरस से बचेंगे भी या नहीं। बावजूद इसके सभी लोग निःस्वार्थ सेवा दे रहे हैं। इसकी सजा सरकार हमको दे रही है। सरकार ने सेवा के ईनाम में दो वेतन  वेतनवृद्धि  को रोक दिया है।
 
वादा से मुकर गयी सरकार
 
                     मुख्यमंत्री ने एलान किया था कि कोविड19में सेवा दे रहे सभी स्वास्थ्य कर्मियों को 9 प्रतिशत जोखिम भत्ता दिया जाएगा। अब अपने बात से मुकर गए हैं। 9 प्रतिशत डी ए ब्लॉक कर दिया है। सभी कर्मचारियों का 50 लाख का स्वास्थ्य बीमा किया जाना जरूरी है। लेकिन अभी तक  नही किया गया है। जबकि राशि केन्द्र सरकार से आ चुकी है।
 
         रविन्द्र तिवारी ने बताया कि कोविड 19 में लोगों की सेवा करते हुे 2-3 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। पीडित परिवार बेसहारा हो चुका है । कमाने वाला कोई नही है।  बाल बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। लेकिन शासन ने बंद कर लिया है। शासन की आंख खोलने को ही लेकर फेडरेशन ने काली पट्टी बांधकर काम काज का फैसला किया है।
 
                        शासन के अहितकर आदेश से कर्मचारियों में आक्रोश पनप रहा है । यदि शासन ने समय रहते  अहितकर आदेश  निरस्त करते हुए सभी लंबित वित्तीय मांगों पर आदेश प्रसारित नही करता तो उग्र आंदोलन निश्चित है।
 
नियमित करने की मांग
 
                  हड़ताली कर्मचारियों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रदेश में लगभग 25-30हजार कर्मचारी अधिकारी पिछले  15 सालों  से संविदा में सेवाएं दे रहे हैं। चुनाव के पहले वर्तमान सरकार ने दावा किया था कि सरकार बनते ही  10 दिन के भीतर विभाग के रिक्त पदों पर समायोजन कर जाएगा।
              
                सरकार को बने डेढ़ साल हो चुके हैं। अभी तक वादा को नही निभाया गया है। संविदा कर्मियों का भविष्य अंधकार मय हो गया है ।  प्रदेश में सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के संचालन में सभी कर्मचारी अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं । लेकिन हम शासन को छल प्रपंच नहीं करने देंगे। अधिकारी लेकर रहेंगे।

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