कितनी विश्वनीय होगी न्यायिक जांच

hadasa--exclusive--visualबिलासपुर– छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट परिसर में निर्माणाधीन ज्यूडिशियल आफिसियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बिल्डिंग के छत गिरने की लापरवाही को लेकर सवाल सामने आने लगे हैं। मामले में पी.डब्ल्यू.डी विभाग की गंभीर लापरवाही दिखायी है। निर्माणाधीन बिल्डिंग में 30 फिट ऊंची छत की ढलाई की जा रही थी। इस बीच सेंट्रिंग के लिए लोहे के खम्बे और प्लेट लगाए गए थे।
                       30 फिट ऊंची ढलाई के सपोर्ट के रूप में खंभे को बीच से सहारे से एक दूसरे को जोड़ा नहीं गया था।  पी.डब्ल्यू.डी विभाग की अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आयी है। जानकारी के अनुसार सेंट्रिंग को बिना तकनीकी रूप से परखे ही ढलाई की इजाजत दे दी गई थी।
                   शुरूआती जांच में बात सामने आ रही है कि ढलाई के वक्त विभागीय सुपरवाइजर या फिर सिविल इंजीनियर मौजूद नहीं थे। लापरवाही पूर्वक बिना जांचे परखे ही ढलाई प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। हालांकि राज्य सरकार ने पेटी कांट्रेक्ट पद्धति पर भी रोक लगा दी है। बावजूद इसके निर्माण कार्य में नियमों को दरकिनार कर पेटी कांन्ट्रेक्टरों की सेवाए ली गयी है। डी.वी प्रोजेक्ट कंपनी ने किसी अन्य ठेकेदार को पेटी कांट्रेक्ट  दिया था।
                          अक्सर ऐसे मामलों में कुछ मुआवजा का मरहम लगाकर फिलहाल मामले को शांत कर दिया जाता है।  हादसे के बाद भी कुछ ऐसा ही होता दिखायी दे रहा है। एक मृतक और आधा दर्जन से अधिक घायलों को मुआवजे का झुनझुना थमाकर मामले में मजिस्ट्रियल जांच की जिम्मेदारी एडीएम के डी कुंजाम मजिस्ट्रियल कर रहे हैं। पूरे घटनाक्रम में अब राजनीति शुरू हो गयी है। कांग्रेस और अन्य पार्टियां लगातार अलग-अलग आंदोलन के माध्यम से दोषियों के ऊपर कार्रवाई की मांग कर रहे हैंय़
                      फिलहाल मामले में मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गयी है। जांच चार बिन्दुओं पर फोकस रहेगा। जानकारी के अनुसार मजिस्ट्रियल जांच कमेटी घटना किन परिस्थितियों में हुई,निर्माण के दौरान मानक प्रक्रिया को अपनाया गया या नहीं,घटना का वास्तविक कारण हो सकता है।  घटना के लिए जिम्मेदार कौन है  और भविष्य में इसके प्रकार की पुनरावृति को किस प्रकार रोका जा सकता है।

 

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