मेरा बिलासपुर

किसने उखाड़े गौरांग के बाल…उतारे.. जूते-मोजे

IMG-20160723-WA0201बिलासपुर— प्रेस क्लब में घुसने वाला व्यक्ति जिंदा लाश दिखाई दे रहा था। जब कुर्सी पर बैठा तो मालूम हुआ कि वह व्यक्ति कोई और नहीं मृतक गौरांग का पिता श्रीरंग चम्पत बोबड़े है। गौरंग के पिता के साथ बहन वेदान्ती बोबड़े मां भी कुर्सी पर बैठी थी। तीनों का जीवन में शायद पहली प्रेसवार्ता थी। कोई बोलने की हालत में नहीं था। लेकिन न्याय के लिए पिता ने  जब बोलना शुरू किया तो पत्रकारों के आंख से आंसू छलक उठे। मां पूरे वार्ता के दौरान या तो रोती रहीं या फिर शून्य में अपने बेटे को तलाशती रही। बहन ने जरूर हिम्मत दिखाई लेकिन वह भी अपने आंसू को रोक नहीं पायी। जिम्मेदारी निभाते हुए उसने अपने माता पिता को या तो पानी पिलाती रही या फिर दोनों के आंसू को रूमाल में संंजोती रही। सचमुच यह पहली प्रेस कांफ्रेंस थी जिसे कोई पत्रकार भूल के भी नहीं भूल पाएगा।  ऐसी प्रेसवार्ता जहां पत्रकारों ने कोई प्रश्न नहीं किया। लेकिन पीड़ा को अन्दर तक महसूस किया।

                                 अन्दर तक टूट चुके श्रीरंग बोबड़े ने बताया कि मेरे बेटे की हत्या की गयी है। दोनो हाथ जोड़कर उन्होने उपस्थित पत्रकारों से कहा कि मेरे कुछ कहने और सुनने से गौरंग वापस नहीं आएगा। लेकिन आपके लिखने से करोड़ों गौरंग की जान जरूर बच जाएगी। यदि बार नियम के अनुसार 11 बजे बंद हो जाता तो मुझे आज आप लोगों के बीच आने की जरूरत नहीं होती। हम भी गौरंग के साथ घर में होते। नियमानुसार बार को 11 बजे बंद हो जाना था लेकिन बार सुबह तीन बजे तक खुला।

             श्रीरंग ने रोते विलखते हुए बताया कि मेरे बेटे की हत्या हुई है। दुर्घटना बनाने की कोशिश ना की जाए। इसलिए अपनी पीड़ा को प्रेस के जरिए लोगों के सामने जाहिर करने आया हूं। मेरे बेटे को घसीटकर मारा गया है। मैं उस समय रायपुर व्यापारिक कार्य से था। दुसरे दिन सुबह पुलिस ने मोबाइल पर बताया कि आप जल्द से जल्द बिलासपुर पहुंचे। आपका बेटा गौरंग आईसीयू में है। पुलिस हमारे निवास पर भी गयी। लेकिन बाहर से ताला बंद था। गौरंग ने ही बाहर से ताला बंद किया था। घटना के दिन रात्रि 9 बजे घर से निकलने से पहले उसने मां को बताया कि वह अर्जुन सोनछात्रा के साथ पार्टी में जा रहा है। रात्रि एक बजे लौटेगा। गौरंग की मा की तबीयत ठीक नहीं थी। उसी ने कहा कि बाहर से ताला लगा दो। रात्रि में दरवाजा खोलने नहीं उठुंगी। गौरंग ने ऐसा ही किया। वह अज्ञाकारी बेटा था।

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                         बोबड़े ने बताया कि गौरंग की मां ने मुझे और पुलिस को बताया कि अर्जुन सोनछात्रा ने गौरंग को पार्टी में अपनी कार में बैठा कर ले गया। बोबड़े के अनुसार अर्जुन की जिम्मेदारी बनती थी कि उसके बेटे को वह कार में ही बैठाकर घर लाता। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। ना ही उसने फोन पर जानकारी दी कि उस रात्रि मैग्नेटो माल में क्या हुआ। मैं तो उस समय वहां था नहीं। इसलिए कुछ भी नहीं बता सकता कि गौरंग को किसने मारा। पुलिस वाले बता रहे हैं कि उसकी मौत सीढ़ी से गिरकर हुई है। IMG-20160723-WA0202

                                   श्रीरंग बोबड़े ने पत्रकारों से बताया कि पुलिस ने उन्हें मौत की सूचना देने में काफी देर की है। उनका व्यवहार भी इस दौरान ठीक नहीं था। सिविल लाइन थाने में मुझे गौरंग की जानकारी के लिए तीन से चार घंटे इंतजार करना पड़ा। बाद में एक आरक्षक ने बताया कि यहां भीड़ लगाने से कुछ नहीं होगा। आपका ल़ड़का मर चुका है। मैं भागते जिला अस्पताल पहुंचा। मेरे सामने एक कागज पेश किया गया। जिसमें मुझे दस्तखत करना था। उसी समय जानकारी हुई कि मेरा बेटा मर चुका है। पोस्टमार्ट के पहले दस्तखत की औपचारिकता करनी है। वहीं मुझे बताया गया कि डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम कर रही है। लेकिन यह नहीं बताया कि टीम सरकारी स्तर पर है या फिर औपचारिक स्तर पर।

             श्रीरंग बोबड़े ने निकलते आसूंओ के धार के बीच लड़खड़ाते जुबान में कहा कि मुझे न्याय चाहिए। यदि गौरंग की मौत सीढ़ी से गिरने से होती तो उसके उखड़े हुए बाल माल के दूसरे प्लोर पर नहीं मिलते। उसका जूता बेसमेंट में मिला। मोजा फर्स्ट प्लोर से मिला। आखिर किसने मेरे गौरंग का बाल उखाड़ा और जूते मोजे उतारे हैं।

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                बोबड़े ने बताया कि सिस्टम में सुधार की सख्त जरूरत है। केवल बार ही नहीं बल्कि हर जगह कानून का कड़ाई का पालन हो। बार को 11 बजे बंद हो जाना चाहिए था। नहीं हुआ। पुलिस की गश्त झूठी है। आबकारी विभाग के दावे बेमानी हैं। बार मालिक ने ज्यादा पैसों के लालच में मेरा घर उजाड़ दिया। मुझे अब लम्बी लड़ाई लड़नी है। देश के नौजवान धरोहर को बचाना है। पहले सिस्टम तो ठीक किया जाए। नौजवान हमारी पूंजी हैं। यदि वहीं नहीं रहेंगे तो हमारा जीना व्यर्थ है।

                        बोबड़े ने कहा कि गौरंग के साथियों को गौरंग के ह्त्यारों को निश्चित रूप से जानकारी होगी।  इस दौरान श्रींरंग घटना की सिलसिलेवार जानकारी दे रहे थे। मां के आंसू रूकने के नाम नहीं ले रहे थे। हाय गौरंग हाय गौरंग की बस आवाज निकल रही थी। छोटी बहन वेदान्ती पत्थर बनकर माता और पिता के आसूंओ को रूमाल में सहेज रही थी। तैयार कर रही थी सिस्टम से लम्बी लड़ाई का ताना-बाना।

अच्छे कपड़े में गया..अंतरंग कपड़ों मेरा बेटा

IMG-20160723-WA0202                    गौरंग की मां ने रोते बिलखते बताया कि मेरे बेटे को अर्जुन सोनछात्रा ले गया। उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह गौरंग को घर लाकर छोड़ता। उसने हमसे छलावा किया है। उसने तो फोन पर भी जानकारी नहीं दी। मेरे बेटे को किसने मारा मुझे नहीं मालूम लेकिन किसी ने मारा जरूर है। उसे सजा मिलनी चाहिए। मैने अपने बेटे को सुन्दर कपड़ों में पार्टी के लिए जाते देखा था। सिस्टम ने उसे नंगा कर चड्ठी बनियान में भेजा। गौरंग के हाथ टुटे हुए थे। सिर पर चोट है। नांक और मुंह से खून निकला है। पेट और चेहरे पर चोट के निशान हैं। मेरे बेटे की हत्या की गयी है। मुझे न्याय चाहिए।

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बाउंंसरों ने की हत्या

                 गौरंग के शरीर पर चोट के निशान हैं। आंख के चारों तरफ नीला निशान है। दाहिने हाथ को दो जगह से तोड़ा गया है। बाएं हाथ की हड़्डी को भी एक जगह से तोड़ा गया है। पेट पर भी चोट के निशान हैं। नाक और मुंह से खून निकला है। सीढ़ी से गिरकर गौरंग की मौत नहीं हुई है। कम से कम चोट तो यही कहते हैं। वेदान्ती ने पत्रकारों से बताया कि मेरा परिवार न्याय के लिए अन्तिम दम तक लड़ेगा। चोट के निशान से जाहिर होता है कि मारपीट बाउंसरों ने की है। इसमें कौन कौन शामिल हैं। इसकी जानकारी हमें नहीं है। लेकिन गौरंग के साथ पार्टी में गए लोगो को इसकी जानकारी निश्चित रूप से होगी।

ऊपर से दबाव

                   जैसा की जानकारी मिली है कि रायपुर से पुलिस को स्पष्ट निर्देश है कि गौरंग के हत्यारे को खोजकर निकालना ही है। किसी प्रकार की कोताही बर्दास्त नहीं की जाएगी।

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