कोरबा आबकारी में लाखों का घोटाला…घोटालेबाज दारोगा को अभयदान

AWAIDHA_SHARAB 1बिलासपुर/कोरबा—-कोरबा आबकारी विभाग में घालमेल का पुराना मामला सामने आया है। लाखों रूपए सरकारी शराब की बिक्री को कोषालय में जमा महीनों नहीं जमा किया गया। तात्कालीन संभागीय उड़नदस्ता प्रमुख आशीष श्रीवास्तव के निर्देश के बाद भी कोरबा आबकारी अधिकारी ने दारोगा के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। जबकि मामले की जानकारी राज्य उडनदस्ता टीम और विभाग के अालाधिकारियों को भी है।

                     कोरबा आबकारी विभाग में भारी वित्तीय अनियमितता का महीनों पहले का मामला सामने आया है। मामले को पूरी तरह से अधिकारी दबाने में कामयाब हो गए हैं। लेकिन सीजी वाल ने मामले को सबके सामने का प्रयास किया है। जानकारी के अनुसार कुछ महीने पहले संभागीय उडनदस्ता टीम ने आशीष श्रीवास्तव की अगुवाई में जमनीपाली आयोध्यापुरी सरकारी दुकान में छापामार कार्रवाई की। इसी दौरान राज्य उड़नदस्ता टीम ने भी छापा मारा। दोनों टीमों ने दुकान में भारी अनियमितता पाया। पन्द्रह लाख रूपए नगद की हेराफेरी के अलावा सरकारी दुकान में शराब स्टाक में गड़ब़डी टीम को मिली। तात्कालीन संभागीय उडनदस्ता प्रभारी आशीष श्रीवा्स्तव ने पाया कि स्टाक में प्रतिदिन बिक्री की जानकारी नहीं है। रिकार्ड भी दुरूस्त नहीं है। जांच पड़ताल के दौरान उडनदस्ता प्रभारी को मालूम हुआ कि शराब दुकान में डिस्लरी का स्टाक खपाया जा रहा है। उन्होने मामले में सहायक आयुक्त कोरबा को दारोगा के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया। साथ ही आलाधिकारी को भी सूचित किया। बावजूद इसके ना तो दारोगा के खिलाफ किसी प्रकार का एक्शन लिया गया और ना ही आबकारी सहायक आयुक्त कोरबा ने दारोगा को हटाया।

दो कर्मचारियों पर हुई थी कार्रवाई

                    कोरबा आबाकरी विभाग में छापामार कार्रवाई के महीनों पहले वित्तीय करप्शन में लेकर दो कर्मचारियों को एसीबी ने रंगे हाथ पकड़ा था। बावजूद इसके विभाग के अधिकारी अपनी हरककतों से बाज नही आए। बल्कि करप्शन का नया तरीका  इजाद कर लिया। जैसा की सूत्र ने बताया कि आबकारी अधिकारियों ने करप्शन का नया तरीका इजाद कर लिया। ठेके के दुकान को पहले तो उठने नहीं दिया जाता इसके बाद सरकारी दुकान का संचालन कर लाखों रूपए का चूना लगाया जाता है।

सरकार डाल डाल..कर्मचारी पात पात

                                सरकार डाल डाल है…लेकिन कोरबा आबकारी कर्मचारी पात पात पर हैं। एसीबी और सरकारी कार्रवाई का उन पर कोई असर नहीं है। जमनीपाली अयोध्यापुरी शराब दुकान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कुछ महीने पहले कोरबा के जमनीपाली जेलगांव अयोध्यापुरी शासकीय सरकारी दुकान पर राज्य और संभागीय उड़नदस्ता टीम ने छापामार कार्यवाही की। कार्रवाई के दौरान टीम को भारी वित्तीय अनियमितता की जानकारी मिली। बावजूद इसके आरोपियों पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। कार्रवाई की बात तो दूर विभाग के कमाऊपूत दागी दारोगा को फिर से अयोध्यापुरी सरकारी शराब दुकान का संंचालक बना दिया गया।

                      कुछ लोगों ने बताया कि दारोगा का मेनेजमेंट बहुत मजबूत है। उसकी पहुंच रायपुर के बड़े साहब तक है। जिला आबकारी सहायक आयुक्त से अच्छी जुगलबंदी होने के कारण दारोगा को सजा की वजाय सरकारी दुकान संचालन का तोहफा मिला है।

पन्द्रह लाख का घोटाला

                                       सूत्रों की मानें तो राज्य और संभागीय उडनदस्ता टीम ने अयोध्यापुरी शासकीय शराब दुकान से एक सप्ताह की 15 लाख रूपए बिक्री राशि को कोषालय में जमा नहीं किया था। जांच पड़ताल में टीम को शराब दुकान के स्टॉक में भारी अनियमितता मिली। हिसाब रजिस्टर में भी काला पीला देखने को मिला। बावजूद इसके  उडनदस्ता टीम ने ना तो सख्त कदम उठाया और ना ही दारोगा को ही हटाया। जानकारी के अनुसार सब कुछ बंद कमरे में ठीक कर लिया गया।

                          सूत्र ने बताया कि अयोध्यापुरी सरकारी दुकान संचालक दारोगा के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने की मुख्य वजह कोरबा आबाकारी सहायक आयुक्त हैं। जानकारी के अनुसार कार्रवाई को छिपाने जमकर लेनदेन हुआ। शायद यही कारण है कि भारी अनियमितता के बाद भी संभाग से लेकर राज्य के सभी आबकारी अधिकारी मौन हैं।

अमानत में खयानत का मामला

                                          मालूम हो कि नियम के अनुसार शासकीय राशि को अपरिहार्य कारणों में ही कुछ समय के लिए ही अपने पास रखने की छूट है। लेकिन किसी भी सूरत में 24 घंटे के अन्दर शासकीय राशि को कोषालय में जमा करना होता है। ऐसा नहीं करने पर अमानत पर ख्यानत माना जाता है। ऐसे ही एक मामले मे बिलासपुर आबकारी दारोगा को समय पर राशि नहीं जमा करने पर निलंबित कर दिया गया था। लेकिन कोरबा में ऐसा कुछ नहीं हुआ। जांच पड़ताल में भारी अनियमितता पाए जाने के बाद भी अयोध्यापुरी के दारोगा को बचा लिया गया।

                              आबकारी विभाग कोरबा के एक कर्मचारी ने बताया कि अयोध्यापुरी शराब दुकान कुबेर का खजाना है। दरों में घालमेल कर यहां एक दिन में 25 से 30 हजार से अधिक रूपयो का मुनाफा होता है। महीने में यह राशि कई लाख में बदल जाती है। फायदे का विभाग के कर्मचारी बंदरबांट कर लेते हैं।

                            यही कारण हैं कि हिसाब किताब को दुरूस्त रखने कोरबा समेत प्रदेश के सभी शासकीय शराब दुकानों में संविदा में एक सेवानिवृत्त अधिकारी को बैठाया गया है। संविदा कर्मचारी ऊपरी पैसे का लेखा जोखा करता है। इसमें उसकी भी हिस्सेदारी होती है।

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