हमार छ्त्तीसगढ़

खूँटाघाट का आधा हिस्सा अब भी खाली…खुड़िया में 90फीसदी पानी

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रायपुर ।   चालू सप्ताह के शुरूआती तीन-चार दिनों में प्रदेश में हुई बारिश के फलस्वरूप सिंचाई जलाशयों में जल भराव की स्थिति सुधरी है। प्रदेश के 42 बड़े और मध्यम सिंचाई जलाशयों में औसत रूप से 64.37 प्रतिशत जल भराव है। इनमें से तीन जलाशय- मोंगरा बैराज (राजनांदगांव), केदार नाला और पुटका नाला जलाशय (दोनों रायगढ़) शत-प्रतिशत भर गए हैं। जल संसाधन विभाग के स्टेट डाटा सेन्टर द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार  सुबह की स्थिति में रायपुर जिले का कुम्हारी जलाशय सबसे कम भरा है। यह जलाशय अभी तक मात्र 15 प्रतिशत ही भर पाया है। बिलासपुर जिले में खूँटाघाट बाँध का करीब आधा हिस्सा अब भी खाली है। जबकि मुंगेली जिले के खुड़िया बाँध का नब्बे फीसदी से अधिक हिस्सा अब तक भर चुका है।

अधिकारिक जानकारी के मुताबिक मिनीमाता बांगो जलाशय 68.48 प्रतिशत, गंगरेल बांध 56.10 प्रतिशत, तांदुला जलाशय 57.25 प्रतिशत, दूधावा जलाशय 39.59 प्रतिशत, सिकासेर जलाशय 97.17 प्रतिशत, खारंग जलाशय 51.19  प्रतिशत, सोंढूर जलाशय 93.96 प्रतिशत, मुरूम सिल्ली जलाशय 37.24 प्रतिशत, कोडार जलाशय 35.15 प्रतिशत, मनियारी जलाशय 91.73 प्रतिशत, खरखरा जलाशय 69.18 प्रतिशत, बोदली जलाशय 46.05 प्रतिशत, कोसारटेडा 96.75 प्रतिशत, परालकोट जलाशय 39.65 प्रतिशत, श्याम जलाशय 96.37 प्रतिशत, छीरपानी जलाशय 57.99 प्रतिशत, पिपरिया नाला जलाशय 55.18 प्रतिशत, बल्लार जलाशय 27.16 प्रतिशत, सूतियापाट जलाशय 85.87 प्रतिशत, मरोदा जलाशय 49.72 प्रतिशत, सरोदा जलाशय 60.60 प्रतिशत, घोंघा जलाशय 77.72 प्रतिशत, मटिया मोती जलाशय 34.37 प्रतिशत, झुमका जलाशय 69.19 प्रतिशत, गेजटैंक जलाशय 39.97 प्रतिशत, खम्हारपाकुट जलाशय 77.80 प्रतिशत तथा केशवा जलाशय 25.96 प्रतिशत भरा है। इसी प्रकार कर्रा नाला जलाशय 78.11 प्रतिशत, बांकी जलाशय 44.41 प्रतिशत, किनकारी नाला जलाशय 59.37 प्रतिशत, कनवारपुर जलाशय 60.45 प्रतिशत, बेहारखार जलाशय 77.90 प्रतिशत, खपरी जलाशय 72 प्रतिशत, बरनई जलाशय 94.62 प्रतिशत, पेण्ड्रावन जलाशय 38.32 प्रतिशत, रूसे जलाशय 26.69 प्रतिशत, मयाना जलाशय 31.96 प्रतिशत तथा धारा जलाशय 37.10 प्रतिशत भर गया है।

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इस बार चौमास के दौरान शुरूआती दौर  में ही बहुत अच्छी बारिश नहीं होने से बाँधों में भराव उम्मीद के हिसाब से नहीं हो पाया था। हाल की बारिश से स्थिति में  कुछ सुधार हुआ है। लेकिन प्रदेश के सिंचाईं बांधों  मे अब भी पानी भरने की जगह बची हुई है।

 

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