हमार छ्त्तीसगढ़

गोधन न्याय योजना: पशुपालकों, किसानों को मिलेगी अतिरिक्त आय के साथ दीर्घकालिक आजीविका

नारायणपुर-मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के पशुपालकों को लाभ पहुंचाने के लिए हाल ही में ‘‘गोधन न्याय योजना‘‘ का एलान किया है। ‘‘गोधन न्याय योजना‘‘ प्रदेश के पशुपालकों के लिए यह अच्छी खबर है। इस योजना की शुरूआत अगले माह हरेली पर्व पर होगी। सरकार द्वारा बनायी गयी जनहितकारी योजना शुरू में कुछ लोगों के गले न उतर पाने का सिलसिला पुराना है। इसके अलावा शुरू की गई योजना के बारे में कुछ लोगों का अधूरा ज्ञान भी घातक होता है। लेकिन जनता मौन रहकर यह सब चुपचाप देखती और सुनती है और वक्त पर ही अपना सटीक फैसला सुनाती है।उचित नीतियों और व्यवहारों द्वारा इस क्षेत्र में विकास के अवसरों को बढ़ाया जा सकता है। जिससे किसानों को अतिरिक्त आय, दीर्घकालिक आजीविका सुरक्षा और गांवों में अधिक स्वच्छता सुनिश्चित होगी। उचित नीतियों और व्यवहारों द्वारा इस क्षेत्र में विकास के अवसरों में बढ़ाया जा सकता है। जिससे पशुपालकों, किसानों को अतिरिक्त आय, दीर्घकालिक आजीविका सुरक्षा और गांवों में अधिक स्वच्छता सुनिश्चित की जा सकती है।

आज भी कई देश और राज्य जिसमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है। ऊर्जा उत्पादन के लिए मवेशियों के गोबर और जैविक अपशिष्ट का उपयोग करते है। लेकिन राज्य में इस तरह के अपशिष्ट की आर्थिक क्षमताओं का पूरी तरह लाभ उठाने में पूरी तरह सफल नहीं हुआ है। जबकि प्रदेश में पशु संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर की बड़ी मात्रा को धन और ऊर्जा में बदलकर इसका लाभ उठाने की अपार संभावना है।मुख्यमंत्री द्वारा गो पालन को बढ़ावा देना, पशुपालकों की आथर््िाक रूप से सुदृढ़ बनाना तथा उन्हें लाभ पहुंचान ही इस योजना का मुख्य मकसद है।

इसका एक लाभ और भी जहां घूमते हुए खुले में मवेशियों का चरना और फसल को नुकसान पहंुचाने में भी कमी आयेगी । इसके लिए भी मुख्यमंत्री ने रोका-छेका की शुरूआत की। लेकिन यह पुरानी परंपरा है, जिसमें धीरे-धीरे कमी आने लगी और मवेशी किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने लगे। इसके लिये 30 जून तक प्रदेश में रोका-छेका मनाया जा रहा है।ग्रामों में पशुपालक ग्रामों में बैठक कर मवेशियों को खुले में नहीं चरने देने और चरवाह के जरिए ही पशुओं को चराने भेजने की शपथ ले रहे है। गोधन योजना से जहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। गो पालकों और किसानों की और बेहतर आर्थिक स्थिति होगी। अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के एक अध्ययन के मुताबिक गोबर का प्रोडक्टिव तरीके से उपयोग राष्ट्रीय स्तर पर लाखों रोजगारों का सृजन कर सकता है। 

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