मेरा बिलासपुर

गोलबाजार..लाइलाज अतिक्रमण का शिकार..

dwarikaबिलासपुर—प्रशासन के आलाधिकारी जब बोलते हैं कि गोलवाजार को वन वे किया जाएगा। सुनकर अजीब लगता है कि या तो उन्हें वन वे का अर्थ नहीं मालूम या फिर मुझे ही जानकारी नहीं है। भाई साहब बिलासपुर का गोलबाजार तीस साल से वन वे है। सीजी वाल से अतिक्रमण और यातायात समस्या पर ये बातें साहित्यकार, चिंतक द्वारिका प्रसाद अग्रवाल ने कही।

                     गोलबाजार को वन वे किया जाएगा। सुनकर अजीब लगता है। कलेक्टर नए हैं उन्हें जानकारी नहीं है। लेकिन यातायात अधिकारियो को तो है वे बताएं कि गोलबाजार पिछले तीस साल से वन वे है।

     द्वारिका ने कहा कि मुझे प्रशासन के नुमाइंदों से कहना है कि साहब गोलबाजार अतिक्रमण का भेंट चढ़ गया है। यदि प्रशासन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो उसे दुरूस्त करवाए। इससे बिलासपुर की शान बढ़ेगी। अग्रवाल ने कहा कि सदर बाजार और जूना बिलासपुर क्षेत्र अतिक्रमण का पर्याय है। अतिक्रमण आज का नहीं दशकों पुराना है।

                   अग्रवाल ने सीजी वाल को बताया कि गोलबाजार, सदर बाजार, शनिचरी क्षेत्र को अतिक्रमण का लाइलाज रोग लगा है। यातायात बुरी तरह से चरमरा गयी है। यातायात व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए पुलिस का डर होना जरूरी है। द्वारिका ने कहा कोई काम बिना डर के नहीं होता। हिन्दुस्तानी डरने के बाद ही काम करता है। बचपन में माता पिता का डर। जवानी में कानून का डर। पुलिस ने अपना काम करना छोड़ दिया है तो लोगों का डर भी खतम हो गया ।

           उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों से देख रहा हूं कि पुलिस हर मामले को ओवरलुक कर देती है। जाहिर सी बात है डर भी खतम हो गया। पुलिस को कानून के अनुसार काम करना होगा। तभी गोलबाजार का अतिक्रमण हटेगा। प्रशासन को यह सब दृढता के साथ करना होगा।

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                 द्वारिका ने बताया कि गोलबाजार पदयात्रियों और साइकिल के लिए है। एक तरफ से प्रवेश कर गोलबाजार घूमों और बाहर निकल जाओ। उन्होंने कहा कि गोल बाजार का अन्दर का ढांचा अब रह ही नहीं गया है। लोगों ने स्वरूप ही बिगाड़ दिया है। उन्हें नियमानुसार तोड़ा जाए। दोनों मुहानों पर पुलिस की टाइट व्यवस्था हो। कोतवाली में पार्किंग की व्यवस्था हो। जो भी व्यक्ति या व्यापारी गाड़ी लेकर गोलाबाजार में आए उस पर कठोर कार्रवाई हो। सिम्स की ओर से गोलवाजार जाने वालों के लिए निर्माणाधीन आडिटोरियम में पार्किंग की व्यवस्था की जाए। फिर गोलबाजार खुद बखुद दुरूस्त हो जाएगा।

                 द्वारिका ने कहा कि वन वे की जरूरत गोलबाजार को नहीं सदर और जूना बिलासपुर को है। इन्हें वन वे किया जाना चाहिए। यदि इन सड़कों को वन वे किया जाता है तो फिर आने-जाने वालों के लिए सड़क ही कहां हैं। जो सड़क हैं वह चलने लायक नहीं हैं। ऐसा हुआ है मेरे बिलासपुर का विकास।

                       द्वारिका अग्रवाल का मानना है कि जिला प्रशासन यदि ईमानदारी से कार्रवाई करते हुए सदर बाजार,गोलबाजार और जूना बिलासपुर क्षेत्र से बेजा कब्जा हटा दे तो यातायात की समस्या अपने आप दुरूस्त हो जाएगी। लेकिन कार्रवाई चेहरा देखकर ना हो। ऊदल चौक से मानसरोवर चौक तक नो व्हीकल जोन घोषित किया जाए। दोनो ओर पार्किंग की व्यवस्था की जाए। यहां तक कि व्यापारियों की गाड़ियों का प्रवेश ना हो। सब ठीक हो जाएगा।

               द्वारिका अग्रवाल ने बताया कि रिवर व्यू रोड है जिसे मुख्य बाजार के समानांतर तैयार किया जा सकता है। इसी तरह मध्यनगरी क्षेत्र से गोलबाजार की ओर आने वाली सभी सड़कों से बेजा कब्जा हट जाए तो काफी हद तक टैफिक व्यवस्था बहाल हो सकती है। लेकिन विकल्प की तलाश को बनाए रखना होगा।

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