छत्तीसगढ़ ही नहीं भारत का एक सरकारी स्कूल ऐसा भी ……..

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           रायपुर  (वैभव शिव पाण्डेय )।        गुरू चाहे तो अपने शिष्यों को आगे बढ़ाने बहुत कुछ कर सकता है। फिर चाहे कई तरह की समस्याएं हो या ढेरों चुनौतियाँ। जैसे छत्तीसगढ़ के एक शिक्षक ने अपने छात्रों के लिए किया है। सरकारी स्कूल में डिजिटल इंडिया की झलक और ई-लर्निंग की स्मार्ट क्लास वो भी बिना किसी सरकारी मदद से ऐसा जानकार जरा अचरच होता है ।  आश्चर्य होना स्वभाविक भी है।  लेकिन यही सच है ।  
          सरकारी स्कूलों में बिना सरकारी मदद की ऐसी तस्वीर छत्तीसगढ़ ही नहीं भारत में भी शायद बहुत कम ही देखने को मिलें। ये तस्वीर है प्रदेश के रायपुर जिले के धरसींवा ब्लॉक स्थित पठारीडीह शासकीय प्राथमिक शाला की। यहाँ पहली और दूसरी के छात्र आधुनिक संचार तकनीकों के साथ पढ़ाई करते हैं। जिसे हम डिजिटल तकनीक कहते हैं। इसे कहते है ई-लर्निंग वाला स्मार्ट क्लास । इस तकनीक के साथ पढ़ई की शुरुआत की है स्कूल के शिक्षक उत्तम कुमार देवांगन ने।
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ऐेसे हुई शुरुआत-  
दरअसल शिक्षक उत्तम देवांगन को इस बात का बड़ा मलाल था कि स्कूल में पांचवीं पढ़ने वाले  बच्चें  भी ठीक से अक्षर ज्ञान नहीं पहचान पाते। छात्रों को न तो ठीक से गिनती आती है और न ही वे रुचि लेकर पठन कार्य कर पाते हैं।  उन्होंने इसके लिए ई-लर्निंग क्लास की जानकारी ली। कई वीडियों ने उन्होंने इंटरनेट पर देखें।  और फिर अपने वेतन के खर्च से छात्रों के लिए एक कम्प्यूटर और साउंड सिस्टम की व्यवस्था की । अप्रेल 2013 में पठारीडीह सरकारी स्कूल में ई-लर्निंग क्लास की शुरुआत हुई । उन्होंने ई-लर्निंग की शुरुआत पहली और दूसरी कक्षा के छात्रों के साथ की। क्योंकि उन्हें लगा की पहली से बच्चें अगर पढ़ई में रुचि लेंगे और मनोरंजन के साथ पढ़ई करेंगे  तो उनका शुरुआती अध्ययन मजबूत हो जाएगा।
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बच्चों का पढ़ई में लगा मन, हिन्दी के साथ अंग्रेजी का भी हुआ ज्ञान – 
शिक्षक उत्तम देवांगन का कहना है कि साल भर में ई-लर्निंग का परिणाम दिखने लगा । जिस उद्देश्य के  साथ उन्होंने स्मार्ट क्लास की शुरुआत की वे अब उसमें धीरे-धीरेम सफल होने लगे हैं ।
स्कूल के छात्रों का मन पढ़ई में लगने लगा है । हिन्दी के अक्षरों के साथ-साथ अब पहली और दूसरी के बच्चें अंग्रेजी के अक्षर भी अच्छी तरह से पहचान लेते हैं । बच्चों को अब कई कविताएं, प्रार्थाना भी याद हो गई है । विजुअल और साउंड सिस्टम के साथ बच्चें मनोरंजक तरीके से अध्यापन कार्य कर रहे हैं ।
सरकार ने  नहीं गांव वालों ने की मदद- 
ऐसा नहीं कि यह सरकारी स्कूल सुविधा-सपन्न है। यह स्कूल भी अन्य सरकारी स्कूलों की तरह ही कई तरह के अभावों के बीच संचालित है। जहां छात्रों की सबसे बड़ी समस्या बैठक व्यवस्था है। लेकिन इससे परे उत्तम देवांगन ने अपने वेतन के खर्चे से ई-लर्गिंग की शुरूआत कर इसे मॉडल स्कूल बना दिया है। इसमें सरकारी मदद तो नहीं मिली पर कुछ सहयोग गांव वालों ने जरूर किया। गांव वालों ने शिक्षक उत्तम देवांगन के लगन को देखकर उन्हें एक 40 इंच की एलईडी भेंट की ।  स्कूल में इसका फायदा यह भी हुआ कि बच्चों की उपस्थिति शत-प्रतिशत होने लगी।
इसके लिए ये भी विशेष है यह स्कूल  –
विद्यालय की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है । बच्चों के आदत में इसे शामिल करने हर कक्षाओं के बाहर एक कचरा-डिब्बा रखा गया ।  वहीं इस स्कूल के छात्रों के लिए उनके नाम वाला परिचय-पत्र और टाई भी दिया गया है , जो सामन्यता सरकारी स्कूलों में बहुत कम दिखता है ।
इसके साथ ही स्कूल के शिक्षक भी पूरी तरह अप-टू-डेट रहते हैं । वे भी अपने पहनावे पर खास ध्यान रखते हैं । साथ ही छात्रों की तरह वे अपने परिचय-पत्र के साथ अध्यापन कार्य कराते हैं ।
स्कूल के शिक्षकों की यह है मांग – 
शिक्षक उत्तम देवांगन  का यह भी कहना है कि अप्रेल 2015 में ही उन्होंने कक्षा पहली के बच्चों के अध्ययन की सीडी बनाकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, राजीव गांधी शिक्षा मिशन कार्यलय, राज्य शैक्षेणिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान परिषद को सौंपा था । उनसे  ये मांग कि है की पठारीडीह स्कूल को ई-लर्निंग क्लास वाला मॉडल स्कूल घोषित किया जाए और इसी तरह की व्यवस्था अन्य स्कूलों में लागू किया जाएं ।
गांव वालों ने राष्ट्रपति पुरस्कार की मांग- 
पठारीडीह के गांव वालों ने शिक्षक उत्तम देवांगन के सरकारी स्कूल के बच्चों के प्रति समर्पण और शिक्षा के प्रति किए जा रहे उनके अभिनव प्रयास के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार देने की मांग की है ।
…..ये तो यहीं कहते हैं साहब- 
 पठारीडीह स्कूल सुविधाहीन जरूर है, लेकिन ई-लर्निंग वाले स्मार्ट क्लास प्राइवेट स्कूलों को  भी मात दे दे। यहां के शिक्षक और छात्र ठंडी हवाओ वाले एसी कक्ष में बैठककर शिक्षा विभाग के लिए हजारों करोड़ की बज़ट और योजना बनाने वाले को चिढ़ा रहे हैं। कह रहे हो जैसे कि हमसे सीखिएं साहब….

 

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