छात्र नेताओं ने किया कुलपति कक्ष में हंगामा

BUNewबिलासपुर— बिलासपुर विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए छात्रों ने एबीवीपी और एनएसयूआई के साथ मिलकर कुलपति कक्ष में जमकर हंगामा किया। छात्रों का आरोप है कि उन्हें समय पर परीक्षा होने की जानकारी नहीं दी गयी है। जिसके चलते वे लोग परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। पेपर लीक होने, त्रिस्तरीय परीक्षा जांच और अन्य मुद्दों को लेकर हंगामा कर रहे छात्र नेताओ ने कुलपति से इस्तीफे की मांग भी की। छात्र नेताओं ने कहा कि यदि कुलपति छात्रहित में निर्णय नही ले सकते है इस्तीफा देकर चले जाए।

                              बिलासपुर विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के बाद से ही विवादो में घिरा रहा है। प्राईवेट कॉलेजों को फायदा पहुंचाने का आरोप छात्र नेता हमेशा विश्वविद्यालय प्रबंधन पर लगाता रहा हैं। छात्र संगठन एबीवीपी और एनएसयूआई ने आज एक साथ मिलकर कुलपति जीडी शर्मा के कक्ष में जमकर हंगामा किया। छात्र संगठन का आरोप है कि बीए प्रथम वर्ष में 100 छात्र पेपर नहीं दिया है। इसके लिए विश्वविद्यालय का प्रबंधन जिम्मेदार है।  छात्रनेताओं का कहना है कि हर बार बिलासपुर विश्वविद्यालय में बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा सुबह 11 बजे आयोजित होती है। लेकिन इस बार बिना किसी पूर्व सूचना के परीक्षा का समय सुबह 7 बजे कर दिया गया। जिसके चलते  100 से अधिक छात्र परीक्षा देने वंचित हो गए।

                छात्र नेताओं ने फिर से परीक्षा की मांग करते हुए  कुलपति के कक्ष में हंगामा किया। कुलपति और कुल सचिव से परीक्षा देने से चूक गए छात्रों का दुबारा पेपर लेने को कहा। कुलपति गौरीदत्त शर्मा ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि दुबारा परीक्षा लिया जाना संभव नहीं है। 50 प्रतिशत से अधिक छात्र यदि परीक्षा देने से वंचित होते है तभी दुबारा परीक्षा होती है।

                      दोनों ही संगठनों ने कुलपति के सामने छात्रहित का सवाल उठाते हुए हंगामा मचाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि बिलासपुर विश्वविद्यालय में यह कैसा नियम हैं कि परीक्षा से पहले ही पर्चा लीक हो जाता है। कुलसचिव को उन्होंने वाट्सएप में इसकी सूचना दी थी बावजूद इसके साइंस के लीक पेपर को निरस्त नहीं किया गया। रायगढ़ से पेपर लीक होने की जानकारी दोनों ही छात्र संगठनों ने कुलपति को दी थी । लेकिन कुलपति ने बात को मामने से इनकार करते हुए जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही।

                     छात्रो ने बताया कि प्राईवेट कॉलेजों को लाभ पहुंचाने के लिए ही कुलपति और कुलसचिव काम कर रहे हैं। कॉलेज से अभी भी कुछ प्रवेश पत्र वितरित नहीं हुए है। जो हुए भी उनमें बहुत गलतियां हैं।  किसी में परीक्षार्थी का नाम गलत है तो किसी में पिता का नाम । विद्यार्थी पढ़ाई करे या गलती सुलझाने के लिए कालेज का चक्कर काटे। दोनों के बीच बहस चलती रही आखिर में कुलपति को पुलिस को बुलाना पड़ा तब की कहीं जाकर मामला शांत हुआ।

 

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