मेरा बिलासपुर

छिपाया जा रहा था मास्टर प्लान— क्रेडाई

IMG_20150915_175244बिलासपुर– मास्टर प्लान का अर्थ सुव्यस्थित योजना से है। शहर के विकास को व्यस्थित दिशा देने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाता है। बिलासपुर का मास्टर प्लान 2011 में आना था । प्रशासनिक लेटलतीफी के चलते अब आया है। खामियों से भरा है। हमने इसका विरोध किया। जब बिलासपुर के अधिकारियों ने हमें नहीं सुना तो रायपुर गए। वहां उच्च अधिकारियों ने ना केवल हमें सुना बल्कि 18 बिन्दुओं को स्वीकार भी किया। अब देखते हैं संशोधित मास्टर प्लान कैसा आता है। यह बातें सीजी वाल से कन्फडरेशन रियल स्टेट डेव्हलपर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के बिलासपुर अध्यक्ष ने कही।

                      बिलासपुर क्रेडाई अध्यक्ष एस.पी. चतुर्वेदी ने सीजी वाल को बताया कि बिलासपुर का मास्टर प्लान खामियों से भरा है। इसलिए हमने विरोध किया। मास्टर प्लान ने लोगों का दिल तोड़ दिया है। कई लोगों के सपनों को रौंद दिया है। मास्टर प्लान कुछ लोगों ने लिए कुछ लोगों ने तैयार किया था। सच बात तो यह है कि बिलासपुर मास्टर प्लान राजनीति का भेंट चढ़ गया है। किसी को नीचा दिखाने के लिए किसी ने मास्टर प्लान तैयार कराया है।

                    चतुर्वेदी ने बताया कि मास्टर प्लान की विसंगतियों को देखने के बाद टाउन एंड कन्ट्री प्लानिंग में शिकायत करने पहुंचे । हमें तवज्जों नहीं दिया गया। हम लोगों ने महसूस किया कि यदि मास्टर प्लान लागू हो गया तो अभी कम बाद में त्राहिमाम की स्थिति आ जाएगी। आर्किटेक्ट एसोसिएशन, इंजीनियर एसोसिएशन और क्रेडाई ने 18 विसंगतियों को रायपुर में सचिव संजय शुक्ला के सामने रखा। डायरेक्टर परदेशी ने इन विसंगतियों को स्वीकार किया।

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                  एस.पी.चतुर्वेदी ने सीजी वाल को बताया कि अधिकारियों से मिलने के बाद आवास एवं पर्यावरण मंत्री से भी मिले। उन्होंने उत्साह नहीं दिखाया। लेकिन लौटने के बाद बिलासपुर टाउन एंड कन्ट्री प्लानिंग में आश्चर्यजनक परिवर्तन देखने को मिला। पहले मास्टर प्लान की जो सीडी नहीं खुल रही थी अब वह खुलने लगी। अधिकारियों ने 18 बिन्दु वाली शिकायत को बड़े सम्मान के साथ लिया।

                  सीजी वाल से चतुर्वेदी ने बताया कि शुरू से ही अहसास हो गया था कि शासन कुछ छिपाने का प्रयास कर रहा है। 11 अगस्त को मास्टर प्लान बन गया था लेकिन सामने देरी से आया। दावा आपत्ति के लिए भी समय बहुत कम दिया गया । लेकिन रायपुर से लौटते ही सब कुछ पानी की तरह साफ हो गया कि गड़बड़ी कहां पर थी।

             क्रेडाई अध्यक्ष ने बताया कि मास्टर प्लान में एफएआर में भारी गड़बड़ी है। सबसे गड़बड़ी शहर का सेन्ट्रलाइज होना है। आने वाले समय में लोगों को भारी परेशानी होगी। यातायात व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती है। बीच शहर में एफएआर कम होने का अर्थ सीधा-सीधा उन्हें नुकसान हैं जो जमीन नहीं खरीद सकते। बाहरी क्षेत्र में एफएआर बढ़ने से किसी को कोई एतराज नहीं है। उन्होने बताया कि पुराने मास्टर प्लान में जिस जमीन को रेसिडेन्सियल घोषित किया गया था नए में एग्रीकल्चर बताया गया है। जाहिर सी बात है जिसने घर बना लिया वह तो मर गया। अधिकारी उसे तोड़कर ही रहेंगे। बैंक से जिसने लोन लिया वह कर्जदार को दम कर देगा।

                                  चतुर्वेदी के अनुसार हैदराबाद या बाहर का व्यक्ति शहर का मास्टर प्लान कैसे बना सकता है। उन्होंने बताया कि बिलासपुर में जानकारों की कमी नहीं है। यदि इन्हें सलाहकार के रूप में रखते हुए मास्टर प्लान बनाया जाता तो आज ट्रायल की स्थिति नहीं आती। कुछ देर के लिए अधिकारी छोटे नहीं बन जाते। शहर का ही फायदा होता। इतनी किरकिरी भी नहीं होती।

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                  क्रेडाई अध्यक्ष चतुर्वेदी ने बताया कि नए मास्टर प्लान से जेल गायब है। अग्रसेन चौक के पास एक प्लाट को एग्रीकल्चर जमीन होना बताया गया है। पिछले बीस साल से नगर को सेवा देना वाला चालिस किलोमीटर का ज्वाली नाला कहां गया पता नहीं। सिरगिट्टी की एक रेसीडिंसियल जमीन से नाला निकाल दिया गया है। मगरपारा स्थित एक नर्सरी में बने छोटे से तालाब को सरोवर बताया गया है। यह बताने के लिए काफी है कि मास्टर प्लान में जानबूझ कर गलतियां की गयी है।

                       चतुर्वेदी कहते हैं कि इस मुद्दे को लेकर हमारा या संगठन का कोई व्यक्तिगत फायदा नहीं है। जब प्लान ठीक होगा तो सबको फायदा मिलेगा। उसमें हम भी शामिल हैं।

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