जनसहयोग से होगा पर्यावरण का संरक्षण..

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arpa_udgamबिलासपुर—-नदी का उद्गम स्थल भारतीय परम्परा में तीर्थ स्थल का दर्जा हासिल है। अरपा उद्गम स्थल का विकास तीर्थ स्थल की तरह विकसित किया जाएगा। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यह बातें कलेक्टर अन्बलगन पी. ने अरपा बचाओ यात्रा के कार्यक्रम में कही।

                 राघवेन्द्र राव सभाभवन परिसर में आयोजित अरपा बचाओ यात्रा को हरी झंडी दिखाने से पहले कलेक्टर ने कहा कि हमें भू-जलसंरक्षण की मानसिकता को विकसित करना होगा। पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कलेक्टर ने कहा कि दांडी यात्रा की तरह लोग जागरूक होकर अरपा विकास यात्रा से जुड़ेंगे। यह अभियान एक दिन सफल होगा। भू-जल के दोहन में कमी आएगी।

                     कलेक्टर ने कहा कि पानी का उपयोग आवश्यकतानुसार हो। वर्षा जल को बचाने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का उपयोग जरूरी है। पर्यावरण प्रदूषण कम करने के लिए वाहनों और विद्युत उर्जा की खपत में कमी लाने की जरूरत है। ऐसे मशीनों के उपयोग कम हो , जो कार्बन डाई ऑक्साईड छोड़ते हों।

                       अन्बलगन पी ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए अनावश्यक वृक्षों की कटाई नहीं की जायेगी। सड़क निर्माण वृक्षों को बचाकर किया जाएगा। आवश्यकता होने पर वृक्षों के स्थानांतरण भी किया जाएगा। पानी और पेड़ को आने वाली पीढ़ी के लिए बचाना होगा। यह सब जनसहभागिता से ही संभव है।

                  छत्तीसगढ़ी राज भाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक ने कहा कि हमारे जीवन में नदी मां की तरह पूजनीय है। नदियों को बचाने की जरूरत है। नदियों को जीवनदान देने के लिए जल संरक्षण, नदियों का दोहन कम से कम करने और पेड़ लगाने की बात की जरूरत है। डॉ. पाठक ने अरपा बचाओ यात्रा को महत्वपूर्ण बताया। उन्होने कहा कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह प्रकृति, नदी और पर्यावरण को बचाने के लिए सामने आएं।
                                   सी.व्ही.रमन विश्वविद्यालय के कुलसचिव शैलेष पाण्डेय ने गंगा अवतरण की पौराणिक आख्यान का उद्धरण देते हुए कहा कि हमारी संवेदनशीलता नदियों के प्रति खत्म हो रही है। हम उसका विकास और उपयोग पर्यटन स्थल की तरह करना चाहते हैं। हमें नदियों की अस्तित्व की रक्षा करते हुए पर्यावरण की दृष्टि से सच्चे हृदय से सम्मान करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नदियां को बचाने के लिए नीतियां बननी चाहिए । इसमें लोगों की भी सहभागिता हो। पाण्डेय ने कहा कि प्रकृति के साथ अत्याचार करेंगे तो परिणाम भी हमें भुगतना पड़ेगा। अरपा बचाओ यात्रा को पर्यावरण संरक्षण और  जनजागरूकता के लिए आवश्यक बताया।
                     बिलासा कला मंच के संस्थापक डॉ. सोमनाथ यादव ने कहा कि यह अभियान विगत् 6 वर्ष पूर्व से प्रारंभ किया गया है। अरपा बचाओ यात्रा का यह सातवां वर्ष है। 28 से 31 मई 2016 तक यह यात्रा राघवेन्द्रराव सभाभवन से प्रारंभ होकर अलग-अलग पड़ाव से गुजरती हुई अरपा-शिवनाथ नदी के संगम स्थल ग्राम मटिया में खत्म होगी। कार्यक्रम में पर्यावरणविद्,पत्रकार प्राण चड्डा, समाजसेवी चन्द्रप्रकाश देवरस, राजेन्द्र मौर्य, डॉ. सुधाकर बिवे, राघवेन्द्र धर दीवान, महेश श्रीवास, अजय शर्मा समेत बिलासा कला मंच के पदाधिकारी और सदस्यगण समेत नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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