मेरा बिलासपुर

जब भावुक हुए विधायक..कहा आप घर जरूर जाएंगे..हम करेंगे बात..स्वास्थ्य सचिव को बताया..पदों की भर्ती जरूरी

बिलासपुर—-नगर विधायक शैलेष पाण्डेय ने  राज्य मानसिक चिकित्सालय,सेंदरी  का भ्रमण किया। विधायक ने मौजूद स्टाफ के साथ इलाज के बाद ठीक हो चुके मरीजों से संवाद किया। काम काज का जायजा भी लिया। प्रबंधन की मांग पर कर्मचारी सेटअप समेत अन्य निर्माण कार्यों को लेकर अधिकारियों से मोबाइल पर बातचीत भी की। 
 
           नगर विधायक शैलेष पाण्डेय ने सोमवार को राज्य मानसिक चिकित्सालय का भ्रमण किया। निरीक्षण के दौरान विधायक ने चिकित्सकों के साथ एक एक चैम्बर का जायजा लिया। अस्पताल में भर्ती करीब 200 मरीजों की जानकारी ली। साथ ही खान पीन व्यवस्था का जायदा भी लिया। विधायक ने चिकित्सकों की मांग को ध्यान से सुना। सेटअप पूरा करने का आश्वासन भी  दिया।
 
           निरीक्षण के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि साल भर पहले निर्माण कार्य विस्तार को लेकर शानस से 18 लाख की स्वीकृत हुई थी। अस्पताल को राशि की सख्त जरूरत है। जानकारी के बाद विधायक ने एसडीएम से बातचीत की। डॉक्टरों की जानकारी के बाद विधायक ने एनटीपीसी प्रबंधन को प्रस्तावित निर्माण कार्य को लेकर सीएएसआर मद से 30 लाख रूपए दिए जाने को लेकर चर्चा की। प्रबंधन ने आश्वास दिया कि जल्द ही मद का आवंटन कर दिया जाएगा।
 
            शैलेष पाण्डेय ने स्थानीय विधायक रजनीश सिंह से भी मोबाइल पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने वस्तुस्थिति को लेकर चर्चा की। इस दौरान शैलेष ने  मेण्टल हास्पिटल के विकास और सुविधाओं को लेकर विधायक निधी से सहयोग की जरूरत को बताया। शैलेश पाण्डेय ने बताया कि विधायक रजनीश सिंह से 10 लाख रूपए विधायक निधी से दिए जाने का निवेदन किया है। उन्होने बात को गंभीरता से लिया है।
 
                   पाण्डेय ने बताया कि राज्य मानसिक चिकित्सालय में विकास की अपार संभानाएं है। यहां बेहतर सेवाएं दी जा रही है। बावजूद इसके सहयोग की जरूरत है। अस्पताल में स्टाफ की कमी महसूस की जा रही है। स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक, स्वास्थ्य संचालक नीरज बंसोड़़. कलेक्टर, बिलासपुर और सीएचएमओ से विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही है। 
 
ठीक हुए मरीजों से मिलकर भावुक हुए विधायक
 
           राज्य मानसिक चिकित्सालय निरीक्षण के दौरान विधायक ने ठीक हो चुके मरीजों से संवाद किया। कुछ टीक हो चुके मरीजों की बातें सुनकर विधायक की आंखे डबडबा गयी। शैलेष ने आश्वासन दिया कि आप सभी लोग घर जरूर जाएंगे।
 
       ठीक हो चुके मरीजों ने विधायक को बताया कि हम लोग अब स्वस्थ्य हैं। लेकिन घर वाले पूछने तक नहीं आए। यद्यपि यहां किसी बात की कमी नहीं है। लेकिन बच्चों और घरवालों की बहुत याद आती है। ठीक हो चुके मरीजों ने कहा कि परिजनों की उपेक्षित व्यवहार से लगता है कि हम घर के लिए बोझ हो चुके हैं।  कई बार जानकारी दिए जाने के बाद भी घर वाले लेने नहीं आ रहे हैं। मरीजों ने कहा आप विधायक हैं.। .यदि चाहेंगे तो लोग लेने आ जाएंगे।
 
                 भावुक विधायक ने कहा कि हम प्रयास करेंगे के जल्द से जल्द घर पहुंचे। घरवालों को समझाएंगे कि आप लोग ठीक हो चुके हैं। एक मरीज ने बताया कि हमने अपना सब कुछ बच्चों को बनाने में खर्च कर दिया। अब उन्ही लोगों ने हमें बेगाना समझ लिया है। हम चाहते हैं कि कम से कम एक बार मिलकर पूछ तो लें कि आखिर उनका कसूर क्या है। हमने क्या अपराध किया है।  इलाज के दौरान कोई भी खोज खबर लेने क्यों नहीं आया।
 
डॉक्टरों ने बताई परेशानी
 
        विधायक को डाक्टरों ने बताया कि हमारे यहां दर्जनों मरीज ठीक हो चुके हैं। परिजनों को कई बार जानकारी दे चुके हैं। बावजूद इसके परिजनों को लेने कोई नहीं आता है। कई बार तो ऐसा हुआ है कि हम मरीज को लेकर उसके घर जाते हैं। लेकिन परिजन लेने से इंकार कर देते हैं। मजबर होकर हमें ठीक हो चुके मरीजों को अस्पताल में रखना पड़ता है। जो मरीज पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं उन्हें इस बात को लेकर बहुत पीड़ा होती है। हम उनके दर्ज को बांटने का प्रयास करते हैं। लेकिन ऐसा कब तक किया जा सकता है। मरीजों के परिजनों को इस बात को ध्यान देना होगा। विधायक ने कहा कि हम मरीजों के परिजनों से सम्पर्क कर खोजखबर लेने की बात कहेंगे।
 
 
 
 

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