जिला प्रशासन का आदेश…केवल CM ही करेंगे सुराज मंच को साझा…फिर अधिकारी क्यों कर रहे सौतेला व्यवहार

बिलासपुर–– लोकसुराज अभियान में आए दिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की स्थिति देखने को मिल रही है। कमोबेश सभी जगह सुराज अभियान को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों में आक्रोश है। आरोप लगाया जा रहा है कि अधिकारी सत्ता पक्ष के नेताओं को ही मंच पर बैठने का मौका दे रहे हैं। विपक्ष के चुने हुए  जनप्रतिनियों को मंच से दूर रखा जा रहा है। ताजा मामला बिल्हा विधानसभा के किरारी समेत  कई जगह देखने को मिला है।  इसके अलावा ऐसे कई उदाहरण हैं जिसके कारण विपक्षी जनप्रतिनिधिय़ों ने जिला प्रशासन के सामने पीड़ा जाहिर की है।

                                         लोकसुराज अभियान में विपक्षी जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रसासन पर सत्ता पक्ष के प्रतिनिधियों को विशेष तवज्जों दिए जाने का आरोप लगाया है। मामले में बिल्हा जनपद पंचायत अध्यक्ष गीतांजली  कौशिक ने एडीएम से लेकर कलेक्टर से भी शिकायत की है।

           गीताबंजी कौशिक ने पीड़ा जाहिर करते हुए कहा बिल्हा जनपद पंचायत की चुनी गयी अध्यक्ष हूं। लोकसुराज अभियान में ना तो बोलने दिया जाता है और ना ही मंच पर बुलाया ही जाता है। स्थानीय अधिकारी केवल सत्ता पक्ष के नेताओं को मंच साझा करने के लिए बुलाते हैं। कई बार मंच पर ऐसे लोगों को बैठाया जाता है जो चुने हुए जनप्रतिनिधि भी नहीं है। इतना ही नहीं भाजपा पार्षदों को भी मंच पर बैठाकर अधिकारी लोग महिमामंडित करते हैं।

                                               गीतांजली कौशिक के अनुसार अधिकारी लोग मुझे सुराज अभियान में लगातार बुलाकर अपमानित करते हैं। मामले में एडीएम के.डी.कुंजाम से भी शिकायत की है। अतिरिक्त कलेक्टर कुंजाम ने बताया कि मंच को सिर्फ मुख्यमंत्री के अलावा कोई भी अन्य जनप्रतिनिधि ना तो साझा कर सकता है और न हीं संबोधित कर सकता है। कुंजाम ने गीतांजली को बताया कि मामले में सभी सीईओ को आदेश भी जारी किया गया है।  बावजूद इसके यदि शिकायत मिलती है तो जानकारी मांगेगे।

                         गीतांजली कौशिक ने एक दिन पहले कलेक्टर से मिलने के बाद बताया कि मामले को लेकर कलेक्टर से भी शिकायत की है। कलेक्टर को संज्ञान में लाया गया है कि जिला प्रशासन के आदेश की स्थानीय अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं।

            यह जानते हुए भी जिला प्रशासन ने जिले के सभी एसडीएम, सीईओ जनपद प्रभारी अधिकारियों को लोकसुराज अभियान के दौरान मंच की स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि लोकसुराज में शासन के निर्देशों का पालन किया जाए। शिविर में मिले आवेदनों का निराकरण मंच से पढ़कर आवेदकों को बताना होगा।

                         इसके अलावा आदेश में यह भी लिखा गया है कि लोकसुराज का मंच केवल मुख्यमंत्री ही साझा कर सकते हैं। मुख्यमंत्री मंच से लोगों लोगों को संबोधित करेंगे। आदेश के अनुसार  मुख्यमंत्री के अलावा अन्य किसी भी अतिथि या जनप्रतिनिधि को लोकसुराज मंच से संबोधित करने का औपचारिक अधिकार नहीं है।

                        गीतांजली ने बताया कि निर्देशों के बाद भी लोग सुराज मंच को लोग साझा कर रहे हैं। बिल्हा जनपद पंचायत अध्यक्ष होने के बाद भी मुझे मंच से दूर रखा जा रहा है। नाराज गीतांजली के अनुसार नियम सबके लिए बराबर होना चाहिए। जब सत्ता पक्ष का नेता मंच साझा कर सकते है तो चुने हुए जनप्रतिनिधि की हैसियत से मुझे भी मंच पर बैठने का अधिकार है। लेकिन अधिकारी लोग सत्ता पक्ष के दबाव में भाजपा नेताओं को ही  मंच पर बैठाते हैं  विपक्ष के चुने हुए प्रतिनिधियों को दूर रखते हैं। कभी कभी ऐसा भी होता है कि जब भाजपा के बड़े नेता मंच होते हैं तो मंच पर स्थान मिल भी जाता है। लेकिन जब नेता नहीं होते तो जनप्रतिनिधियों को मंच तक बुलाया भी नहीं जाता है। जिसके कारण अपमानित महसूस करना होता है।

                                            गीतांजली ने कहा कि एक दो उदाहरण हो तो बताएं। कमोबेश सभी समाधान शिविरों में नियमों की अनदेखी हो रही है। उर्तुम,रहंगी,तेलसरा समेत सीपत,मस्तूरी पथरिया सभी जगह सत्ता पक्ष के लोगों को मंच दिया जाता है लेकिन विपक्ष के चुने गए जनप्रतिनिधियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है।

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