हमार छ्त्तीसगढ़

जिले के तिलोरा, दुर्गडीह गाँव बनेंगे जल-ग्राम

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रायपुर ।  छत्तीसगढ़ में जल क्रांति अभियान के तहत चयनित सबसे अधिक पानी की कमी वाले गांवों में पानी के संरक्षण और समुचित उपयोग के लिए व्यापक कार्य योजना बनायी गई है। इन गांवों को जलग्राम नाम दिया गया है। जल ग्रामों में पानी के संरक्षण और उपयोग के लिए आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। शासन द्वारा अभियान के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ठोस कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को हर जल गांव के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है।

जल क्रांति अभियान 2015-16 के चयनित गांवों में बस्तर जिले के बड़े देवड़ा, बुरजी, कोण्डागांव जिले के जोबा, चिपरैल, नारायपुर जिले के एड़का, रेमावंड, उत्तर बस्तर (कांकेर) जिले के पुसवाड़ा, दमकसा, दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा ) जिले के कुण्डेली भोगम, सुकमा जिले के छिंदगढ़, छापरा, बीजापुर जिले के गुदमा, कर्रेमरका, बिलासपुर जिले के तिलोरा, दुर्गडीह, मुंगेली जिले के डाकाचाका, भरेवां, जांजगीर-चाम्पा जिले जुनाडीह, भांठा, कोरबा जिले के जल्के, चोढ़ा, रायगढ़ जिले के सम्बलपुरी, भकुर्रा, सरगुजा जिले के सोनपुर कला, असकरा, बलरामपुर जिले के खटवाबरदर, परियाडीह, सूरजपुर जिले के बंजा, गोविन्दपुर, कोरिया जिले के फुनगा, कटगोड़ी, जशपुर जिले के जोरण्डाझरिया, जामपानी, रायपुर जिले के रीवा, छेड़िया, बलौदाबाजार जिले के टोपा, झिर्रा, गरियाबंद जिले के सड़क परसुली, मुनगापदर, महासमुंद जिले के बांसकुण्डा, बेडेसरा, धमतरी जिले के कोरगांव, छुही, दुर्ग जिले के निकुम, मोहलई, बालोद जिले के पुसावड़, सिंघोला, बेमेतरा जिले के पुटपुरा, रामपुर, राजनांदगांव जिले के कौड़ीकसा, सोमनी तथा कबीरधाम जिले के सेमो और ठाठापुर (श्रीरामपुर) शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा जल संरक्षण एवं प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए शुरू किए गए जल क्रांति अभियान शुरू किया गया है। अभियान के तहत प्रदेश में पानी की सर्वाधिक कमी वाले 54 गांवों का चयन कर लिया गया है। इनमें सभी 27 जिलों के दो-दो गांव शामिल हैं।  चयनित गांवों को जल की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। पानी के संरक्षण के संबंध में जन-जागरूकता लाने उल्लेखनीय कोशिश की जाएगी।  इन गांवों में पानी की आपूर्ति से संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए जलमित्र भी बनाया जाएगा। जल गांवों की महिला पंचायत सदस्यों को भी जलमित्र बनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। जल गांवों में बंद हो चुके जल संसाधनों जैसे जलाशय टैंक आदि की मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य किया जाएगा। बरसात के पानी का विभिन्न माध्यमों से संचय कर भू-जल स्तर बढ़ाने की पहल की जाएगी। किसानों की इस भागीदारी के लिए जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। जल संरक्षण के लिए नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

अंधेरे से उजाले की ओर ले जाना ही सौभाग्य योजना का लक्ष्य-धरमलाल कौशिक

 

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