जिस गाँव में मुंगेली जिला ODF घोषित हुआ..वहीं अधूरे हैं शौचालय..मजदूरी का भी भुगतान नहीं..

लोरमी(योगेश मौर्य)।जिस तरह से स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण जोर शोर से किया जा रहा है , उसी कड़ी में अपने कार्य क्षेत्र को ओडीएफ घोषित करने के लिए अधिकारियो में भी होड़ लगी हुई है। ऐसा ही एक मामला मुंगेली जिले का है जहाँ के लोरमी विकासखण्ड के ग्राम पंचायत महामाई में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था।जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री अजय चंद्राकर उपस्थित थे, और उन्ही के हाथों मुंगेली जिले को ओडीएफ जिला घोषित किया गया  । पूरे राज्य में मुंगेली जिले को सबसे पहले ओडीएफ जिला घोषित किया गया था  ।लेकिन इस ओडीएफ जिले की घोषणा जिस पंचायत से की गयी थी ।  उसी पंचायत में शौचालय की सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। जिस तरह से ओडीएफ घोषित करने के लिए शौचालयों का निर्माण कराया गया ।  उसमे तो कई शौचालय ऐसे है जो खंडहर के रूप में तब्दील होते जा रहे है। जब हमारी टीम ने महामाई पंचायत के आश्रित ग्राम डगनिया पहुची तो ओडीएफ की सच्चाई सामने निकल कर आई ।  इस गांव में 30 से 35 बैगा परिवार रहते है वहीं ग्रामीणों ने भी बताया कि हमारा शौचालय तो अधूरा पड़ा है और जो बनाये है उन्हें उनकी मजदूरी का भुगतान नही किया गया।
जिसगाँव में  कैबिनेट मंत्री अजय चंद्राकर  ने जिले को ओडीएफ घोषित किया था,  उस गांव में ही शौचालय अधूरे पड़े है। ओडीएफ घोषित करने के समय अजय चंद्राकर ने जिले के अधिकारियो सहित नेताओ की तारीफों के पूल बांधे थे। वहीं इस पूरे मामले में जनपद सीईओ उमाशंकर वंदे कार्यवाही करने और अधूरे शौचालय को जल्द पुरा कराने का आश्वासन देते नजर आये।
पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सागर सिंह ने इस मामले प्रशासन पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि पंचायत मंत्री को धोखे में रखकर ओडीएफ घोषित करा दिया गया ।  जिस गांव में घोषणा किया गया वही के शौचालय अधूरे है तो पूरे लोरमी का क्या हाल होगा। लोरमी जनपद पंचायत की अध्यक्षा वर्षा विक्रम सिंह जिन्हें लोरमी के ओडीएफ होने पर सम्मानित किया गया था उन्होंने कहा कि आपके माध्यम से जानकारी मिली है  । उन्होने जल्द ही शिकायतों का निराकरण करने की बात कही।

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