जीएसटी से निगम को 10 करोड़ का घाटा? कहां से होगी भरपाई

nigam_karyashalaबिलासपुर(सीजीवाल)।एक जुलाई 2017 से देश में जीएसटी दरें लागू हो जाएंगी। आम जनता के साथ-साथ लोगों ने शुभ लाभ का लेखा जोखा करना शुरू कर दिया है। जीएसटी किसके के लिए शुभ और किसके लिए लाभदायक साबित होने वाला है यह तो लागू होने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन जीएसटी के आने से बिलासपुर नगर निगम को सीधे सीधे 10 करोड़ 32 लाख का सालाना नुकसान होगा। इसकी भरपाई कहां से होगी…फिलहाल इसकी जानकारी निगम प्रशासन को भी नहीं है।सीजीवाल

                                 जानकारी के अनुसार बिलासपुर नगर निगम के कोष में विभिन्न टैक्स और अन्य मदों से सालाना 34 करोड़ आते हैं। कुल आवक में से ज्यादातर राशि निगम कर्मचारियों के वेतन में खर्च हो जाती हैं। 34 करोड़ रूपए में निगम को 10 करोड़ 32 लाख रूपए राज्य शासन से क्षतिपूर्ति के रूप में मिलते है। 2 करोड़ रूपए आबकारी से अलग से मिलता है। जीएसटी लागू होेने के बाद करीब 12 करोड़ 32 लाख रूपए राज्य सरकार निगम सरकार को देना बंद कर देगी। इसका मतलब है कि निगम कोष को सीधे सीधे 10 करोड़ 32 लाख रूपए सालाना नुकसान होगा। जबकि आबकारी प्रशासन से मिलने वाला दो करोड़ रूपए सालाना की कटौती पहले से ही कर दी गयी है।सीजीवाल

क्या है क्षति पूर्ति राशि

                        करीब 25 साल पहले अविभाज्य मध्यप्रदेश शासन के आदेश पर जगह जगह चूंगी बैरियरों को बंद कर दिया गया। सरकार ने चूंगी बैरियर हटाने के बाद नुकसान को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को चूंगी क्षति पूर्ति राशि देने का एलान किया। तात्कालीन समय बिलासपुर नगर निगम को सरकार ने प्रति व्यक्ति 26 रूपए प्रति महीने रूपए देने का फैसला किया। राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार बिलासपुर नगर निगम को 26 प्रति व्यक्ति प्रतिमाह के हिसाब से चूंगी टैक्स क्षति पूर्र्ति राशि सालाना 10 करोड़ 32 लाख रूपए तक दे रही है। यह प्रक्रिया वर्तमान जून महीने तक रहने वाली है। क्षति पूर्र्ति में कर प्रकार के टैक्स शामिल हैं। इसके अलावा 2 करोड़ का सालाना आबकारी टैक्स भी शामिल है।सीजीवाल

निगम पर कैसे पड़ेगा दबाव

                   जीएसटी लागू होने के बाद निगम को 10 करोड़ 32 लाख का राजस्व नुकसान है। इसका असर कर्मचारियों के अंशदान पेंशन भत्ता,परिवार कल्याण कटौती,यांत्रिकी प्रकोष्ठ कटौती,शासकीय ऋण कटौती,हुडको,सुडा कर्ज पर पड़ेगा। 10 करोड़ 32 लाख सालाना चुंगी क्षति पूर्ति की राशि मेंkishor ray से करीब 5 करोड़ 97 लाख रूपए सालाना इन प्रमुख मदों में जाता है। शासन से इन मदों में व्यय करने के बाद निगम कोष में केवल 4 करोड़ 35 लाख रूपए ही आते हैं। सवाल उठता है कि तमाम मदों का खर्च अब निगम प्रशासन कैसे उठाएगा।

कहां कहां जाती क्षति पूर्ति राशि

                                जानकारी के अनुसार 10 करोड़ 32 लाख रूपए जगह जगह मदों में डाले जाते हैं। अभी तक सरकार प्रति महीने सभी मदों में निगम की क्षति पूर्ति राशि से रूपए डालती थी। पेंशन अंशदान में 25 लाख प्रति महीना,सालाना 3 लाख 10 हजार रूपए। परिवार कल्याण कटौती में 8 लाख रूपए प्रति महीने। यांत्रिकी प्रकोष्ठ कटौती में 25 लाख रूपए शासकीय ऋण कटौती में सालाना 1 करोड़ 63 लाख रूपए खर्च होते हैं। हुडको,सुडा ऋण के अालावा अन्य खर्च 81 लाख रूपए सालाना खर्च होते हैं।

चुंगी क्षति पूर्ति में विसंगति

                बिलासपुर नगर निगम को प्रति व्यक्ति प्रति महीने के हिसाब से साल 1993 से अभी तक 26 रूपए क्षति पूर्ति राशि मिलती है। इस दौरान तीन वेतन आयोग आए और कई बार महंगाई बढ़ी। लेकिन क्षति पूर्ति राशि में बृद्धि नहीं हुई। हां जनसंख्या वृद्धि के अनुसार निगम के राजस्व में चूंकि क्षति पूर्ति का इजाफा जरूर हुआ। लेकिन प्रति व्यक्ति क्षति पूर्ति राशि में किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ। बिलासपुर की जनसंख्या इस समय चार लाख से अधिक है। लेकिन क्षति पूर्ति राशि का भुगतान 2011 जनगणना के आधार पर किया जाता है। मतलब 3 लाख 41 की आबादी को आधार मानकर छत्तीसगढ़ सरकार  बिलासपुर नगर निगम को सालाना 26 रूपए के हिसाब से 10 करोड़ 32 लाख रूपए देती है।

क्या कहते हैं कांग्रेसी

            SHAILENDRA JAISAWAL     निगम कांग्रेस पार्षद प्रवक्ता शैलेन्द्र जायसवाल ने बताया कि क्षति पूर्ति राशि जीएसटी के बाद बंद हो जाएगी। निगम के पास आय के सीमित श्रोत हैं…जाहिर सी बात है कि महंगाई बढ़ेगी। दस करोड़ राशि मामूली नहीं होती है। निगम को विभिन्न श्रोतों से सालाना 34 करोड़ रूपए मिलते हैं। दस करोड़ सीधा सीधा गया। खर्च इतना है कि जब 34 करोड़ में पूरा नहीं होता था तो अब 24 करोड़ में होने से रहा…। जाहिर सी बात है कि इस कमी को दूर करने के लिए निगम सरकार टैक्स बढ़ाएगी…तो महंगाई भी बढ़ेगी। जनता पर अतिरिक्त भार डाला जाएगा। जलकर, संपत्तिकर,सड़क कर बहुत से कर थोपे जाएंगे। जनता अब हलाल होने के लिए तैयार रहे।

क्या कहते हैं महापौर

              महापौर किशोर राय ने बताया कि जैसा शैलेन्द्र जायसवाल कह रहे हैं..वैसा कुछ होना नहीं है। सरकार ने पहले से ही कह रखा है कि क्षति पूर्ति राशि दी जाएगी। जनता पर अलग से कर थोपने का सवाल ही नहीं उठता है। कांग्रेस के पेट में दर्द होने लगता है…जब भी विकास और सुधार की बातें होती हैं। जीेएसटी लागू होने से उनके पेट में मरोड़ उठने लगी है। दावे के साथ कहता हूं कि जीएसटी लागू होने से महंगाई बढ़ेगी नहीं…बल्कि नियंत्रित होगी। अतिरिक्त अधिभार लगाने का सवाल ही नहीं उठता है।

क्या कहती है सरकार

सरकार ने पहले ही कह रखा है कि निगम प्रशासन आय के स्रोत जनरेट करे। सरकार से निर्धारित राशि से एक पाई अधिक मिलेगी। इस मामले में कई बार निकाय मंत्री ने सार्वजनिक बयान भी दिया है कि निगम को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होना होगा। इसके लिए उसे काम भी करना होगा।

 

Comments

  1. By शरद दुबे

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