जैनियों ने किया संलेखना का समर्थन

IMG-20150824-WA0004बिलासपुर-बिलासपुर जैन समाज ने कोर्ट के एक निर्णय से आहत होकर आज मौन जुलूस निकालकर अपना विरोध प्रदर्शन किया। जैन समाज का धर्म बचाओ जुलूस गोलबाजार,सदर बाजार,प्रताप चौक,तिलकनगर से होते हुआ कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। कलेक्टर को लिखित निवेदन करते हुए कोर्ट के आदेश को धर्म समाज के विरोध में बताया।

                     मालूम हो कि राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने एक निर्णय में संल्लेखना को आत्महत्या से जोड़ते हुए संज्ञेय अपराध बताया है। जैन समाज का कहना है कि आत्महत्या और संलेख्नना दो अलग- अलग सिद्धांत और विचार है। संलेखना जैन धर्म का अभिन्न हिस्सा है। इस पर प्रतिबंध लगने से समाज के सिद्धांतो पर गहरा आघात लगेगा। कलेक्टर कार्यालय पहुंचे जैन समाज के प्रबुद्ध लोगों ने बताया कि संलेखना करने वाले लाभ अलाभ की स्थिति से परे होते हैं। इसका संबध पर द्रव से नहीं होता है पर भावों से परे होता है। उन्होंने बताया कि जैन धर्म के प्रायः सभी ग्रंथों में समाधिकरण,पण्डितमरण, संल्लेखना आदि का वर्णन किया गया है। यह सब देह त्याग कर भव सुधारने के लिए किया गया है। जो कि किसी भी सूरत में आत्महत्या से अलग है।

                  मालूम हो कि राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्डपीठ ने एक सिविल याचिका पर सुनवाई करते हुए निखिल सोनी बनाम यूनियन आफ इंडिया व अन्य में जैन धर्म के जैन धर्म में संलेखना को प्रतिबंधित किये जाने का निर्णय दिया है। बिलासपुर जैन समाज का मानना है कि यह अव्यवहारिक और धर्म विपरीत निर्णय है।

                     कोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ आज जैन समाज ने रैली निकालकर कलेक्टर बिलासपुर को लिखित रूप से अपना विरोध करते हुए कहा कि संलेखना पर प्रतिबंध से जैन समाज के धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।

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