झीरमकाण्ड– सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक

JHIRAM GHATIबिलासपुर— परिवर्तन यात्रा के दौरान 25 मई को दरभा झीरम घाटी में कांग्रेसी नेताओ के काफिले में हुए नरसंहार के मामले में आज जस्टिस प्रशांत मिश्रा की विशेष न्यायालय में सुनवाई हुई । आज बस्तर के तत्कालीन एसपी मंयक श्रीवास्तव का प्रतिपरीक्षण हुआ। बीजापुर में परिवर्तन यात्रा में हुई सुरक्षा व्यवस्था के साथ बस्तर की सुरक्षा का मिलान किया गया। मिलान के दौरान बीजापुर के मुकाबले बस्तर की सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियां पाई गयी। कांग्रेस के अधिवक्ता ने कहा कि परिवर्तन यात्रा में अगर एम्बुलेंस होती तो..वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल और कुछ अन्य लोगों की जान बचाया जा सकता था। जज के सामने इस बात को तत्कालीन एसपी ने स्वीकार भी किया।

                      आज झीरम घाटीकाण्ड में जस्टिस प्रशांत मिश्रा के कोर्ट में प्रतिरक्षण किया गया। कांग्रेस के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने तत्कालीन एसपी मंयक श्रीवास्तव से प्रतिपरीक्षण किया। उन्होने पूछा कि जिस तरह विकास यात्रा में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे..उसके मुकाबले परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था कमी नहीं थी?  क्या सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेसिक नियमों का पालन नहीं किया गया?  बीजापुर तात्कालीन एसपी ने सुरक्षा के सारे इंतजाम का दुरूस्त होना बताया।

                     कोर्ट में कांग्रेस अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि प्रस्तुत दस्तावेजों से बात साबित  हो गया है कि दोनो यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में अन्तर था। अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने बीजापुर की सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही मुख्यमंत्री की विकास यात्रा में सुरक्षा व्यवस्था जुडे दस्तावेज पस्तुत किये। उन्होने कोर्ट के सामने एस 7  के आदेश की कॉपी प्रस्तुत की। दस्तावेज के अनुसार बीजापुर में परिवर्तन यात्रा के काफिले में एम्बुलेंस होने का जिक्र किया गया है। इसके विपरीत एंबुलेंस बस्तर की सुरक्षा व्यवस्था में शामिल नहीं थी।

                           सुदीप श्रीवास्तव ने बीजापुर तत्कालीन एसपी मंयक श्रीवास्तव से पूछा गया कि क्या परिवर्तन यात्रा में एम्बुलेंस सेवा होती तो वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल, सियाराम सिंह और अन्य को बचाया जा सकता था। मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि घायल कांग्रेसियों की जान बचाई जा सकती थी। कोर्ट को तत्कालीन एसपी मयंक श्रीवास्तव ने सफाई देते हुए कहा कि केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश भी वहां पहुंचने वाले थे। इसके चलते एम्बुलेंस को सुरक्षित रखा गया था।

               सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि परिवर्तन यात्रा के दौरान काफिले आगे एक ट्रक के चलने की बात भी सामने आई है..जबकी उसे उस दौरान होना ही नहीं चाहिए था। क्योंकि वीआईपी काफिला जहां से भी गुजरता है…सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के मद्देनजर सारे वाहनों को दूर रखा जाता है। सवाल का जवाब देते हुए मयंक श्रीवास्तव ने कहा कि तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को रास्ता क्लियर रखने के निर्देश दिया गया था। इसे लिखित में नहीं दिखाया गया है।

               प्रतिपरीक्षण में मयंक श्रीवास्तव ने दावा किया कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गए थे। कांग्रेस अधिवक्ता ने पूछा कि मुख्यमंत्री की विकास यात्रा के दौरान की गई सारी सुरक्षा व्यवस्था को पेश प्रतिवेदन में विस्तार से लिखा गया है। लेकिन परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था के साथ ऐसा क्यों नहीं किया गया। जवाब में एसपी ने कहा कि वहां सारे विभागों के अधिकारी और लोग भारी संख्या में उपस्थित थे। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था ठीक थी। परिवर्तन यात्रा में केवल गाडियों का काफिला ही था जिसके चलते सुरक्षा के इंतजाम काफिले में शामिल वीआईपी की संख्या के अनुसार ही किया गया।

                    बीजापुर में परिवर्तन यात्रा को सुरक्षा देने के लिए रास्तों के दोनों ओर सुरक्षा पार्टी लगाई गयी थी। जिसको तीन टुकड़ियों में बांटा गया था। बीजापुर एस पी ने अपने क्षेत्र में 33, 30और 25 जवानों का बल लगाने की बात लिखी है। जबकि बस्तर में कामानार से दरभा और दरभा से सुकमा के लिए एक-एक टीम लगाई गई थी। कुल 28 जवानों का बल ही लगाया गया था। कांग्रेस अधिवक्ता ने बताया कि सुरक्षा में चूक हुई है।

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