मेरा बिलासपुर

झीरम घाटी काण्ड– प्रतिपरीक्षण में उलझे गवाह

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बिलासपुर—विशेष न्यायालय के सामने झीरम घाटी मामले में आज केशलूर थाने के एसडीओपी भारतेन्दु द्विवेदी और एडिशनल एस.पी. सुभाष सिंह का प्रतिपरीक्षण हुआ। विशेष न्यायधीश जस्टिस प्रशांत मिश्रा के सामने प्रतिपरीक्षण के दौरान गवाहों ने काफी विरोधाभास बयान दिया। अधिवक्ता सुधीश श्रीवास्तव के सवाल पर एसडीओपी भारतेन्दु द्विवेदी ने माना कि झीरम घाटी से केशलूर के बीच एक टीम तैनात की गई थी। उस दौरान अतिरिक्त बल तैनात करने के लिए हमारे पास जवान नहीं थे। ना ही इस संदर्भ में मैने बस्तर एस.पी और आईजी से बात की थी। झीरम घाटी में तैनात की गयी टीम में केन्द्र और राज्य को मिलकर कुल 28 जवान शामिल थे।

                 भारतेन्दु द्विवेदी ने विशेष न्यायालय के सामने अधिवक्ता सुधीश श्रीवास्त्व के प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा कि घटना स्थल से तीन किलोमीटर पहले मंदिर के पास एक टीम तैनात थी। एक और सवाल के जवाब में भारतेन्दु ने माना कि एसडीओपी की पास कुछ थाने होते हैं जिनका काम सुपर विजन करना और थाने में चल रही गतिविधियों की गोपनीय प्रतिवेदन एसपी को देना होता है। इसमें थानों में दर्ज मामलों की सत्यता की जांच भी शामिल होती है। लेकिन झीरम घाटी मामले में ऐसी कोई विशेष जांच नहीं की गयी।

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                   प्रतिपरीक्षण के दौरान भारतेन्दु ने कोर्ट को गुमराह करने के उद्देश्य से मौके पर दो टीम तैनात होना बताया। जबकि शुरू से लेकर अब तक की प्रतिपरीक्षण में शासन की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज में सिर्फ एक टीम तैनात होने की बात सामने आयी है। झीरम घाटी काण्ड जांच की जिम्मेदारी जब एनआईए को सौंपी गयी तो उस दौरान टीम के साथ कुछ जवानों को भेजा गया था। लेकिन इसमें एसडीओपी भारतेन्दु शामिल नहीं थे।

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                   द्विवेदी ने बताया कि घटना के तीन माह बाद तक एसडीओपी रहे। उस दौरान झीरम घाटी काण्ड मे कोई गिरफ्तारी नही हुई थी। परिवर्तन यात्रा के समय आईजी बस्तर ने सुरक्षा योजना को लेकर कोई बैठक नही ली थी लेकिन एसपी ने जरूर बैठक ली थी। बैठक में परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा को लेकर चर्चा हुई थी। केन्द्र और राज्य के कितने जवान बस्तर मे तैनात हैं इस पर कोई बात नहीं हुई थी।

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         प्रतिपरीक्षण के दौरान यह बात भी समाने आयी की हर रक्षित केन्द्रो मे खोजी डाग स्क्वायड होता है। जिनका उपयोग सुरक्षा के मद्देनजर बम आदि की खोज मे किया जाता है। झीरम घाटी कांड के समय डाग स्क्वायड का उपयोग नही किया गया ।

               झीरम घाटी काण्ड पर सुनवाई 23 मई तक होनी थी। लेकिन एडिश्नल एसपी एस.के.सलाम की गवाही नहीं होने से तारीख को बढ़ा दिया गया है। 26 और 27 जून को एडिशनल एसपी सलाम का प्रतिपरीक्षण किया जाएगा। सलाम तत्कालीन समय परिवर्तन यात्रा के सुरक्षा प्रभारी थे।

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        महत्वपूर्ण दस्तावेज को नहीं किया पेश

          प्रतिपरीक्षण में सुभाष सिंह ने एडीजे गुप्त वार्ता पत्र सामने नहीं रखा है। कुछ छिपाया जा रहा है। परत दर परत सच्चाई सामने आने लगी है। यात्रा के दौरान भारतेन्दु तीन जगह के प्रभारी थे। सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन पर थी। एक व्यक्ति तीन जगहों पर सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामलों पर 100 प्रतिशत कैसे काम कर सकता है। एक रोड ओपेन करने में घंटो लग जाते हैं। जबकि तीनों स्थान बहुत दूर-दूर तक हैं। जाहिर सी बात है कि सुरक्षा में भारी चूक हुई है।

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