टीचर्स एसोसिएशन की मांग पर 2 वर्ष में संविलियन क्रियान्वयन का दिया मुख्यमंत्री ने भरोसा,संविलियन क्रियान्वयन आदेश हेतु दीप जलाने का हुआ प्रभाव

बिलासपुर।सभी क्षेत्रों में कटौती के मद्देनजर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने संविलियन हेतु शासन से आदेश में विलंब पर कोरोना संकट आशंका समझ संविलियन क्रियान्वयन आदेश हेतु 1 जुलाई को दीप जलाने का निर्णय लेकर हजारो शिक्षको ने दीप जलाकर 2 वर्ष में संविलियन की घोषणा पर क्रियान्वयन आदेश जारी करने की मांग की थी।ज्ञात हो 3 मार्च को विधानसभा बजट में 2 वर्ष पूर्ण करने वाले शिक्षको को 1 जुलाई को संविलियन करने का निर्णय लिया गया था पर शिक्षा विभाग द्वारा आदेश ही नही निकाला गया था,,इतिहास गवाह है केवल भरोसा करने से नही बल्कि सही समय पर मांग को पहुंचाने से ही सकारात्मक हल निकला है।CGWALL NEWS के व्हाट्सएप न्यूज़ ग्रुप से जुडने यहाँ क्लिक कीजिये  

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजीद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, विनोद गुप्ता, प्रदेश सचिव मनोज सनाढ्य, प्रदेश कोषाध्यक्ष शैलेन्द्र पारीक ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा है कि वित्तीय स्थिति के कारण शिक्षा व्यवस्था को कमजोर न होने दे, वैसे भी प्रक्रिया में कम से कम एक माह का समय लग ही जाता है,वित्तीय स्थिति बेहतर होते तक राजपत्र में 2 वर्ष में संविलियन का प्रावधान व डीपीआई, संयुक्त संचालक, डीईओ से व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक का संविलियन आदेश जारी करने, व कर्मचारी आईडी, प्रान शिफ्टिंग, कार्मिक सम्पदा की प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश जारी किया जावे।

मुख्यमंत्री के नवीन बयान के बाद जिन्होंने अब तक 8 वर्ष पूर्ण कर लिया है ऐसे शिक्षक संवर्ग के संविलियन का डीपीआई द्वारा आदेश जारी किया जावे। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने ज्ञापन, सोशल मीडिया, फेसबुक व ट्विटर के माध्यम से CMO को टैग करके तथा संविलियन क्रियान्वयन दीप के माध्यम से प्रदेश व्यापी मुहिम बनाकर सकारात्मक ढंग से 2 वर्ष में संविलियन की मांग को मुख्यमन्त्री जी तक पहुंचाया है, छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने बेहद सकारात्मक ढंग से सूझबूझ पूर्वक संविलियन आदेश के लिए पहल किया था।विदित हो कि पूर्व में 8 वर्ष में संविलियन का प्रावधान था जिसे मुख्यमंत्री जी ने ही 8 वर्ष के जगह अवधि कम कर 2 वर्ष में संविलियन करने जनघोषणा पत्र में उल्लेख किया था, तदानुसार विधानसभा बजट में निर्णय लिया था।

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