ठेले पर शव ले जाने की मजबूरी:कांग्रेस का आरोप-रमन सरकार की लापरवाही से मानवता हुई शर्मसार

रायपुर।छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि यह शर्मनाक घटना एक बार नहीं सैकड़ों बार इस प्रदेश में दोहराई जा चुकी है।स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं और उनसे मिलने वाले लाभ की छत्तीसगढ़ में जितनी चर्चा नही है उतनी ज्यादा चर्चाएँ तो यहाँ की लचर व्यवस्थाओं की है. छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले से एक बार फिर मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है. जहाँ एक शव की एम्बुलेंस नही मिलने पर ठेले में लाद कर शव को पीएम के लिए अस्पताल ले जाया गया, इसी तरह की घटना बीते माह राजधानी के एम्स अस्पताल से सामने आया था. उसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने व्यवस्था दुरुस्त करने कोई भी योजना नही बनाया है, इसका परिणाम आज जांजगीर चांपा जिले के कुरदा गाँव में देखने को मिला जहाँ एक मृतक को मरणोपरांत मुक्तांजली तक नसीब नहीं हुआ।




विकास तिवारी ने कहा कि मृतक के परिजनों ने प्रशासन पर भेद भाव का आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने मुक्तांजली के लिए स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के सामने गुहार लगाई पर उनकी गुहार अनसुनी कर दी गई। यदि यही वाक्या किसी रसूखदार के साथ होता तो वाहनों की लाइन लग जाती। चांपा थानान्तर्गत गांव के पटेलपारा में एक युवक ने बीती रात अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। पुलिस ने उसके पास से सुसाइड नोट भी बरामद किया है, जिसमें मामला सामाजिक बहिष्कार का है। युवक का नाम गणेशराम पिता संतराम पटेल उम्र (22)  है। उसके बड़े भाई संतोष ने अन्य समाज की लड़की से शादी कर ली और अलग रहने लगा। इसके साथ ही गाड़ी खरीदी थी, जिसका पैसा पटाने को लेकर परेशान था। युवक ने सुसाइड नोट में अपने बड़े भाई संतोष को घर में रहकर भाई बहनों की देखभाल करने का आग्रह किया है। फिलहाल, पुलिस मामले में मर्ग कायम कर विवेचना कर रही है।




तिवारी ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है. गणेश राम पटेल जिसकी मृत्यु के बाद परिजनों को उसके शव को ठेले में लेकर जाना पड़ा है. यह शर्मनाक घटना एक बार नहीं सैकड़ों बार इस प्रदेश में दोहराई जा चुकी है. कुछ दिन पूर्व राजधानी रायपुर के एम्स अस्पताल से भी इसी प्रकार एक युवक की शव उसके परिजन ठेले में लादकर ले जाने को मजबूर हो गए थे. जहां एक और प्रदेश सरकार के मुखिया उनके मंत्री और आला अधिकारियों को बड़ी से बड़ी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं झटपट मुहैया हो जाती है. वहीं दूसरी ओर गरीब मजदूर दलित आदिवासी लोगों को भयावह स्थिति का सामना करना पड़ता है. विकास ने कहा कि एक ओर प्रदेश सरकार की मुक्तांजलि योजना कठिन हो रही है. वही मृत्यु के बाद परिजन अपने नातेदारों का शव ठेलों में लादकर ले जाने को मजबूर हैं. प्रदेश सरकार का यह कृत्य पूरे विश्व भर में छत्तीसगढ़ को शर्मसार करने पर मजबूर कर देता है. इसी कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व बैंक द्वारा चिकित्सा के क्षेत्र में दी जाने वाली करोड़ों अरबों की राशि बंद कर दी गई है. विकास ने कहा कि सुदूर बस्तर में गरीब आदिवासी दलित सतनामी समाज के पर्याय लोग अपने परिजनों का शव उल्टी खाट में लादकर या बांस की चेली बनाकर अस्पताल से सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने गांव ले जाने को मजबूर हैं।

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