डीएफओ और सीसीएफ होंगे मौत के जिम्मेदार

jtendra sahuबिलासपुर—वनमण्डल बिलासपुर बांका बीट गार्ड ने सीसीएफ,डीएफओ और अन्य अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। परेशान कर्मचारी ने सोशल मीडिया में अपनी पीड़ा को जाहिर किया है। जितेन्द्र ने बताया कि यदि मेरी मौत होती है तो इसकी जिम्मेदारी वनण्डलाधिकारी पैकरा और सीसीएफ बी.आनंद बाबू होंगी। दोनो के अलावा फारेस्ट विभाग के अन्य अधिकारियों ने मेरा जीना मुश्किल कर दिया है।

                       वनकर्मचारी प्रांतीय नेता और बीट गार्ड बांका जितेन्द्र साहू ने बताया कि यदि काम के दौरान मेरी मौत हो जाती है तो इसके लिए सीसीएफ और डीएफओ जिम्मेदार होंगे। जितेन्द्र साहू के अनुसार वन विभाग अधिकारियों की तिकड़ी ने मेरा जीना हराम कर दिया है। बिना सिर पैर के आरोप गढ़कर मुझे नौकरी से निकालने की साजिश रच रहे हैं।

                                                                       एक शिकायत पर बार बार जांच जांच पड़ताल समझ में नहीं आ रहा है। एक ही अधिकारी जांच पड़ताल का आदेश दे रहा है और एक ही टीम बार बार जांच कर रही है। जबकि चौथे जांच आदेश के पहले शिकायत की तीन बार जांच हो चुकी है। शिकायत पर पहली तीन जांच उड़नादस्ता टीम ने किया। टीम ने रिपोर्ट भी सौंप दिया…। रिपोर्ट में क्या कुछ लिखा पढ़ा गया मुझे नहींं मालूम। एक बार फिर सीसीएफ और डीएफओ ने जांच का आदेश दिया गया है। इससे जाहिर होता है कि पहले तीनों जांंच में उसकी गलती नहींं पायी गयी। इसलिए गलती निकालने चौथी बार जांच का आदेश दिया गया। इस बार भी जांच टीम वही है जो पिछले जांच के दौरान थी…मतलब उड़ानदस्ता टीम।

                                              जितेन्द्र ने बताया कि मेरे खिलाफ एक व्यक्ति ने बांका बीट में चार पेड़ों की अवैध कटाई की शिकायत की थी। शिकायत के बाद जांंच के लिए उड़नदस्ता टीम को भेजा गया। जांच टीम को क्या हासिल हुआ इसकी जानकारी मुझे अभी भी नहीं है। इस तरह कुल तीन बार मेरे खिलाफ जांच बैठाया गया…रिपोर्ट डीएफओ और सीसीएफ को दिया गया। इसके बाद चौथी बार जांच का आदेश समझ में नहींं आ रहा है। इससे जाहिर होता है कि मुझे फंसाने के लिए सीसीएफ और डीएफओं ने कमर कस ली है।

                             कर्मचारी नेता ने बताया कि बार बार की जांच और षड़यंत्र से परेशान हो गया है। मै परिवार और दोस्तों के बीच असामान्य महसूस करने लगा हूं। मेरी प्रतिष्ठा गिर रही है। मैं अपने आप में अपराधबोध महसूस करने लगा हूं। यदि ईमानदारी की सजा जांच है तो मैं अब क्या करूं। जीना मुश्किल हो गया है। किसी को जवाब देते नहीं बन रहा है। एक शिकायत पर बार बार जांच षड़यंंत्र की तरफ इशारा करते हैं। सीसीएफ और डीएफओ मुझे घुटना टेकने के लिए मजबूर कर रहे हैं। कर्मचारी नेता ने बताया कि अधिकारियों की चाल कामयाब नहीं होने दूंगा। जितेन्द्र के अनुसार शिकायतकर्ता मुझ पर लगातार रूपए के लिए दबाव बना रहा है। रूपए देने के बाद शिकायत वापस लेने की बात करता है। लेकिन मैं ऐसा हरगिज नहीं करने वाला। यदि इस दौरान मेरी मौत होती है तो इसके लिए सीसीएफ बी.आनन्द बाबू, डीएफओ पैकर जिम्मेदार होंगे।

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