डीन और कर्माचारियों पर दर्ज होगा एफआईआर

cimsबिलासपुर–छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान में वर्ष 2014 में तृतीय और चतुर्थ वर्ग श्रेणी के विभिन्न पदो की भर्ती की गई। भर्ती प्रक्रिया शुरू से ही विवादो में घिरा हुआ है। आए दिन होने वाली शिकायतो को देखते हुए तात्कालीन कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल परदेशी के निर्देश पर संयुक्त कलेक्टर ने  एक टीम बनाकर जांच का आदेश दिया। टीम ने भर्ती प्रक्रिया के दस्तावेज जब्त किए थे। लेकिन अब तक भर्ती प्रक्रिया की जांच पूरी नही हो पायी है। वर्तमान में एडिश्नल कलेक्टर ने सिम्स प्रबंधन से भर्ती से जुडे कुछ और दस्तावेजो की मांग की है। दस्तावेज नहीं मिलने की सूरत में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।

                       छत्तीसगढ़ मेडिकल कालेज में तृतीय और चतुर्थ वर्ग श्रेणी के रिक्त पदों की भर्ती के साल 2014 में सारे नियमो को ताक पर रखते हुए अपनो को पंजीरी बांट दिया। भर्ती के बाद बहुत से अभ्यार्थियो ने मामले में कलेक्टर से शिकायत की थी। लगातार मिल रही शिकायतो को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने एडिश्नल कलेक्टर नीलकण्ठ टेकाम को जांच का जिम्मा सौंपा था। एडिश्नल कलेक्टर टेकाम ने कलेक्टर अधीक्षक एनआर सूर्यवंशी के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया। भर्ती प्रक्रिया से संबंधित कागजात को जब्त करने का आदेश दिया था। टीम ने कार्यावाही करते हुए 5नवम्बर 2014 को सिम्स में दबिश देकर तत्कालीन डीन एस एस मोहन्ती के कार्यालय समेत अन्य विभागो से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्ती के दस्तावेज जब्त भी किए थे।

                               टीम ने जब्त दस्तावेजों को एडिश्वनल कलेक्टर नीलकण्ठ टेकाम को सौंपा था। जांच चलती रही 50 से अधिक शिकायतकर्ताओ के बयान दर्ज भी किए गए। दबिश के दौरान जप्त दस्तावेजो को खंगाला गया। जिनमें से कई कागजात गायब पाये गये। एडिश्नल कलेक्टर नीलकण्ठ टेकाम ने एक बार फिर सिम्स प्रबंधन को पत्र लिखकर दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा।  नये डीन विष्णुदत्त ने कलेक्टर से दस्तावेजो के गायब होने की सूचना दी है। जिसके बाद से भर्ती प्रक्रिया में हो रही जांच अपने अंजाम तक नही पहुच पाई ।

                     एडिश्नल कलेक्टर नीलकण्ठ टेकाम ने कहा है कि प्रथम दृष्टया ही गड़बडी होने के संकेत मिल चुके है। सिम्स प्रबंधन को तीन दिन में दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये थे लेकिन सात दिन बाद भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। दस्तावेज उपलब्ध नही कराये गये तो तत्कालीन डीन और भर्ती से जुडे अधिकारियो और कर्मचारियो के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया जाएगा। जांच को जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

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