“डी” क्लास कर्मचारी…”ए” क्लास ठेकेदार

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IMG-20160616-WA0163बिलासपुर–बिजली विभाग का डी क्लास कर्मचारी पीडब्लूडी का ए क्लास ठेकेदार है। पीडब्लूडी विभाग में सचिन क्षत्री का नाम काफी जाना पहचाना है। सचिन क्षत्री का नाम पीडब्लूडी के ठेकेदारों में अग्रिम पंक्ति में लिया जाता है। साथ ही सीएसईबी का सरकारी कर्मचारी भी है। दोनों ही जगह सचिन का दबदबा है। पीडब्लूडी में टेन्डर किसे दिलाना है और कैसे दिलाना है…सचिन को अच्छी तरह मालूम है। सीएसईबी कर्मचारी सचिन क्षत्री पीडब्लूडी में साले के नाम पर ठेकेदारी करता है।

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                          नियमों के अनुसार सरकारी कर्मचारी किसी अन्य संस्थान से जुड़कर लाभ का काम नहीं कर सकता है। सचिन क्षत्री को यह अच्छी तरह से मालूम है। इसलिए साले के लायसेंस पर पीडब्लूडी ही नहीं बल्कि बिजली विभाग में भी ठेकेदारी करता है।

                              मिली जानकारी के अनुसार सचिन बिजली विभाग में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद ज्यादातर समय इलेक्ट्रिकल एंड मेकेनिकल विभाग को देता है।पीडब्लूडी अधिकारियों की मानें तो उन्हें जानकारी नहीं है कि सचिन क्षत्री सीएसईबी का कर्मचारी है। वह टेन्डर के सिलसिले में विभाग में आता रहता है। हम लोग बस इतना जानते हैं कि वह ए क्लास ठेकेदार है। किसी नगेन्द्र सिंह की सिफारिश करने विभाग में आता है।

                                                        बिजली विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि सचिन क्षत्री डी क्लास कर्मचारी जरूर है लेकिन पीडब्लूडी में अच्छी रसूख रखता है। चूंकि उसका काम फील्ड का है इसलिए पता नहीं चलता कि वह एक साथ क्या क्या काम करता है। जानकारी के अनुसार सचिन क्षत्री ने बिजली विभाग के काम के लिए कुछ निजी स्तर पर कर्मचारी भी रखा है। जब वह ठेकेदारी के काम में व्यस्त रहता है तो बिजली विभाग का सारा काम उसके कर्मचारी करते हैं। अथवा वह छुट्टी पर रहता है।

                          पीडब्लूडी विभाग के एक बाबू ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अधिकारियों को अच्छी तरह से मालूम है कि सचिन क्षत्री नगेन्द्र सिंह के नाम पर ठेकेदारी करता है। अधिकारियों की विशेष कृपा से उसे पीडब्लूडी के बड़े बड़े काम सहज ही मिल जाते हैं। सचिन इलेक्ट्रिानिक सामानों का सप्लायर भी है। अधिकारियों को वह कभी नाराज नहीं करता। मरवाही, पेन्ड्रा, कोटा जांजगीर ,अंबिकापुर के अलावा रायगढ़ में उसका ठेका चल रहा है।

                            सचिन को बड़े अधिकारियों का वरदहस्त हासिल है। जाहिर सी बात है कि लेन देन भी जमकर करता है। सचिन की बाबूओं वर्ग में अच्छी पैठ है। फोटो में देखा जा सकता है कि सचिन ईएण्डएम विभाग में कुछ इस तरह से बैठा है जैसे विभाग का कोई कर्मचारी हो। अन्दर से मिली जानकारी के अनुसार सचिन बाबूओं के काम में हाथ भी बंटाता है। कभी टेण्डर फार्म तो कभी टेन्डर का लिफाफा कलेक्ट करता है। जरूरत पड़ने पर फाइलों को भी इधर उधर करता है। लोगों को कहना है कि सचिन को कभी आरटीआई की जरूरत नहीं है। वह विभाग के अन्दर की बात को बड़ी आसानी से हासिल कर लेता है। इसलिए ठेकेदार मस्त और अधिकारी मौन है।

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