हमार छ्त्तीसगढ़

डॉ महंत बोले-जनता को शिक्षा से वंचित रखकर मुफ्त चावल-नमक-मोबाइल बांट रही रमन सरकार

रायपुर-छत्तीसगढ़ काँग्रेस कमेटी के चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री काँग्रेस के दिग्गज नेता डॉ चरणदास महंत ने छत्तीसगढ़ की शिक्षा प्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी की छत्तीसगढ़ की रमन सरकार से प्रश्न किया है कि क्या चावल, नमक और मोबाइल फोन बांटने से छत्तीसगढ़ की जनता का विकास होगा?डॉ चरणदास महंत ने कुछ आंकड़े पेश करते हुए छत्तीसगढ़ की शिक्षा की वास्तविक स्थिति के बारे मीडिया के माध्यम से जनता को अवगत कराया गया है जो इस प्रकार है,छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षा का बुरा हाल है। छत्तीसगढ़ में शिक्षा का स्तर इतना गिरा हुआ है कि गांवों के 8वीं कक्षा के 73.5 फीसदी छात्र-छात्राएं ही 2री कक्षा के पाठ पढ़ सकते हैं। इसी तरह से ग्रामीण छत्तीसगढ़ में 5वीं कक्षा के 56 फीसदी छात्र-छात्राएं ही 3री कक्षा के पाठ पढ़ सकते हैं। छत्तीसगढ़ में पंचायत शिक्षकों के करीब 19 फीसदी पद, प्राथमिक शालाओं के प्रधान-पाठक के 60 फीसदी पद, पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान-पाठकों के 33 फीसदी पद, हाई स्कूल के प्राचार्य के 70 फीसदी पद तथा उच्चतम माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य के 39 फीसदी पद खाली पड़े हैं।

ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ में कुल 30,371 प्राथमिक स्कूल 13,117 पूर्व माध्यमिक स्कूल 1,940 हाई स्कूल तथा 2,380 हायर सेकेंड्री के स्कूल हैं, उनमें ये पद रिक्त पड़े हैं। जाहिर है कि जब स्कूलों में शिक्षा देने वाले शिक्षकों का ही अभाव है तो शिक्षा का स्तर तो गिरना लाज़मी है।
आश्चर्य की बात है कि उस जमाने में जब राज्य में पंजीकृत शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 19 लाख 53 हजार 5 सौ 56 है, शिक्षक, प्रधान-पाठक तथा प्राचार्य के 36 हजार 38 पद खाली पड़े हुए हैं। इससे साफ पता चलता है कि एक तरफ छत्तीसगढ़ के शिक्षित बेरोजगारों को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है कि उन्हें किस विषय में अध्ययन करना चाहिए, दूसरी तरफ शिक्षा विभाग में 36,038 पद खाली पड़े हैं। जिसका सीधा-सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।

शायद यही कारण है कि छत्तीसगढ़ के गाँवों में शिक्षा की हालत विचारणीय है। ग़ौरतलब है कि ताज़ा अध्ययन के अनुसार ग्रामीण छत्तीसगढ़ में 5वीं कक्षा के 56 फीसदी छात्र-छात्राएं ही 3री कक्षा के पाठ पढ़ सकते हैं। जिसमें से सरकारी स्कूलों के 51 फीसदी तथा निजी स्कूलों के 75.9 फीसदी ही 5वीं कक्षा के पाठ पढ़ सकते हैं। यह 2016 का आंकड़ा है। जबकि इसकी तुलना में 2010 में 5वीं कक्षा के 61.6 फीसदी छात्र-छात्राएं 3री कक्षा के पाठ सकते थे, इसका अर्थ यह हुआ कि पिछले 6 सालों में ग्रामीण शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है।
इसी तरह से 8वीं कक्षा के 73.5 फीसदी छात्र-छात्राएं ही 2री कक्षा के पाठ पढ़ सकते हैं, जिसमें 70.9 फीसदी सरकारी स्कूलों के तथा 89.9 फीसदी निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। यह 2016 का आंकड़ा है। इसकी तुलना में 2010 में 8वीं कक्षा के 92.7 फीसदी छात्र-छात्राएं 2री कक्षा के पाठ पढ़ सकते हैं। यहां भी शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है।

जहां तक गणित का सवाल है यह पाया गया कि 3री कक्षा के 3.8 फीसदी छात्र-छात्राएं 1 से 9 तक की संख्या को नहीं पहचान पाते हैं। 38.6 फीसदी 9 तक की संख्या को पहचान पाते हैं परन्तु 99 तक की संख्या को वे नहीं पहचान पाते हैं। 37.6 फीसदी 99 तक की संख्या को पहचान पाते हैं परन्तु इन्हें घटाना नहीं आता है, 16.5 फीसदी को घटाना आता है परन्तु उन्हें विभाजन करना नहीं आता है।

दाधापारा-उरकुरा के बीच कोरिडोर ब्लॅाक...ये सवारी गाडियाँ रहेंगी कैन्सल

कक्षा 5वीं के 23.1 फीसदी छात्र-छात्राओं को विभाजन आता है जबकि साल 2010 में इससे ज्यादा 38.9 फीसदी को विभाजन आता था. इसी तरह से कक्षा 8वीं के 28.1 फीसदी को विभाजन आता है जबकि साल 2010 में 77.6 फीसदी को विभाजन आता था। इस तरह से इस मामले में भी शिक्षा का स्तर गिरा है।

जहां तक अंग्रेजी पढ़ने की बात है 3री कक्षा के 22.8 फीसदी छात्र-छात्राएं अंग्रेजी का कैपिटल लेटर नहीं पढ़ पाते हैं, 23.2 फीसदी अंग्रेजी का कैपिटल लेटर पढ़ सकते हैं परन्तु स्माल लेटर नहीं पढ़ सकते हैं।डॉ चरणदास महंत ने भाजपा सरकार से पूछा कि 15 साल से छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार होने के बावजूद शिक्षा की स्थिति बदतर क्यों है? जिसका मतलब साफ है कि या तो भाजपा छत्तीसगढ़ की जनता को शिक्षित नहीं करना चाहती है ताकि प्रलोभन देकर वोट बटोरे जा सकें या फिर भाजपा को शिक्षा का महत्व ही नहीं समझता।
डॉ चरणदास महंत ने साफ किया कि प्रदेश में काँग्रेस की सरकार आने के बाद सर्वप्रथम शिक्षा पर जोर दिया जाएगा ताकि रोजगार उत्सर्जन हो सके और खास कर आदिवासी, एस सी, एस टी, ओबीसी, मजदूर, किसान और ग्रामीण वर्ग शिक्षित होकर समाज की मुख्य धारा में शामिल होकर छत्तीसगढ़ के विकास में अहम भूमिका निभा सके क्योंकि “पढ़ेगा छत्तीसगढ़ तभी तो बढ़ेगा छत्तीसगढ़”

Back to top button
CLOSE ADS
CLOSE ADS