दर्राभाठा में डायरिया से 200 से अधिक बीमार…ग्रामीणों ने बताया एनटीपीसी को जिम्मेदार

IMG-20170612-WA0015  बिलासपुर— सीपत थाना क्षेत्र के दर्राभाटा में अब तक 200 से अधिक लोग डायरिया के शिकार हो चुके हैं। दो दिन से स्वास्थ्य महकमा अस्थायी शिविर लगाकर ग्रामीणो का इलाज कर रहा है। जिला प्रशासन का भी मरीजों पर पल-पल की गतिविधियों पर नजर है।  डायरिया की मुख्य वजह एनटीपीसी के प्रदूषित पानी को बताया जा रहा है। फिलहाल सभी मरीजों की देखभाल की जा रही है। सिम्स और जिला चिकित्सालय में भी डायरिया पीड़ित करीब एक दर्जन लोगों का इलाज किया जा रहा है।

                    दो दिन से सीपत थाना क्षेत्र का दर्राभाटा गांव डायरिया के चपेट में हैं। लगातार मिल रही डायरिया की शिकायत के बाद जिला स्वास्थ्य महकमा पीड़ित ग्रामीणों का इलाज शिविर लगाकर कर रहा है। जानकारी के अनुसार करीब सात हजार से अधिक आबादी वाले गांव में 200-250 ग्रामीण डायरिया के चपेट में है। बच्चे बूढे और नौजवान के अलावा महिलाएं डायरिया से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

                                  लगातार उल्टी दस्त की शिकायत के बाद जिला स्वास्थ्य महकमा ने क्षेत्र में इलाज के लिए अस्थायी शिविर लगाया है। गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को सिम्स और जिला चिकित्सालय भेजा जा रहा है। सिम्स और जिला चिकित्सालय में इस समय एक दर्जन से अधिक डायरिया पीड़िता का इलाज चल रहा है।

              व्यापक स्तर पर डायरिया के प्रकोप को देखते हुए गांव के स्कूल और पंचायत भवन को अस्थायी रूप से अस्पताल बना दिया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.बर्डे ने बताया कि चिकित्कों की नजर एक एक मरीज पर है। सभी का बेहतर इलाज किया जा रहा है। धीरे धीरे लोगों के स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल रहा है। व्यापक स्तर पर डायरिया की मूल वजह पानी है। गांव में एक ही हैंडपम्प है। सम्भावना जताई जा रही है कि हैन्डपम्प का पानी पीने से लोग बीमार हुए हैं।

                          मुख्यचिकित्सा अधिकारी के अनुसार मौके पर एम्बूलेन्स की सुविधाएं ली जा रही हैं। घर-घर पहुंचकरIMG-20170612-WA0019 ग्रामीणों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया जा रहा है। गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों का इलाज शिविर में हो रहा है। मरीजों को लाने ले जाने का काम एम्बुलेन्स से हो रहा है।

गांव में एक मात्र हैन्डपम्प

               डायरिया पीड़ित एक महीला ने बताया कि गांव में मात्र एक हैन्डपम्प है। गांव की निस्तारी उसी से होती है। पेयजल से लेकर अन्य सारा काम एक ही हैन्डपम्प से होता है। हैन्डपम्प के पास एनटीपीसी का गंदा पानी का इकठ्ठा होता है। जिसके कारण हैन्डपम्प से निकलने वाला पानी भी प्रदूषित हो गया है। हैण्डपम्प के पास जमा पानी को जानवार भी नहीं पीते हैं।

ग्रामीणों ने किया था विरोध

                     शिविर में इलाज करवा रहे एक मरीज ने बताया कि हम लोगों ने पानी जमाव का विरोध किया था। एनटीपीसी प्रबंधन के अलावा इसकी शिकायत जिला प्रशासन से भी की थी। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। सरपंच एनटीपीसी से मिला हुआ है। इसलिए उसने पानी जमाव का विरोध नहीं किया। बहुत दिनों से एनटीपीसी का गंदा पानी हैन्डपम्प के पास जमा हो रहा है। पम्प के पानी से नहाने पर शरीर में खुजली भी होती है। हैन्डपम्प से निकलने वाले पानी का स्वाद भी अच्छा नहीं है।

जिला प्रशासन ने दिया था आश्वासन IMG-20170612-WA0016

                  सरपंच और ग्रामीणों ने बताया कि हमने नया हैण्डपम्प के लिए कई बार पत्र लिखा। पीएचई विभाग ने नया हैन्डपम्प नहीं लगाया। हैन्डपम्प पुराना हो चुका है। पीएचई ने समय पर हैण्डपम्प लगाया होता तो आज पूरा गांव अस्पताल में नहीं होता।

मौके पर पहुंचा जिला प्रशासन

                    डायरिया प्रकोप के बाद कलेक्टर दयानन्द पी.समेत अन्य विभाग के लोग हालात को देखने दर्राभाठा पहुंचे। पीएचई के अधिकारी भी हैन्डपम्प का मुआयना किया। पानी के सैम्पल को लिया। कलेक्टर के निर्देश पर जल्द ही गांव में नया हैण्डपम्प लगाने की बात कही जा रही है।

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