मेरा बिलासपुर

दलबीर हत्याकाण्डः तीन को आजीवन कारावास

high court cgबिलासपुर—हाइकोर्ट ने गुरूवार को  एतिहासिक फैसला सुनाते हुए 2001 के दलबीर सिंह हत्याकाण्ड मामले में जिला सत्र न्यायालय के निर्णय को बहाल रखा है। मालूम हो कि 2001 में एक मामले में जिला सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान तीन लोगों ने एक केस में गवाही देने पहुंचे सीएमडी छात्र दरबीर सिंह को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा और उसके बाद हत्या कर दी।

                      पीड़ित परिजनों ने हत्याकाण्ड में शामिल लोगों के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायालय में वाद दायर किया। कोर्ट ने नीरज माली और उसके दो साथियों को आजीवन कारावास का दोषी ठहराया था। आज हाईकोर्ट की युगल पीठ ने जिला सत्र न्यायालय के निर्णय को बरकार रखते हुए नीरज माली,राजा दुबे संजय पाण्डेय को आजीवन कारावास का दोषी ठहराया है।

            जानकारी के अनुसार सीएमडी छात्र दलबीर सिंह एक पेशी में गवाही देने 2001 में जिला सत्र न्यायालय आए थे। इसी दौरान नीरज माली, राजा दुबे, संजय पाण्डेय , बउवा मरार और महेश शर्मा ने कोर्ट के सामने वर्किंग आवर के दौरान दलबीर सिंह को पहले दौड़ाकर पीटा और बाद में किसी धारदार हथियार से दिन दहाड़े कातिलाना हमला किया। घटना के बाद दलबीर सिंह को कुछ लोगों ने उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

                 घटना के बाद पीड़ित परिवार ने जिला एवं सत्र न्यायालय में गुहार लगाई। सुनवाई के बाद तात्कालीन अपर न्यायाधीश आलोक झा ने महेश शर्मा और बउवा मरार को राहत देते हुए नीरज माली, राजा दुबे और संजय पाण्डेय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने शंकर माली को आरोपियों को संरक्षण दिये जाने के आरोप में चार साल की सजा सुनाई थी।जिसके बाद उसे भी गिरफ्तार भी किया गया।

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             अपर न्यायालय के निर्णय के खिलाफ नीरज माली, संजय पाण्डेय और राजा दुबे ने 2002 में हाईकोर्ट में अपील की। मुख्य न्यायाधीश नवीन सिन्हा और न्यायाधीश सीएम कोशी की युगल बेंच ने पांच दिन पहले फैसले को सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा था। आज हाईकोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश के फैसले पर मुहर लगाते हुए तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

              मालूम हो कि  दलबीर सिंह हत्याकाण्ड के कुछ साल पहले माली परिवार के सदस्यों ने जिला कोर्ट परिसर से एक फर्लाग दूर मुन्ना सिंह की दिनदहाड़े हत्या की थी। मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संजय और अजय माली आजीवन कारावास भुगत रहे हैं।  जानकारी के अनुसार जिला सत्र न्यायालय ने शंकर माली को नेहरू चौक से एक फर्लाग की दूरी पर रेंजर के बेटे की हत्या करने के आरोप में सजा सुनाई थी। शंकर माली के बेटे नीरज माली पर शहर के लगभग सभी थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

                                नीरज ने कुछ साल पहले ही अपने साथियों के साथ मिलकर एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला करने का भी मामला दर्ज हुआ था। कोर्ट ने अंगभग करने के आरोप में नीरज को जेल भी भेजा था। शंकर माली पर जिला प्रशासन ने रासुका भी लगाया था । इसके अलावा उसके खिलाफ शहर के थानों में कई मामले  दर्ज है।

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