मेरा बिलासपुर

दृष्टिकोण में बदलाव की जरूरत–अग्रवाल

layngik utpidan ke sambandh me ek divasiya karyashala  (5)बिलासपुर– लिंग आधारित दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता है। समाज को वैश्विक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। लैंगिक उत्पीड़न रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता है।  पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर में आयोजित एक दिवसीय लैंगिक उत्पीड़न कार्यशाला के में  प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा  बी.एल. अग्रवाल ने कही।
प्रमुख सचिव  अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में लिंगानुपात  काफी अच्छा है। उच्च शिक्षा में भी लड़कियां बराबरी कर रही हैं। इससे जाहिर है कि अभिभावक जागरूक हुए हैं।  शासन ने कन्या शिक्षा के लिए कई योजनाएं संचालित की है। योजनाओँ के जरिए लड़कियों को शिक्षा के के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। संविधान में लैंगिक प्रताड़ना के खिलाफ कई प्रावधान हैं। बावजूद लैंगिक उत्पीड़न के लिए सामाजिक जागरूकता जरूरी है।

                        अग्रवाल ने कहा कि  कार्यशाला से बेहतर सुझाव मिलेंगे। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों से कई अहम् सुझाव मिलेंगे। बेहतर नितियां बनाने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि पं. सुंदरलाल मुक्त विश्वविद्यालय ने अपने एक दशक के कार्यकाल में उल्लेखनीय कार्य किया है। विश्वविद्यालय में 25 से 40 हजार शिक्षार्थी पंजीकृत है। विश्वविद्यालय ऐसे लोगों को शिक्षित कर रहा है जो नियमित रूप से पढ़ाई नहीं कर पाते।

अग्रवाल ने कहा कि हमें गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुखी शिक्षा की जरूरत है। अभी विश्वविद्यालय को बस्तर-सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों के शिक्षार्थियों को जोड़ना होगा। विश्वविद्यालय को लम्बा रास्ता तय करना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की समस्याएं शीघ्र ही दूर की जायेंगी । आवश्यक पदों की पूर्ति भी की जायेगी।
संभागायुक्त सोनमणि बोरा ने कहा कि संस्कार आधारित शिक्षा से ही लैंगिक उत्पीड़न में जागरूकता लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को ऐसे उत्पीड़न से रोकने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है। हमारे समाज में मानव अधिकार के तहत् सबको सामान्य रूप से जीने का अधिकार है। भारत के संविधान में भी मर्यादापूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिया गया है। लैंगिक उत्पीड़न के प्रति ऐसे वातावरण का निर्माण करें कि हमें कानून की जरूरत न पड़े।

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                     कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति वंशगोपाल सिंह ने कहा कि लैंगिक उत्पीड़न एक सामाजिक और नैतिक समस्या है। इसके निवारण के लिए नैतिकता को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा। कानून में सबको समान अधिकार दिया गया है। सामाजिक जागरूकता से लैंगिक उत्पीड़न का निराकरण किया जा सकता है।  विश्वविद्यालय के संबंध में आवश्यक जानकारी देते हुए कुलपति ने कहा कि सभी परीक्षाएं समय पर संपन्न हुई है। पाठ्य-पुस्तकों वितरण भी समय में लक्ष्य के अनुरूप किया जा रहा है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि कलेक्टर बिलासपुर  अन्बलगन पी. भी उपस्थित थे।

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